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साहित्य आजतक: कविताओं से इन कवियों ने बांधा समां...

13 November 2016
साहित्य आजतक: कविताओं से इन कवियों ने बांधा समां...
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साहित्य आजतक के सेशन कवि कुछ 'ऐसी तान सुनाओ' कवि और व्यंगकार अशोक चक्रधर, वीर रस के कवि हरिओम पंवार, कवि कुंवर बैचेन, कवि पॉपुलर मेरठी और कवयित्री मधु मोहनी उपाध्याय ने मुशाहरे में समा बांधा.
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इस सेशन की शुरुआत कवि अशोक चक्रधर के शब्दों के जादू से शुरू हुई जिसमें उन्होंने कहा कि कविता क्या है बस शब्दों-अर्थों का मेल है. इसी में आगे वीर रस के कवि ने सेशन को आगे बढ़ाया और संविधान पर लिखी अपनी कविता सुनाकर माहौल को देश भक्ति के एहसास से ओत प्रोत कर दिया.
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देश में 500, 1,000 के नोट बंद पर अशोक चक्रधर ने कहा कि आज कल शब्द लाइन लगा कर खड़े हैं और पैसा एटीएम में बंद पड़ा़ है. इस पर उन्होंने एक कविता भी सुना डाली... 'कवि सम्मेलन में रो रहा था बच्चा,
चुप कराने के लिए मैंने उसे 500 का नोट दिखाया,
उसे देख वह और रोने लगा,
फिर मैंने उसे कागज और कलम दिया,
उसे पाकर वो कहने लगा,
इस कागज पर मैं अंडा बनाऊंगा,
और,
ऊपर-नीचे हरे और नारंगी नोट लगा कर भारत का झंडा बनाऊंगा.'
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कवि कुंवर बैचेन ने बस में एक मजदूर की बात को अपनी कविता के लाइनों में पिरोया....
'बच्चों को अभी भूखा सुलाने की दवा दे,
जैसे भी बने रात बिताने की दवा दे,
क्यों भूख बढ़ाने की दवा बेच रहा है,
मजदूर हैं हम, भूख घटाने की दवा दे.'
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हास्य रस के कवि पॉपुलर मरेठी ने नोटों पर चल रहे रहे बवाल पर अपने मजाक भरे अंदाज में कहा,
'मैं खाली हाथ भला,
घर लौटता तो कैसे,
उधार मांगने छमो से आया था,
भला वो मुझे उल्लू बनाती कैसे,
नोट मैंने वहीं से निकाला,
जहां उसने छुपाया था...'
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प्यार की अनुभूति को अपने शब्दों से कविता में उतार कर मधू मोहनी उपाध्याय ने सब के दिलों के प्यार को जगा दिया.
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