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20 साल में कट गए 1500 करोड़ पेड़, अब भी नहीं चेते तो दुनिया से मिट जाएंगी ये 10 जगहें

पूरी दुनिया में पिछले 5 वर्षों में प्रदूषण 8 फीसदी बढ़ा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया के तीन हजार शहर वायु प्रदूषण की चपेट में हैं. प्रदूषण की वजह से हो रहे क्लाइमेट चेंज का असर दुनिया की कुछ बेहद खूबसूरत जगहों पर पड़ रही है. ऐसी आशंकाएं हैं कि अगले 100 सालों में दुनिया से 10 जगहों का नामोनिशान मिट जाएगा.

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ऋचीक मिश्रानई दिल्ली, 05 June 2019
20 साल में कट गए 1500 करोड़ पेड़, अब भी नहीं चेते तो दुनिया से मिट जाएंगी ये 10 जगहें प्रतीकात्मक तस्वीर (गेटी)

पूरी दुनिया में पिछले 5 वर्षों में प्रदूषण 8 फीसदी बढ़ा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया के तीन हजार शहर वायु प्रदूषण की चपेट में हैं. मध्य-पूर्व एशिया के शहरों में जहां तेजी से विकास हो रहा है, वहां प्रदूषण की मात्रा 10 गुना ज्यादा है. प्रदूषण की वजह से हो रहे क्लाइमेट चेंज का असर दुनिया की कुछ बेहद खूबसूरत जगहों पर पड़ रही है. ऐसी आशंकाएं हैं कि अगले 100 सालों में दुनिया से 10 जगहों का नामोनिशान मिट जाएगा. बेहतर होगा कि इन्हें आप घूमकर देख लें या फिर प्रदूषण कम करें.

आइए जानते हैं ये 10 जगहें कौन सी हैं

20 सालों में पूरी दुनिया से 1500 करोड़ पेड़ काटे गए

पिछले 20 साल में इंसानों ने धरती से 1500 करोड़ पेड़ों को काट डाला. नतीजा ये कि क्लाइमेट चेंज करने वाले CO2 गैस का उत्सर्जन बढ़ा. पूरी दुनिया में तापमान बढ़ रहा है. नेचर मैगजीन के मुताबिक विभिन्न उपग्रहों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार पृथ्वी पर करीब 3 से 4 लाख करोड़ पेड़ हैं. इनमें से सबसे ज्यादा पेड़ 64,800 करोड़ पेड़ रूस में है. कनाडा में 31,800 करोड़, अमेरिका में 22,200 करोड़ और चीन में 17,800 करोड़ पेड़ हैं. पेड़ों का सबसे ज्यादा घनत्व फिनलैंड में 72 हजार पेड़ प्रति वर्ग किमी है. एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में पिछले 30 सालों में 23,716 औद्योगिक प्रोजेक्ट के लिए 15 हजार वर्ग किमी के जंगल काट दिए गए. देश में करीब 250 वर्ग किमी के जंगल हर साल ढांचागत विकास के भेंट चढ़ जाते हैं.

7.87 करोड़ कारों का वजन बढ़ा पूरी धरती पर, साथ ही वायु प्रदूषण भी

पूरी दुनिया में 1999 से 2019 तक करीब 7.87 करोड़ कारें सड़कों पर उतरीं. अकेले अमेरिका में 75% कार्बन डाई ऑक्साइड का उत्सर्जन गाड़ियों की वजह से होता है. हालांकि, अब गाड़ियों में किए गए तकनीकी बदलावों के कारण प्रदूषण कम हो रहा है. डीजल गाड़ियों से निकलने वाले धुएं की वजह से दुनिया में करीब 3.85 लाख लोगों की मौत हो रही है. गाड़ियों का सबसे बड़ा बाजार- चीन, भारत, यूरोपीय देश और अमेरिका हैं. डीजल के धुएं से मरने वालों में 70% सिर्फ इन्हीं चारों देशों में हैं.

पृथ्वी पर करीब 188 करोड़ घर हैं, 2041 तक चाहिए 43 करोड़ और मकान

पृथ्वी पर अभी करीब 188 करोड़ घर हैं. संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के अनुसार अगले 22 साल में पूरी दुनिया को बढ़ती हुई आबादी के मुताबिक 43 करोड़ और मकानों की जरूरत होगी. इन मकानों को बनाने के लिए जंगल कटेंगे. मकानों के आसपास ढांचागत विकास होगा. ऐसे में पर्यावरण पर बुरा प्रभाव पड़ेगा. शहरों की हवाओं में धूल के कण बढ़ेंगे. इनसे प्रदूषण में कमी लाने की मुहिम पर असर पड़ेगा.

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