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गंभीर नगदी संकट में UN- बैठकें टलीं, नियुक्तियां रुकीं और लिफ्ट-एसी भी बंद

दुनिया की सबसे बड़ी पंचायत संयुक्त राष्ट्र नगदी की गंभीर संकट से जूझ  रहा है. ये संकट इस कदर गहरा गया है कि संयुक्त राष्ट्र (UN) को अपना कामकाज बंद करने की नौबत आ गई है. संयुक्त राष्ट्र के पास जो रिजर्व फंड है, उसमें मात्र 15 दिनों तक का खर्चा चलाने का पैसा बचा है.

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aajtak.in
aajtak.in नई दिल्ली, 13 October 2019
गंभीर नगदी संकट में UN- बैठकें टलीं, नियुक्तियां रुकीं और लिफ्ट-एसी भी बंद UN में नई नौकरियों पर रोक, मीटिंग भी रोकी गई (फोटो-Twitter/antonioguterres)

  • रिजर्व फंड से सिर्फ 15 दिन का खर्च चलाया जा सकता है 
  • कई देशों ने नहीं चुकाया बकाया, US को देनें हैं 72 अरब
  • हालात नहीं सुधरे तो कर्मचारियों वेतन पर भी चलेगी कैंची

दुनिया की सबसे बड़ी पंचायत संयुक्त राष्ट्र को इस समय नगदी के गंभीर संकट का सामना करना पड़ रहा है. यह संकट इस कदर गहरा गया है कि संयुक्त राष्ट्र (UN) का कामकाज बंद होने की नौबत आ गई है. संयुक्त राष्ट्र के पास जो रिजर्व फंड है, उसमें मात्र 15 दिनों तक का खर्च चलाने का पैसा बचा है. नगदी की किल्लत झेल रहे UN ने बहुत पहले से ही खर्चे में कटौती शुरू कर दी है. संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में लिफ्ट, एसी और हीटर बंद कर दिए गए हैं. अगर स्थिति न सुधरी तो कर्मचारियों को वेतन और अन्य सेवाओं के लिए भुगतान का संकट खड़ा हो सकता है.

पानी के फव्वारे बंद, लिफ्ट भी रोकी गईं

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने सदस्य देशों को आगाह किया है कि वे अपने अपने बकाये का भुगतान जल्द से जल्द कर दें, अन्यथा स्थिति गंभीर हो सकती है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने बयान जारी कर कहा है कि अगर सदस्य देशों ने अपनी वार्षिक बक़ाया राशि का भुगतान नहीं किया तो संयुक्त राष्ट्र के कामकाज के समक्ष जोखिम पैदा हो जाएगा. न्यू यॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक खर्चे बचाने के लिए UN की बिल्डिंग के सामने बने फव्वारों को बंद कर दिया गया है. 39 मंजिला इस इमारत की लिफ्ट बंद कर दी गई है. एसी और हीटर बंद कर दिए गए हैं.

बैठकें टलीं, नियुक्तियां रुकी

बता दें कि पिछले सप्ताह ही यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने सदस्य देशों को नगदी संकट के बारे में आगाह कर दिया था . उन्होंने कहा था कि रिकॉर्ड स्तर पर नकदी की कमी होने की वजह से उन्हें असाधारण कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा है. इसके तहत रिक्त पड़े पदों पर नई नियुक्तियां नहीं हो पा रही हैं, यात्राएं तभी की जा रही हैं जब वे बेहद जरूरी हों, बैठकें टाली या स्थगित की जा रही हैं. इन अप्रत्याशित कदमों से यूएन के कामकाज पर न सिर्फ न्यू यॉर्क, जिनीवा, वियना और नैरोबी कार्यालयों बल्कि क्षेत्रीय आयोगों पर भी असर पड़ रहा है.

सदस्य देशों के चंदे पर चलता है UN

दरअसल संयुक्त राष्ट्र का खर्च सदस्य देशों से मिले चंदे पर चलता है. 193 सदस्य देशों में से अब तक 129 देशों ने तयशुदा बकाया राशि का वार्षिक भुगतान किया है. इस वजह से संयुक्त राष्ट्र के पास फंड की कमी हो गई है. खास बात ये है कि भारत ने अपने हिस्से की रकम UN को चुका दी है. संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने एक ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी थी.

अमेरिका UN का बड़ा बकायेदार

संयुक्त राष्ट्र प्रंबधन की चीफ कैथरीन पोलार्ड ने संयुक्त राष्ट्र महासभा की बजट कमेटी को कहा कि यूएन के 128 देशों ने अबतक 1.99 बिलियन डॉलर का भुगतान कर दिया है, लेकिन 65 देशों के पास अब भी 1.386 बिलियन डॉलर बकाया है. इनमें से सिर्फ अमेरिका ने ही UN का लगभग 72 अरब रुपया नहीं चुकाया है.

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