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वेनेजुएला पर तनाव बढ़ा, अमेरिका ने तेल कंपनियों पर लगाया बैन

वेनेजुएला का आर्थिक संकट अब बड़े राजनीतिक संकट में तब्दील हो गया है. इस बीच अमेरिका ने वहां की तेल निर्यातक कंपनी पर बैन लगा दिया है और सेना से नए राष्ट्रपति को सत्ता हस्तांतरित करने के लिए कहा है.

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aajtak.in
aajtak.in नई दिल्ली, 29 January 2019
वेनेजुएला पर तनाव बढ़ा, अमेरिका ने तेल कंपनियों पर लगाया बैन निकोलस मादुरो

वेनेजुएला में सबसे बड़े राजनीतिक और आर्थिक संकट के बीच अमेरिका ने वहां की तेल कंपनी पीडीवीएसए पर प्रतिबंध लगा दिया है. इसके साथ ही अमेरिका ने वेनेजुएला की सेना से कहा है कि वह शांतिपूर्ण तरीके से विपक्षी नेता खुआन गोइदो को सत्ता सौंपने का काम कराए.

लंबे समय से वेनेजुएला आर्थिक संकट से गुजर रहा है. यहां तक कि वहां रोटी के लिए भी जनता तरस रही है. तेल का भंडार होने के बावजूद वेनेजुएला में खाने-पीने का संकट पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना है. अनाज के संकट से महंगाई दुनिया के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई है. दरअसल, साल 2014 में तेल के दामों में गिरावट आने की वजह से वेनेजुएला को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा, जिसके बाद वहां के हालात बिगड़ते गए और देश बड़े कर्जे तले दब गया. बता दें कि वेनेजुएला तेल निर्यात पर ही आधारित है.

राष्ट्रपति निकोलस मडूरो के नेतृत्व देश की इस हालत पर विपक्षी नेता ख्वान ग्वाइदो ने मोर्चा खोल दिया है. यहां तक कि अब उन्होंने खुद को अंतरिम राष्ट्रपति घोषित कर निकोलस मडूरो को गद्दी छोड़ने के लिए विवश कर दिया है. ग्वाइदो के इस कदम से वेनेजुएला में बड़े राजनीतिक टकराव की स्थिति भी पैदा हो गई है.

विपक्षी नेता ख्वान ग्वाइदो के साथ अमेरिका

ख्वान ग्वाइदो को अंतरिम राष्ट्रपति के तौर पर अमेरिका समेत करीब 20 देशों ने मान्यता दे दी है. इसके साथ ही वेनेजुएला से तेल की सप्लाई करने वाली कंपनी पीडीवीएसए को भी अमेरिका ने बैन कर दिया है. ऐसा इसलिए किया गया है ताकि तेल से होने वाली कमाई राष्ट्रपति निकोलस सरकार को न मिल सके.

अमेरिका के वित्त मंत्री स्टीवेन मनूशिन ने कहा है कि अब तेल की बिक्री का पैसा निकोलस मादुरो की सरकार तक नहीं पहुंचेगा. उन्होंने कहा कि तेल कंपनी पीडीवीएसए अगर ख्वान गोइदो को देश का नेता मानती है तो वह इन प्रतिबंधों से बच सकती है और तेल सप्लाई कर सकती है. हालांकि, पीडीवीएसए की सहायक कंपनी सिटगो को तेल सप्लाई करते रहने की अमेरिका ने अनुमति दी है. यह कंपनी अमेरिका में स्थित है और ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि वह यहां सुरक्षित खाते में पैसा जमा कराकर तेल सप्लाई जारी रख सकती है. बता दें कि वेनेजुएला तेल की बिक्री के लिए पूरी तरह अमेरिका पर आधारित है और वह अपने तेल निर्यात का 41 प्रतिशत अमरीका को करता है.

फिलहाल, पूरा दारोमदार वेनेजुएला की सेना पर है. वेनेजुएला के रक्षा मंत्री ने ग्वाइदो की आलोचना करते हुए कहा कि सेना पाला नहीं बदलेगी और निकोलस सरकार का साथ देती रहेगी.

उगो शावेज ने बनाया निकोलस को उत्तराधिकारी

वेनेजुएला की राजनीति में निकोलस मादुरो को उन नेताओं में गिना जाता है जो पूर्व राष्ट्रपति उगो शावेज के सबसे करीबी रहे हैं. मौत से पहले उगो शावेज ने निकोलस को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था. जिसके बाद से ही वह वेनेजुएला की सत्ता संभाल रहे हैं. अब ट्रंप प्रशासन द्वारा प्रतिबंधों के बाद निकोलस ने अमेरिका से रिश्ते खत्म करन का ऐलान कर दिया है. यहां तक कि निकोलस सरकार ने अमेरिकी राजनयिकों को 72 घंटों के अंदर वेनेजुएला छोड़ने का आदेश दिया है.

अमेरिका के दखल और प्रतिबंधों से निकोलस के लिए राहें मुश्किल हो गई हैं. ऐसे में अब देखना होगा कि खाने को तरस रही वेनेजुएला की जनता कब तक इस राजनीतिक संकट से जूझती रहेगी और वेनेजुएला का नेतृत्व निकोलस और ग्वाइदो में किसके पास रहेगा.

भारत की नजर

वेनेजुएला के संकट पर भारती भी बराबर नजर बनाए हुए है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने बताया है कि हम वेनेजुएला की वर्तमान परिस्थितियों पर बराबर नजर बनाए हुए हैं और देख रहे हैं कि वेनेजुएला की जनता को वहां की वर्तमान समस्याओं का समाधान बिना हिंसा के हो सके. उन्होंने कहा कि भारत और वेनेजुएला के बीच घनिष्ठ और मैत्रीपूर्ण संबंध हैं और हमें विश्वास है कि वेनेजुएला की जनता की प्रगति और समृद्धि के लिए वहां लोकतंत्र, शांति और सुरक्षा सर्वाधिक महत्वपूर्ण है.

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