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साहित्य आज तक: दिल्ली में चेतन भगत से मिलने का मौका, यहां कराएं रजिस्ट्रेशन

चेतन भगत को भले ही देश के तमाम स्थापित और तथाकथित साहित्यकार लेखक न मानते हों लेकिन इस बात से शायद ही कोई असहमत हो कि उन्होंने एक पूरी पीढ़ी के हाथों में किताबें थमा दी हैं. साहित्य आज तक पर शाम साढ़े चार बजे आप भी उनसे रू-ब-रू हो सकते हैं...

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aajtak.in
विष्णु नारायण नई दिल्ली, 11 November 2016
साहित्य आज तक: दिल्ली में चेतन भगत से मिलने का मौका, यहां कराएं रजिस्ट्रेशन Chetan Bhagat

सीधी-सादी किस्सागोई और आसान भाषा में उपन्यास लिखने वाले लेखक चेतन भगत एक जाना-पहचाना चेहरा हैं. और कैसे-न-कैसे आप उन्हें जानते हैं, उनकी किताबों से, अखबारों में छपने वाले उनके लेखों से, टीवी पर उनके कार्यक्रमों से और उनके उपन्यासों पर बनने वाली फिल्मों से, सलमान खान की फिल्म 'किक' के लिए लिखी गई पटकथा से, उनके विज्ञापनों से, सोशल मीडिया से.

चेतन भगत ने अपना पहला उपन्यास 'फाइव पॉइंट समवन' हांगकांग वाले दफ्तर में इधर-उधर से समय मिलने पर लिखा था. उसे लिखने में उन्हें तीन से चार साल लग गए. 2004 में छपने के बाद तीन साल के भीतर इस उपन्यास की 10 लाख प्रतियां बिक चुकी थीं. दूसरा उपन्यास 'वन नाईट एट कॉल सेंटर' (2005 में फिल्म बनी 'हेलो') बीपीओ वाली पीढ़ी पर छा गया जो उसी समय एक नए वर्ग के रूप में उभर रही थी. यह भगत का सबसे धीरे-धीरे 10 लाख तक बिकने वाला उपन्यास है.

उनके तीसरे उपन्यास ने फिर धूम मचा दी. '3 मिस्टेक्स ऑफ माइ लाइफ' (फिल्म 'काई पो चे') 2008 में गुजरात दंगों पर आधारित था. साल 2009 में उपन्यास लिखा '2 स्टेट्सः द स्टोरी ऑफ माइ मैरेज' (जिस पर फिल्म बनी '2 स्टेट्स'). उसके बाद 2011 में पांचवां उपन्यास 'रेवोल्यूशन 2020' आया. उन दिनों अन्ना-केजरीवाल की भ्रष्टाचार विरोधी बयार बह रही थी.

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फिर उन्होंने साल 2014 में 'हाफ गर्लफ्रेंड' नाम से एक और उपन्यास लिखा. हाफ गर्लफ्रेंड में हीरो अंग्रेजी जानता है पर अच्छी तरह बोल नहीं पाता. वह सेंट स्टीफंस में पढ़ता है और उसके जैसे लड़के को स्टीफंस में दाखिला इसलिए मिल सका कि वह बास्केट बॉल अच्छा खेलता है. वहां जाकर उसने देखा कि वहां तो घास भी इंग्लिश में उगती है. इस साल यानी कि 2016 में उनका एक और उपन्यास आया है जिसका नाम है 'वन इंडियन गर्ल'. इस उपन्यास में उन्होंने महिलाओं के नजरिए से दुनिया को देखने की कोशि‍श की है.

इंडिया टुडे मैगजीन से बातचीत करते हुए चेतन भगत ने एक बार कहा था, 'मेरी टक्कर कैंडी क्रश या व्हाट्सऐप जैसे ऐप्स से है. मैं किसी और लेखक को अपना प्रतिद्वंदी नहीं मानता. मैं लोगों के दिलोदिमाग में घर करना चाहता हूं. मैं उन्हें यूट्यूब, फिल्मों और ऐप्स से हटाकर किताबों में उनकी दिलचस्पी जगाना चाहता हूं.'

अपनी बात कहने का उनका तरीका बिलकुल आसान है. वे इसी दायरे में काम करते हैं. आलोचक उनकी अंग्रेजी को कोसते हैं, लेकिन उनके पाठकों को इससे फर्क नहीं पड़ता. चाहे कुछ भी हो हमें उन्हें लोगों में पढ़ने की आदत लगाने का श्रेय देना ही होगा.

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यदि आप भी उनसे रू-ब-रू होना चाहते हैं तो देश का नंबर एक खबरिया चैनल (आज तक) दिल्ली में एक साहित्यिक समागम कराने जा रहा है. यह साहित्यिक समागम 12-13 नवंबर को इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर आर्ट में होने जा रहा है. यहां आप चेतन भगत से 12 तारीख को शाम 4:30 से 5:30 के बीच सुन सकेंगे. तो फिर मौका चूक न जाएं. यहां दाखिला बिल्कुल मुफ्त है.

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