Sahitya AajTak

मदर इंडिया और डर्टी पिक्चर में कोई फर्क नहीं: अनुभव सिन्हा

साहित्य आज तक 2018 के दूसरे दिन सिनेमा में महिलाओं को लेकर जमकर बहस हुई. न‍िर्देशक अनुभव सिन्हा, ऋचा चड्ढा और वाणी कपूर ने तमाम मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी.

Advertisement
aajtak.in [Edited By:महेन्द्र गुप्ता]नई दिल्ली, 19 November 2018
मदर इंडिया और डर्टी पिक्चर में कोई फर्क नहीं: अनुभव सिन्हा अनुभव सिन्हा

साहित्य आज तक 2018 के दूसरे दिन सिनेमा में महिलाओं को लेकर जमकर बहस हुई. आज तक की सीनियर जर्नलिस्ट अंजना ओम कश्यप के साथ मुल्क के निर्देशक अनुभव सिन्हा, ऋचा चड्ढा और वाणी कपूर ने तमाम मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी. इसी दौरान अनुभव सिन्हा ने कहा कि वो मदर इंडिया और डर्टी पिक्चर में कोई फर्क नहीं देखते.

अंजना के सवाल पर अनुभव ने कहा, "दोनों फिल्मों में मेरे ख्याल से कोई फर्क नहीं है. महिलाओं को प्रमुख भूमिका में लेकर फिल्म बनाया जाए? ये एक फेज है, हमें इसके आगे बढ़ाना होगा. जब तक हम महिला प्रधान फिल्म बनाएंगे तो एक तरह से हम पेट्रोनाइज कर रहे हैं महिलाओं को. जैसे ही हम ऐसा करते हैं हम उनसे बड़े हो जाते हैं और वो हमसे छोटी हो जाती हैं. जिस दिन ये ख्याल दिमाग में आना बंद हो जाएगा कि स्टेज पर कितने पुरुष और कितनी महिलाएं है उस दिन हम तरक्की करेंगे."

कबीर का नाम सुना होगा, पर क्या जानते हैं अरबी में इसका मतलब?

इससे पहले, क्या फिल्मों में महिलाओं की बल्ले बल्ले हो गई है? पर एक्ट्रेस रिचा  चड्ढा ने कहा, "हां, अभी हम यही बात कर रहे थे. पहले साल में तीन फ़िल्में आती थीं जिन्हें महिला केन्द्रित माना जाता था. अब ऐसी फ़िल्में ज्यादा आ रही हैं. अब लोगों को लग रहा है कि औरतें भी बॉक्स ऑफिस पर पैसा कमा कर दे सकती हैं. 2012 से ये देखने को मिल रहा है और ये ग्लोबल ट्रेंड है."

इसी सवाल को लेकर वाणी ने कहा, "पिछले एक दशक में फिल्मों में महिलाओं के चरित्र में बदलाव हुआ है. पहले ऐसा नहीं था. आज हम माहवारी के विषय पर फिल्म बना रहे हैं. चाहे मुल्क ही हो अनुभव सिन्हा की जिसमें तापसी पन्नू का किरदार अहम है. ये बड़ा बदलाव है सिनेमा में. आज बिल्कुल उलट हुआ है. दर्शकों को भी इसका श्रेय जाता है. दर्शक आज इस तरह के कंटेंट देखना चाहते हैं. ये सबसे बड़ा परिवर्तन का दौर है."

26 की उम्र में 70 साल के बूढ़े का रोल, किरदार से उदास हो गए थे अन्नू कपूर

इस सवाल पर दोनों की बातों से थोड़ी असहमति जताते हुए अनुभव सिन्हा ने कहा, "बहुत कुछ बदला है, लेकिन सबसे ज्यादा कुछ बदला है तो वो है उसका गणित. ये फ़िल्में पहले भी बनती रही हैं. हम वर्तमान में अच्छी चीजें याद करते हैं, लेकिन पिछली बातें भूल जाते हैं. फर्क अब ये आया है कि भारत में सिनेमाहॉल बढ़ गए हैं. अब फ़िल्में ज्यादा बनाना शुरू हुई हैं. जाहिर सी बात है महिलाओं पर भी ज्यादा फ़िल्में आ रही हैं. जैसा कि वाणी ने बताया भी कि दर्शक भी जा रहे हैं ऐसी फिल्मों को देखने. सपोर्ट करने के लिए. इसलिए फिल्म मेकर्स की भी हिम्मत बढ़ रही है. अब निर्माताओं को ऐसी कहानियों पर फिल्म बनाते डर नहीं लगता."

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay