Sahitya AajTak
Sahitya AajTak

'मोदी के चमचा' कहे जाने पर बोले प्रसून जोशी- विदेश में अपने देश की बुराई कैसे करता

साहित्य आजतक में सेंसर बोर्ड (CBFC) के अध्यक्ष और गीतकार प्रसून जोशी ने कहा कि लोग सोचते हैं कि लंदन में मुझे हमारे प्रधानमंत्री से भारत के बारे में नेगेटिव सवाल पूछने चाहिए थे, लेकिन विदेश में जाकर क्या भारत की बुराई करना सही था? उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के अंदर वाकई एक फकीरी है.

Advertisement
aajtak.in
aajtak.in नई दिल्ली, 06 November 2019
'मोदी के चमचा' कहे जाने पर बोले प्रसून जोशी- विदेश में अपने देश की बुराई कैसे करता साहित्य आजतक के मंच पर प्रसून जोशी

  • साहित्य आजतक के मंच पर प्रसून जोशी ने रखे अपने विचार
  • उन्होंने कहा कि विदेश में देश की बुराई करना उचित नहीं
  • उन्होंने कहा कि पीएम मोदी में वाकई एक फकीरी है
  • जोशी ने कहा कि आलोचकों की दुकान बंद होनी चाहिए

सेंसर बोर्ड (CBFC) के अध्यक्ष और गीतकार प्रसून जोशी ने कुछ लोगों द्वारा खुद को मोदी का 'चमचा' कहे जाने पर कहा कि जब लोग किसी को इतनी आसानी से नाम दे देते हैं, तो इससे उनके बारे में ज्यादा पता चलता है मेरे बारे में नहीं. उन्होंने कहा कि लोग सोचते हैं कि लंदन में मुझे हमारे प्रधानमंत्री से भारत के बारे में नेगेटिव सवाल पूछे जाने चाहिए थे. मैं ऐसा क्यों करता, जब हम एक दूसरे देश में विदेशी निवेश को आकर्ष‍ित करने के लिए गए थे?
साहित्य आजतक 'इं‍ग्लिश' के एक महत्वपूर्ण सत्र में इंडिया टुडे टीवी के राहुल कंवल से बात करते हुए केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के अध्यक्ष और गीतकार प्रसून जोशी ने देश प्रेम, पीएम मोदी, सिनेमा जैसे विविध विषयों पर अपने विचार रखे.
साहित्य आजतक में रजिस्ट्रेशन के लिए यहां क्लिक करें

'पीएम मोदी के अंदर वाकई फकीरी है'
पीएम मोदी के बारे में प्रसून ने कहा, 'वाकई मैंने उनके अंदर कुछ फकीरी का भाव देखा है और मुझे यह काफी रोचक लगा. हम बेहद स्वार्थी समय में जी रहे हैं, लेकिन आज भी यदि उनके जैसे नि:स्वार्थ व्यक्ति हैं, जो अपना काम इतनी गंभीरता से कर रहे हैं, तो हमें उनकी तारीफ करनी चाहिए. उनके अंदर की फकीरी इस वजह से है क्योंकि वह अपने लिए कुछ नहीं कर रहे बल्कि देश के लिए कर रहे हैं. मैं इसे खुद में अपनाने की कोशिश करता हूं. मैं तो काम में डूबा रहने वाला व्यक्ति हूं और मैं अपनी पूरी क्षमता के साथ इसे करने की कोशिश करता हूं. अब मैं नरेंद्र मोदी के बारे में जो कुछ भी कहूंगा उसे गलत तरीके से पेश किया जाएगा.

साहित्य आजतक की पूरी कवरेज यहां देखें

'आलोचकों की दुकान बंद होनी चाहिए' 

प्रसून जोशी ने कहा कि किसी की आलोचना करना कठिन है, लेकिन क्या आलोचक इसके अलावा और कोई काम करते हैं? आलोचकों की दुकान बंद हो जानी चाहिए और हमें पॉजिटिविटी के मॉल खोलने चाहिए. राजकुमार संतोषी की फिल्म 'लज्जा' से भारतीय फिल्म उद्योग को प्रसून जोशी की प्रतिभा का पता चला था. अलग तरह की कहानी होने के बावजूद लज्जा एक सफल फिल्म रही और प्रसून जोशी ने अपनी छाप छोड़ दी. इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. फना से लेकर रंग दे बसंती, तारे जमीन पर, ब्लैक, दिल्ली 6, भाग मिल्खा भाग जैसी फिल्मों तक प्रसून जोशी ने फिल्मों की दुनिया को नए रंग दिए. इन उपलब्धियों की वजह से ही प्रसून जोशी को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) का अध्यक्ष बनाया गया. उन्होंने पहलाज निहलानी का स्थान लिया था, जिनका कार्यकाल काफी विवादित रहा था. यह कहना उचित होगा कि पिछले दो साल में उन्होंने बेहतरीन काम किया है.

गौरतलब है कि साहित्य का सबसे बड़ा महाकुंभ 'साहित्य आजतक 2019' इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में पिछले दो दिन से जारी है. साहित्य, कला, संगीत, संस्कृति का यह जलसा 3 नवंबर तक चलेगा. शुक्रवार सुबह साहित्य आजतक का आगाज छायावादी युग के प्रसिद्ध कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की वाणी वंदना से हुआ. तीन दिन तक चलने वाले साहित्य के महाकुंभ साहित्य आजतक में कला, साहित्य, संगीत, संस्कृति और सिनेमा जगत की मशहूर हस्तियां शामिल हो रही हैं. बता दें कि साल 2016 में पहली बार 'साहित्य आजतक' की शुरुआत हुई थी.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay