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दो साल बाद 'आप' सरकार सामने होगी, सोच लीजिए क्या करना हैः नजीब जंग

'साहित्य आज तक' के मंच पर पहुंचे दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग ने गालिब की शायरियों के साथ दिल्ली के हालात और आजकल की बिगड़ती भाषा पर बात की.

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aajtak.in
स्वाति पांडे नई दिल्ली, 14 November 2016
दो साल बाद 'आप' सरकार सामने होगी, सोच लीजिए क्या करना हैः नजीब जंग नजीब जंग

इसके साथ ही नजीब जंग ने गालिब की शायरी से पूरे माहौल को शायराना कर दिया. नजीब, गालिब के मौहल्ले में ही पले-बढ़े हैं. उनके घर से गालिब की हवेली बल्ली मारानं कुछ किलोमीटर की दूरी पर ही था. उन्होंने कहा कि गालिब जैसा शायर कोई हो नहीं सकता. किसी से भी उनकी तुलना करना बेइमानी होगी. गालिब की बहुत सी शेर-शायरियां उन्होंने सुनाई. मैं अदम से भी परे हूं, वर्न: गाफ़िल, बारहा
मेरी आह-ए-आतशीं से, बाल-ए-अन्क़ा जल गया
नजीब कहते हैं कि गालिब को पढ़कर आज भी मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं.

सुकूने दिल के लिए कुछ तो एहतेमाम करूं,
जरा नजर जो मिले फिर उन्हें सलाम करूं,
मुझे तो होश नहीं आप मशवरा दीजिए,
कहां से छेड़ूं फसाना, कहां से तमाम करूं.’
अंत में जब उनसे पूछा गया कि गालिब की विरासत दो कमरों में सिमट कर रह गई है, उसके बारे में सरकार क्या कर रही है. इस पर उन्होंने कहा, सरकार तो फिलहाल कुछ नहीं कर रही लेकिन आपने याद दिलाया है तो इस बारे में जरूर सोचा जाएगा.

 

 

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