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पाकिस्तान के लिए बेमानी है यूएन में कश्मीर राग का रोना

बुधवार को शरीफ यूएन महासभा को संबोधित करेंगे. लेकिन वो शायद भूल गए हैं कि पाकिस्तान पर न सिर्फ भारत में आतंक फैलाने, बल्कि अमेरिका, खासकर उस शहर में आतंकी घटनाओं को शह देने का आरोप है, जहां पाकिस्तानी पीएम अपने भाषण में कश्मीर का मसला उठाने वाले हैं.

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aajtak.in
रंजीत सिंह/ सुरभि गुप्ता नई दिल्ली, 20 September 2016
पाकिस्तान के लिए बेमानी है यूएन में कश्मीर राग का रोना पाकिस्तान के पीएम नवाज शरीफ

जम्मू-कश्मीर के उरी में हुए आतंकी हमले पर मचे कोहराम के बीच यूएन महासभा की मीटिंग हो रही है. पाकिस्तान के पीएम नवाज शरीफ रविवार को महासभा के 71वें सत्र में हिस्सा लेने के लिए न्यूयॉर्क पहुंचे, उसी वक्त उरी में आतंकी हमले में 17 जवानों की शहादत की खबर आई. हर बार की तरह इस बार भी यूएन में पाकिस्तान के एजेंडे में कश्मीर होगा. शरीफ ने न्यूयॉर्क के लिए रवाना होने से पहले पीओके के नेताओं से मुलाकात की और कश्मीर मसले को यूएन में उठाने का भरोसा दिया.

बुधवार को शरीफ यूएन महासभा को संबोधित करेंगे. लेकिन वो शायद भूल गए हैं कि पाकिस्तान पर न सिर्फ भारत में आतंक फैलाने, बल्कि अमेरिका, खासकर उस शहर में आतंकी घटनाओं को शह देने का आरोप है, जहां पाकिस्तानी पीएम अपने भाषण में कश्मीर का मसला उठाने वाले हैं. इस दौरान अंतरराष्ट्रीय समुदाय के जेहन में उरी आतंकी हमले की घटना भी होगी. ऐसे में यूएन में एक बार फिर पाकिस्तान का कश्मीर राग रोना बेमानी ही लगता है. पाकिस्तानी हुक्मरान आखिर किस मुंह से यूएन के मंच पर भारत के खिलाफ एक लब्ज भी बोलेंगे.

1. पाकिस्तान भारत पर कश्मीर में ज्यादती का आरोप लगाता रहा है और इसका जवाब हर बार भारत कूटनीतिक मंच से देता रहा है. पाकिस्तान मांग करता रहा है कि कश्मीर में यूएन के प्रस्ताव के तहत जनमत संग्रह कराया जाए. लेकिन कश्मीर पर अमेरिकी नीति के बारे में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जॉन किर्बी कहते हैं कि कश्मीर पर भारत और पाकिस्तान को आपस में ही बात करनी चाहिए.

2. कश्मीर को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच दो द्वि‍पक्षीय समझौते हुए- शिमला समझौता और लाहौर घोषणापत्र. दोनों बार पाकिस्तान ने शांतिपूर्वक तरीके से कश्मीर मसले को हल करने का भरोसा दिया. शिमला समझौता 1971 की जंग के बाद हुआ, तो लाहौर घोषणापत्र पर दस्तखत करने के बाद पाकिस्तान ने करगिल में जंग छेड़ दी.

3. अमेरिका सहित दुनिया के कई मुल्कों के लिए चिंता का सबब बने अल कायदा और तालिबान जैसे आतंकी संगठनों को पाकिस्तान की जमीन से ही खाद पानी मिला. भारत के लिए सिरदर्द बने जैश-ए-मुहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा भी पाकिस्तानी जमीन पर ही फल फूल रहे हैं. पाकिस्तान सेना खुद इन आतंकी संगठनों को भारत के खिलाफ ऑपरेशन के लिए दिशानिर्देश देती है.

4. पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई वैसे ही दुनिया में बदनाम है. मुंबई पर हुए आतंकी हमले की प्लानिंग करने के आरोप डेविड हेडली का केस अमेरिकी अदालत में चल रहा है. आईएसआई की ओर से कश्मीरी अलगाववादी नेता गुलाम नबी फई को फंडिंग किए जाने का मामला भी यूएस की कोर्ट में है. फई पर कश्मीर मसले पर अमेरिका को पाकिस्तान के पक्ष में करने के लिए लॉबिंग करने का आरोप है. उसे इस काम के लिए आईएसआई पैसे दे रही थी.

5. पाकिस्तान की हरकतों से आजिज अमेरिका बार-बार उसे दी जाने वाली आर्थि‍क सैन्य मदद में कटौती करता रहता है, तो कभी कभार इसे रोक भी देता है. चीन को छोड़कर पाकिस्तान अपने पड़ोसियों के बीच भी अलग थलग पड़ा हुआ है. हाल के वर्षों में बहुत ही कम विदेशी नेताओं ने पाकिस्तान का दौरा किया है. यह कूटनीतिक स्तर पर पाकिस्तान की नाकामी है, जो किसी वैश्विक मंच पर उसे मदद करने में उसके खिलाफ जा सकती है.

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