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जापान सरकार की जांच रिपोर्ट से खुलासा, प्लेन क्रैश में ही हुई थी नेताजी की मौत

जापान सरकार ने नेताजी की मौत के मामले में उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए थे. जिसके बाद साल 1956 में इस रिपोर्ट को तैयार किया गया था. इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि प्लेन क्रैश की वजह से नेताजी को कई जगह चोटें लगी थी और वे जल गए थे. इसके बाद नेताजी ने ताईपे आर्मी अस्पताल के ननमॉन ब्रांच में 18 अगस्त 1945 को आखिरी सांसे ली थी.

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aajtak.in
प्रियंका झा/ जावेद अंसारी नई दिल्ली, 02 September 2016
जापान सरकार की जांच रिपोर्ट से खुलासा, प्लेन क्रैश में ही हुई थी नेताजी की मौत नेताजी की मौत पर अभी भी बना हुआ है रहस्य

नेताजी सुभाष चंद्र की मौत के रहस्य बने रहने के बीच जापान ने एक 60 साल पुरानी रिपोर्ट जारी की है. 'इंडिया टुडे' के हाथ लगी इस रिपोर्ट में पुष्टि की गई है कि 18 अगस्त 1945 को ताईपे में प्लेन क्रैश में ही नेताजी की मौत हुई थी.

1956 में तैयार की गई थी रिपोर्ट
जापान सरकार ने नेताजी की मौत के मामले में उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए थे. जिसके बाद साल 1956 में इस रिपोर्ट को तैयार किया गया था. इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि प्लेन क्रैश की वजह से नेताजी को कई जगह चोटें लगी थी और वे जल गए थे. इसके बाद नेताजी ने ताईपे आर्मी अस्पताल के ननमॉन ब्रांच में 18 अगस्त 1945 को आखिरी सांसे ली थी.

भारतीय दूतावास को सौंपी गई थी रिपोर्ट
इस रिपोर्ट को तैयार कर साल 1956 में टोक्यो स्थित भारतीय दूतावास को सौंपा गया था लेकिन इसे अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया था. हालांकि इस रिपोर्ट से नेताजी की मौत की गुत्थी और उलझ ही गई है.

परिवार का दावा- प्लेन क्रैश में नहीं मरे नेताजी
नेताजी के परिवार का और उनके कुछ समर्थकों का मानना है कि उनकी मौत प्लेन क्रैश में नहीं हुई थी. बल्कि वे कई साल तक भेस बदल कर अयोध्या में रह रहे थे. नेताजी की मौत से जुड़े कुछ गोपनीय दस्तावेजों को इस साल भारत सरकार ने जनवरी में सार्वजनिक किया था.

डॉक्टरों ने बचाने की खूब कोशिश की थी
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद विमान क्रैश हो गया. इस विमान में नेताजी भी सवार थे. विमान के गिरने से नेताजी बुरी तरह से जख्मी हो गए थे. रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि नेताजी को करीब तीन बजे ताइपे सैन्य अस्पताल ले जाया गया लेकिन शाम सात बजे उनकी मौत हो गई. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि डॉक्टरों ने नेताजी को बचाने के लिए काफी कोशिश की थी लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 22 अगस्त 1945 को ताईपे के निगम श्मशानघाट में नेताजी का अंतिम संस्कार किया गया था.

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