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आमिर का रेखा और सचिन पर तंज! राज्यसभा सांसद बना, तो हर दिन सदन में नजर आऊंगा

मुंबई में चल रही 'पंचायत आज तक' में महाराष्‍ट्र में होने जा रहे विधानसभा चुनाव और प्रदेश के विकास पर विचार-मंथन जारी है. इस कार्यक्रम में कई नामी‍-गिरामी शख्‍स‍ियतें शिरकत कर रही हैं. बॉलीवुड एक्टर आमिर खान भी पंचायत में अपनी बात रख रहे हैं...

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aajtak.in [Edited By: अमरेश सौरभ]मुंबई, 14 September 2014
आमिर का रेखा और सचिन पर तंज! राज्यसभा सांसद बना, तो हर दिन सदन में नजर आऊंगा 'पंचायत आज तक' में श‍िरकत करते आमिर खान

मुंबई में चल रही 'पंचायत आज तक' में महाराष्‍ट्र में होने जा रहे विधानसभा चुनाव और प्रदेश के विकास पर विचार-मंथन जारी है. इस कार्यक्रम में कई नामी‍-गिरामी शख्‍स‍ियतें शिरकत कर रही हैं. बॉलीवुड एक्टर आमिर खान ने भी पंचायत में अपनी बात रखी.

क्या आप राज्यसभा का सदस्य बनना चाहेंगे? अगर बने, तो सचिन और रेखा जैसा काम करेंगे?
अगर मुझे मौका मिला, तो उस वक्त विचार करूंगा. क्या मैं राज्यसभा सांसद के तौर पर बेहतर काम कर सकूंगा. अगर जवाब में हां में होगा, तो ऑफर स्वीकार कर लूंगा. मेरे साथी कैसा काम कर रहे हैं, मैं उस पर टिप्पणी नहीं करने जा रहा. अगर राज्यसभा सांसद बना तो हर दिन संसद में नजर आऊंगा.

आमिर खान समाज में बदलाव लाना चाहते हैं?
समाज जब बदलने की बात करते हैं तो नेताओं की भी भूमिका अहम होती है. हम उन्हें ये ताकत देते हैं. हम से हर कोई बदलाव में अहम योगदान दे सकता है. अपने फिल्मों के जरिए मैं जो कर सकता हूं वो कर रहा हूं. एक क्रिएटिव इंसान का समाज का काम सिर्फ दिल बहलाना नहीं है. इसके साथ वह अपने काम के जरिए समाज को और मजबूत बना सकता है.

मुंबई में क्या बदलाव की जरूरत है?
जो मुबंई शहर में जो बुनियादे मुद्दे हैं वो बाकी देश से अलग नहीं है. भेदभाव की समस्या पूरे देश में है. सुरक्षा, शिक्षा, हेल्थकेयर और इंसाफ- ये चार बुनियादी जरूरतें हैं किसी भी समाज की. तमिलनाडु में बाकी देश के मुकाबले हेल्थकेयर बेहतर स्थिति में है. ये सभी चीजें मुंबई में होने चाहिए.

महिला की सुरक्षा को लेकर आप क्या सोचते हैं?
रेप मामलों के उजागर होने के बाद गुस्सा तो आता है. एक वक्त पर हम असहाय भी महसूस करते हैं. इस समस्या का समाधान बैलेंस ऑफ पावर में है. पीड़ित की स्थिति सोचिए. पुलिस की लापरवही और अदालत में सुनवाई में देरी से समस्या और बढ़ जाती है. सीसीटीवी कैमरे से काम नहीं चलेगा. दुष्कर्मियों के अंदर डर पैदा करना होगा. जब वो अपनी कुकर्म की सजा से डरेगा तभी स्थिति सुधरेगी. जब तक दोषियों को तुरंत सजा नहीं मिलेगी, बात नहीं बनेगी. ये मुद्दा कन्या भ्रूण हत्या से भी जुड़ा है. मैं सामाजिक कार्यकर्ता नहीं. मैं क्रिएटिव इंसान हूं. एक इंटरटेनर हूं. अच्छा काम करने के लिए एनजीओ ज्वाइन करने की जरूरत है.

अगर आमिर खान सीएम हों तो?
सिस्टम के बाहर से आलोचना करना आसान है. मेरा मुख्यमंत्री बनने का सपना नहीं है. फिर भी शिक्षा, हेल्थकेयर, पुलिस रिफॉर्म और न्याय प्रक्रिया में सुधार लाना चाहूंगा. भ्रष्टाचार भी मुद्दा है पर सिर्फ राजनेताओं के सुधरने से बात नहीं बनेगी. बदलाव हममें लाना होगा. समाज में ईमानदारी का स्तर बढ़ाना होगा तभी अच्छे इंसान ऊपर तक पहुंचेंगे. हम बदलें और नई पीढ़ी को अच्छी सीख दें तो आने वाले कल बेहतर होगा.

पीके के न्यूड पोस्टर के जरिए आमिर क्या कहना चाहते हैं?
यह पोस्टर फिल्म की पूरी कहानी बताता है. मैं फिलहाल कहानी का खुलासा नहीं करूंगा. हमने विवाद खड़ा करने के लिए ये पोस्टर नहीं बनाया गया. जिन्हें ये पसंद नहीं आया मैं उनकी इज्जत करता हूं. जब लोग फिल्म देखेंगे तो इसकी अहमियत समझेंगे.

इस बार सत्यमेव जयते में क्या होगा?
सत्यमेव जयते के अगले सीजन में एक लाइव एलिमेंट जोड़ा है. शो के बाद मैं खुद लाइव रहूंगा. फोन कॉल, स्टूडियो ऑडियंस मुझसे जुड़ सकेंगे.

लव जेहाद मुद्दा बन गया, कई अहम मुद्दे पीछे छूट गए?
लोग अलग-अलग मुद्दे से पीड़ित हैं. जब वे अपनी आवाज उठाएंगे तभी राजनेताओं का ध्यान उस ओर जाएगा. अगर लोगों को लगता है कि घरेलू हिंसा अहम मुद्दा है तो आवाज उठाएं.

आमिर खान इमोशनल क्यों होते हैं?
मैं बुहत इमोशनल इंसान हूं. इसे कभी छिपाता नहीं. मेरे लिए तो इस दुनिया में इमोशन भी काम कर रहा हूं. बच्चों को हमें भरोसा करना सिखाना होगा.

आप किसी भी मुद्दे को लॉजिकल एंड तक ले जाते हैं?
सत्यमेव जयते के सफर की शुरुआत से पॉलिटिकल क्लास का रिस्पॉन्स बहुत सकारात्मक रहा. जब हमने कन्या भ्रूण हत्या का शो दिखाया तो कई जगह पर छापेमारी हुई. अच्छा लगता है.

15 अगस्त को पीएम मोदी का भाषण सुना था?
पूरा तो नहीं. लड़कों को लेकर पीएम ने बिल्कुल सही कहा था. हमें अपने लड़कों की परवरिश पर ध्यान देना होगा. उनसे सवाल पूछना होगा.

कभी-कभी आमिर पैसों के लिए अश्लीलता का सहारा लेते हैं?
मैं सिर्फ पैसों के लिए काम करता होता तो साल में सिर्फ एक फिल्म नहीं करता. देल्ही बेली से मैंने ज्यादा नहीं कमाया. वो एक एक्सपेरिमेंट था जो हमारी कंपनी ने किया. मैं कोई भी काम तभी करता हूं जब उसमें मेरा दिल है. देल्ही बेली में अश्लील सीन थे. मैं प्रोड्यूसर होने के नाते पहले से ही दर्शकों को बताता रहा कि यह एडल्ट फिल्म है.

कभी आम आदमी की तरह सब्जी मार्केट गए हैं?
नहीं मुझे बहुत साल हो गए शॉपिंग किए हुए. मुझे नहीं पता कि सब्जियों के दाम क्या हैं? हिंदुस्तान से बाहर जाता हूं तो साइक्लिंग करता हूं. ट्रेन पर सफर करता हूं.

नरेंद्र मोदी के सरकार चलाने के स्टाइल पर आप क्या सोचते हैं?
मैं इसका क्या जवाब दूं. मुझे राजनीति के बारे में ज्यादा नहीं पता. शायद आपको बेहतर पता होगा.

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