Sahitya AajTak
Advertisement

साहित्य आजतक: कहानियों में मुस्लिम पात्र आते हैं, पर छौंक की तरह

aajtak.in [Edited BY: अमित रायकवार]नई दिल्ली, 19 November 2018

साहित्य आजतक के दूसरे दिन सीधी बात स्टेज पर 'साहित्य में मुस्लिम समाज' विषय पर चर्चा की गई . क्या हमारा साहित्य समाज मजहब, बिरादरी में बंटा है? क्या साहित्य का भी अपना कोई समाज है? इस पर चर्चा के लिए मौजूद रहे तीन बड़े लेखक अब्दुल बिस्मिल्लाह, भगवानदास मोरवाल और अंजुम उस्मानी. कार्यक्रम का संचालन शम्सताहिर खान ने किया. शम्स ने सवाल किया कि क्या साहित्य में भी हिंदू-मुस्लिम होता है. इस पर अब्दुल बिस्मिल्लाह ने कहा कि ये कहने में कोई हिचक नहीं होनी चाहिए कि हिंदी उपन्यास में प्रेमचंद के बाद किसी भी लेखक की कहानी में मुस्लिम दमदारी से नहीं दिखता.

To License Sahitya Aaj Tak Images & Videos visit www.indiacontent.in or contact syndicationsteam@intoday.com

On the second day of the Sahitya Aajtak, a discussion on the topic of Muslim society was discussed in a straight talk stage. Is our literature society divided into religion, community? Is there any community of literature also? Three great writers, Abdul Bismillah, Bhagwandas Morwal and Anjum Usmani were present to discuss this.

Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay