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भारत के लिए 'आसियान' पूर्व से जुड़ने का जरियाः प्रधानमंत्री

सातवें पूर्व एशिया शिखर सम्‍मेलन के पूर्ण अधिवेशन में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने हिस्सा लिया. इस दौरान उन्होंने कहा कि आसियान पूर्व से जुड़ने का जरिया है.

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aajtak.in
आजतक वेब ब्यूरोनोम पेन्‍ह, 20 November 2012
भारत के लिए 'आसियान' पूर्व से जुड़ने का जरियाः प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह

सातवें पूर्व एशिया शिखर सम्‍मेलन के पूर्ण अधिवेशन में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने हिस्सा लिया. इस दौरान उन्होंने कहा कि आसियान पूर्व से जुड़ने का जरिया है.

नोम पेन्‍ह में हुए इस सम्मेलन के पूर्ण अधिवेशन में मनमोहन सिंह ने कहा, ‘मैं प्रधानमंत्री हुन सेन को सातवें पूर्व एशिया शिखर सम्‍मेलन के लिए स्‍नेहपूर्ण मेजबानी और शानदार प्रबंधों के लिए धन्‍यवाद देना चाहता हूं. मैं सर्वतोमुखी आसियान समुदाय का गठन करने में हुई प्रगति और व्‍यापक क्षेत्रीय पहल जैसे एआरएफ, ईएएस और एडीएमएम+ शुरू करने में आसियान सदस्‍यों के नेतृत्‍व के लिए उन्‍हें बधाई देना चाहता हूं. भारत के लिए आसियान पूर्व को जोड़ने का जरिया है. यह क्षेत्रीय संरचना के विकास और उसके विभिन्‍न ढांचों के लिए मिलकर काम करने का केंद्र हैं.'

उन्होंने कहा, 'भारत की सुरक्षा और समृद्धि का एशिया प्रशांत क्षेत्र से महत्‍वपूर्ण जुड़ाव रहा है. इस क्षेत्र के लिए हमारा दृष्टिकोण आपसी सहयोग और एकजुटता में समाहित है. पूर्व-एशिया शिखर सम्‍मेलन जैसे मंच इस क्षेत्र में विशाल आर्थिक समुदाय का गठन करने में मदद कर सकते हैं जिससे विकास में तेजी आयेगी और समृद्धि बढ़ेगी. साथ ही क्षेत्र में आपसी समझ और विश्‍वास मजबूत होगा. यह शिखर सम्‍मेलन एशिया प्रशांत क्षेत्र में हो रही महत्‍वपूर्ण घटनाओं और परिवर्तन का गवाह है. विभिन्‍न देशों द्वारा किये जा रहे सम्मिलित प्रयास और सामूहिक कार्य, आपसी समझ को मजबूत बना सकते हैं और चुनौतियों से निपटने में हमारी मदद कर सकते हैं. इसके लिए जरूरी होगा कि एक साझा सिद्धांत तैयार किये जायें, सहयोगपूर्ण तंत्रों की स्‍थापना की जाये और क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग को और मजबूत किया जाये. अत: आज हम क्षेत्रीय व्‍यापक आर्थिक भागीदारी समझौतों का स्‍वागत करते हैं. हम पूर्व-एशिया शिखर सम्‍मेलन विकास पहल के बारे में नोम पेन्‍ह घोषणा पत्र का भी समर्थन करते हैं. हमारे देशों के बीच वाणिज्य, संबंध और भागीदारी में वृद्धि के लिए संपर्क बेहद आवश्यक है. पिछले शिखर सम्मेलन में अपनाए गए आसियान संपर्क पर ईएएस घोषणा को हमें जल्द ही लागू करना चाहिए. विशिष्ट परियोजनाओं की जल्द पहचान और उनके क्रियान्वयन के लिए अभिनव वित्तीयन प्रणाली का विकास हमारी भागीदारी के इस महत्वपूर्ण पहलू को आगे बढ़ाने में मददगार होगा.'

उन्होंने आगे कहा, 'भारत को ईएएस से संबंधित विभिन्न पहलों को आगे बढ़ाने की खुशी है. मलेरिया नियंत्रण पर ईएएस घोषणा का अनुसरण करते हुए हमने क्षमता निर्माण और वेक्‍टर नियंत्रण प्रबंधन प्रणाली पर क्रार्यक्रम का प्रस्ताव इस वर्ष के शुरुआत में अपने आसियान साझेदारों के समक्ष रखा है और ईएएस सदस्यों के साथ इस दिशा में सहयोग की आशा करते हैं. इस महीने की शुरुआत में नई दिल्ली में हमने भूकंप जोखिम प्रंबधन के लिए क्षेत्रीय रुपरेखा पर एक ईएएस-भारत कार्यशाला का आयोजन किया था. इससे प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए हमारी भागीदारी को बल मिलेगा. अंत में, नालंदा विश्वविद्यालय परियोजना जिसमें आपका सहयोग अमूल्य रहा है, आगे कि दिशा में बढ़ रहा है और हमें आशा है कि शैक्षणिक सत्र 2014-15 से दो विद्यालयों में शिक्षा शुरू हो जाएगी.'

प्रधानमंत्री बोले, 'हालांकि ईएएस अभी नया है, हमने आर्थिक भागीदारी और हमारी कुछ समान चुनौतियों को संबोधित करने के लिए एक सुदृढ़ एजेंडे का निर्माण किया है. हमारे बीच की दूरियों को संबोधित करने के लिए हमें इसी भावना के साथ मिलकर काम करने की कोशिश करनी चाहिए. मुझे इस बात में कोई शंका नहीं कि एकसाथ मिलकर हम अपने क्षेत्र की समेकित सुरक्षा, स्थिरता और सौहार्द के लिए एक मुक्त, संतुलित, समावेशी और नियम आधारित संरचना का निर्माण कर सकते हैं.'

 

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