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कविता: 'थोड़ी तकलीफ तो होगी पर सह लेंगे'

कविता: 'थोड़ी तकलीफ तो होगी पर सह लेंगे'

कोरोना के इस दौर में हम सब घरों में क़ैद रहने को मजबूर हैं लेकिन ये क़ैद नए सिरे से जीवन शुरू होने की उम्मीद है. ये महामारी जल्द ख़त्म होगी और हम सब अपने-अपने घरों पर रहेंगे. और दोबारा सब गुलज़ार होगा. रितु राज की ये कविता इसी उम्मीद का ढांढस बंधाती है. सुनिए अमन गुप्ता की आवाज़ में.

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