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विश्व हिंदू सम्मेलन में नायडू बोले- हिंदू शब्द को 'अछूत' बनाने की हो रही कोशिश

विश्व हिंदू सम्मेलन का आयोजन स्वामी विवेकानंद के शिकागो की विश्व धर्म संसद में दिए गए ऐतिहासिक भाषण की 125वीं वर्षगांठ के मौके पर आयोजित किया गया. इसमें आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने भी हिस्सा लिया. रविवार को समापन कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू शामिल हुए.

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aajtak.in [Edited By: जावेद अख़्तर]नई दिल्ली, 10 September 2018
विश्व हिंदू सम्मेलन में नायडू बोले- हिंदू शब्द को 'अछूत' बनाने की हो रही कोशिश कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू

शिकागो में आयोजित दूसरे विश्व हिंदू सम्मेलन का रविवार को समापन हो गया. इस दौरान कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने अपने समापन भाषण में हिंदू धर्म से लेकर भारत की क्षमताओं तक का बखान किया. उन्होंने जोर देकर कहा कि मौजूदा वक्त में कुछ लोग हिंदू शब्द के बारे गलत सूचनाएं फैला रहे हैं और उसे 'अछूत' व 'असहनीय बनाने' की कोशिश कर रहे हैं.

इस दौरान नायडू ने हिंदू धर्म के सच्चे मूल्यों के संरक्षण की जरूरत पर जोर दिया ताकि ऐसी धारणाओं को बदला जा सके जो 'गलत सूचनाओं' पर आधारित हैं. इसके अलावा नायडू ने ये भी कहा कि भारत सार्वभौमिक सहनशीलता में विश्वास करता है और सभी धर्मों को सच्चा मानता है.

हिंदू धर्म के अहम पहलुओं को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि 'साझा करना' और 'ख्याल रखना' हिंदू दर्शन के मूल तत्व हैं. नायडू ने अफसोस जताया कि (हिंदू धर्म के बारे में) काफी गलत सूचनाएं फैलाई जा रही हैं. लिहाजा, व्यक्ति को विचारों को सही परिप्रेक्ष्य में देखकर प्रस्तुत करना चाहिए ताकि दुनिया के सामने सबसे प्रामाणिक परिप्रेक्ष्य पेश हो पाए.

स्वामी विवेकानंद के 11 सितंबर 1893 को धर्म संसद में दिए गए भाषण की 125वीं वर्षगांठ के अवसर पर विश्व हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया था. इस कार्यक्रम में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत भी शामिल हुए थे. जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहीं से अपना संदेश भेजा था.

भागवत ने कहा था कि हिन्दू समाज में प्रतिभावान लोगों की संख्या सबसे ज्यादा है, लेकिन वे कभी साथ नहीं आते हैं. भागवत ने साफ कहा कि हिन्दुओं का साथ आना अपने आप में मुश्किल है. उन्होंने ये भी कहा कि हिन्दू हजारों वर्षों से प्रताड़ित हो रहे हैं क्योंकि वे अपने मूल सिद्धांतों का पालन करना और आध्यात्मिकता को भूल गए हैं. भागवत ने जोर देकर कहा कि हमें साथ आना होगा.

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