एडवांस्ड सर्च

प्रतिबंधों के बीच ट्रंप का दावा- अमेरिका के साथ व्यापार करना चाहता है भारत

हाल ही में संपन्न हुए टू प्लस टू बैठक के दौरान भारत आए अमेरिकी रक्षामंत्री और विदेश मंत्री ने कहा है कि वो रूस और ईरान से होने वाले समझौतों पर अमेरिकी प्रतिबंधों से भारत को राहत प्रदान करने पर विचार कर रहा है. 

Advertisement
Sahitya Aajtak 2018
aajtak.in [Edited By: विवेक पाठक]वाशिंगटन, 11 September 2018
प्रतिबंधों के बीच ट्रंप का दावा- अमेरिका के साथ व्यापार करना चाहता है भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (फाइल फोटो)

संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि भारत अमेरिकी प्रशासन के कड़े रुख के बावजूद उसके साथ व्यापार समझौता करना चाहता है. ट्रंप सरकार उस सब्सिडी को समाप्त करना चाहती है जो भारत और चीन जैसी विकासशील अर्थव्यवस्थाएं अमेरिका से प्राप्त करती रही हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की नजर में अमेरिका विकासशील देश है और वह चाहते हैं कि किसी भी अन्य देश की तुलना में वह भी तीव्र गति से आगे बढ़े. ट्रंप अक्सर भारत द्वारा अमेरिकी उत्पादों पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाने का आरोप लगाते रहे हैं.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक ट्रंप ने कहा, 'भारत से दूसरे दिन कॉल आया. उन्होंने कहा वे पहली बार व्यापार समझौता करना चाहते हैं.' हालांकि ट्रंप ने यह नहीं बताया कि किसने किसको कॉल किया था.

शुक्रवार को साउथ डकोता में एक कार्यक्रम में अपने समर्थकों के बीच रूस के साथ भारत के समझौते पर ट्रंप ने कहा कि ‘पूर्व सरकार के साथ उन्होंने इस बारे में कोई बात नहीं की.' वे जो चीजें चल रही थी, उससे खुश थे.' इस बीच, अमेरिकी प्रशासन के एक अधिकारी ने कहा है कि भारत द्वारा रूस से एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली खरीदने के बड़े सैन्य सौदे को लेकर अमेरिका भारत के साथ बातचीत जारी रखेगा.

गौरतलब है कि रूस से भारत करीब 4.5 अरब डालर में पांच एस-400 ट्रिउंफ मिसाइल हवाई रक्षा प्रणाली खरीदने की योजना बना रहा है. अमेरिका ने एक कानून के तहत रूस से हथियारों की खरीद पर रोक लगा रखी है. ऐसे में भारत के रूस के साथ हथियार सौदा करने से इस कानून का उल्लंघन माना जा रहा है.

ट्रंप ने कहा कि यदि भारत और चीन सरीखे देश तेजी से वृद्धि कर रहे हैं तो अमेरिका क्यों नहीं कर सकता. उन्होंने कहा, ' मैने उनसे कहा है, आपने व्यापारिक समझौता तय किया है. जब भारत और चीन 6, 7, 8 फीसदी की गति से बढ़ने के बावजूद मुश्किलों का सामना कर रहे हैं, तो हम कैसे 1 फीसदी की दर पर रह सकते हैं?'

Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay