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क्रीमिया की जनता रूस के साथ, रूस ने दी संप्रभु देश के रूप में मान्यता, बौखलाया अमेरिका

शीत युद्ध के बाद मॉस्को के खिलाफ कड़े प्रतिबंधों की अनदेखी करते हुए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के क्रीमिया प्रायद्वीप को एक आजाद और संप्रभु देश के रूप में मान्यता दे दी. इसे अमेरिका के लिए ऐसी खुली चुनौती माना जा रहा है जिससे यूरोप में सुरक्षा संकट बढ़ गया है.

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भाषा [Edited By: कुलदीप मिश्र]मॉस्को, 18 March 2014
क्रीमिया की जनता रूस के साथ, रूस ने दी संप्रभु देश के रूप में मान्यता, बौखलाया अमेरिका Putin, Obama

शीत युद्ध के बाद मॉस्को के खिलाफ कड़े प्रतिबंधों की अनदेखी करते हुए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के क्रीमिया प्रायद्वीप को एक आजाद और संप्रभु देश के रूप में मान्यता दे दी. इसे अमेरिका के लिए ऐसी खुली चुनौती माना जा रहा है जिससे यूरोप में सुरक्षा संकट बढ़ गया है.

रूस के क्रीमिया प्रायद्वीप को एक स्वतंत्र और संप्रभु देश के तौर पर मान्यता देने संबंधी घोषणा क्रेमलिन की वेबसाइट (रूस के राष्ट्रपति की वेबसाइट) पर डाली गई है. इससे पहले अमेरिका और यूरोपीय यूनियन ने रूस और क्रीमियाई संकट में शामिल यूक्रेन के अधिकारियों के खिलाफ सोमवार को और प्रतिबंध लगाए और उनकी संपत्ति जब्त करने का ऐलान किया.

राष्ट्रपति बराक ओबामा ने चेतावनी दी कि अगर रूस यूक्रेन में हस्तक्षेप बंद नहीं करता तो उसके खिलाफ और कड़े कदम उठाए जा सकते हैं. निश्चित रूप से पुतिन का कदम अमेरिका के लिए चुनौती माना जा रहा है. पश्चिमी देश चाहते हैं कि मॉस्को की फौजें क्रीमिया से वापस चली जाएं. उनके विचार से क्रीमिया रूस का एक हिस्सा है. विश्लेषकों की राय में सोमवार को लगाए गए प्रतिबंध लगभग प्रभावहीन हैं. मॉस्को ने यूक्रेन में व्याप्त तनाव और विवाद दूर करने का कोई संकेत नहीं दिया है.

इससे पहले क्रीमिया की जनता ने अपने पूर्व राजनीतिक आका रूस के साथ जाने के लिए कराए गए जनमत संग्रह के दौरान जोर-शोर से मतदान किया. पूर्व सोवियत राष्ट्र यूक्रेन में पैदा हुए राजनीतिक संकट के बाद क्रीमिया की जनता ने यह मतदान किया.

जनमत संग्रह के अंतिम नतीजों के मुताबिक 97 फीसदी वोटर यूक्रेन छोड़कर रूस से जुड़ना चाहते हैं. पश्चिमी देशों के नेताओं ने जनमत संग्रह की निंदा की है. वे रूस को सबक सिखाने के लिए आर्थिक प्रतिबंधों पर चर्चा की योजना बना रहे हैं. कीव में यूक्रेन की नयी सरकार ने जनमत संग्रह को मास्को की ओर से बंदूक के जोर पर एक सर्कस करार दिया. क्रीमिया प्रायद्वीप पर दो हफ्ते तक घमासान के हालात रहे और अब सैनिकों का कब्जा है जिसकी कमान स्पष्ट तौर पर रूस के हाथ में है.

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