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साहित्य आजतक: स्वतंत्र भाषा है भोजपुरी और अवधी

aajtak.in [Edited BY: अमित रायकवार]नई दिल्ली, 19 November 2018

'साहित्य आजतक' के हल्ला बोल मंच का दूसरा सत्र भाषा और बोली के बीच संघर्ष पर केंद्रित रहा. 'मेरी अपनी जुबान' सत्र में भोजपुरी और अवधी को लेकर काम कर रहे मुन्ना पाण्डेय और अमरेंद्र त्रिपाठी ने हिस्सा लिया.  अक्सर जब 'भोजपुरी' का जिक्र आता है तो कुछ लोग इसे अश्लीलता से जोड़ देते हैं. भोजपुरी की इस छवि पर चिंता व्यक्त करते हुए दिल्ली यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर  मुन्ना पाण्डेय ने इसकी वजह कैसेट कल्चर को बताया. उन्होंने कहा कि अश्लील गानों के जरिए गुड्डू रंगीला, निरहुआ और मनोज तिवारी सरीखे लोकगायकों की वजह से भोजपुरी की ऐसी छवि बनी है. मुन्ना पाण्डेय ने कहा कि ये लोग भाषा के बलात्कारी हैं.
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The second session of the Sahitya Aajtak attack ball stage focused on the struggle between language and dialect. Munna Pandey and Amarendra Tripathi, who were working on Bhojpuri and Awadhi in Meri apni juban session, took part. Often when Bhojpuri comes in, some people attach it to obscenity. Expressing concern over this image of Bhojpuri, Assistant Professor Munna Pandey said that Guddu Rangila, Nirhua and Manoj Tiwari has been created their image due to folk songs.

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