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मेरा मसकन मेरी जन्नत को सलामत रखनाः इमरान प्रतापगढ़ी की शायरी

aajtak.in [Edited By: जय प्रकाश पाण्डेय]नई दिल्ली, 15 April 2019

मेरा मसकन मेरी जन्नत को सलामत रखना, मेरे मौला मेरे भारत को सलामत रखना, सोचता हूं तो मेरी आंख छलक जाती है, मुल्क से रूह का रिश्ता बड़ा जज़्बाती है, मेरे आका ने मदीने में कहा था ये कभी हिंद के शम्स से एक ठंडी हवा आती... शायर इमरान प्रतापगढ़ी की साहित्य आजतक के मंच पर हिंदू-मुस्लिम एकता पर पढ़ी गई यह नायाब शायरी..

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