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हाफिज ने अपनी गिरफ्तारी को कोर्ट में दी चुनौती, 28 अक्टूबर को होगी सुनवाई

लाहौर हाईकोर्ट ने हाफिज की याचिका को स्वीकार कर लिया है. कोर्ट की दो सदस्यीय बेंच ने सुनवाई के बाद पाकिस्तान की पंजाब सरकार और आतंकवाद रोधी विभाग से जवाब तलब किया है.

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aajtak.in
aajtak.in नई दिल्ली, 07 October 2019
हाफिज ने अपनी गिरफ्तारी को कोर्ट में दी चुनौती, 28 अक्टूबर को होगी सुनवाई पाकिस्तानी आतंकी हाफिज सईद (फाइल फोटो)

  • पंजाब सरकार और आतंकवाद रोधी विभाग से जवाब तलब
  • जमात उद दावा के मलिक जफर इकबाल ने याचिका दायर की

वैश्विक आतंकवादी और लश्कर-ए-तैयबा प्रमुख हाफिज सईद ने अपनी गिरफ्तारी के खिलाफ लाहौर हाई कोर्ट में अपील दायर की है. कोर्ट ने हाफिज की याचिका को स्वीकार भी कर लिया है. लाहौर हाई कोर्ट की दो सदस्यीय बेंच ने सुनवाई के बाद पाकिस्तान की पंजाब सरकार और आतंकवाद रोधी विभाग से जवाब तलब किया है. मामले की सुनवाई 28 अक्टूबर को होगी.

पाकिस्तानी मीडिया में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस आसिम खान और जस्टिस ए. जावेद घराल की पीठ ने यह मंजूरी दी. सईद और अन्य आरोपियों के वकील ने कहा कि एक ही तरह की चौबीस एफआईआर दर्ज की गई हैं. इनमें सईद और अन्य आरोपियों को आतंकवाद में शामिल बताया गया है जबकि वे आतंकवादी नहीं हैं. एफआईआर में सईद की जिन संपत्तियों का जिक्र है, वे दरअसल मदरसे या मस्जिद हैं. इस पर सरकारी वकील ने कहा कि उन्हें इस मामले में पहले से कोई जानकारी नहीं दी गई.

28 अक्टूबर को अगली सुनवाई

अदालत ने संबंधित पक्षों की दलील सुनने के बाद याचिका को सुनवाई के लिए मंजूरी दी और पाकिस्तान के प्रांत पंजाब की सरकार और आतंकवाद रोधी विभाग से रिपोर्ट मांगते हुए मामले की सुनवाई के लिए 28 अक्टूबर की अगली तारीख दे दी. जमात उद दावा से संबंधित संस्था के महासचिव मलिक जफर इकबाल ने अदालत में यह याचिका दायर की है. मलिक का नाम खुद भी पुलिस की रिपोर्ट में है. उसने याचिका में कहा है कि सईद और 65 अन्य पर दर्ज मुकदमों का कोई कानूनी आधार नहीं है और यह कानूनी रूप से स्वीकार्य नहीं हो सकते.

लश्कर ने कहा, आरोप बेबुनियाद

याचिका में कहा गया है कि जिन संपत्तियों पर सवाल उठाया जा रहा है, उनमें संपत्ति मस्जिद की है. इसलिए मामले में दर्ज एफआईआर कानूनी दायरे से बाहर हैं. याचिका में कहा गया है कि 'साथ ही, इन तमाम संपत्तियों का इस्तेमाल कभी भी आतंकवादी कार्रवाई में नहीं किया गया. रिकार्ड में ऐसा कोई प्रमाण नहीं है जो बताता हो कि इनका इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए किया गया है. सईद पर प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-तैयबा का नेता होने का आरोप बेबुनियाद है. उसका इस संगठन से कोई संबंध नहीं है.'

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