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क्रीमिया की संसद का रूस में शामिल होने का फैसला

यूक्रेन के स्वायत्तशासी क्षेत्र क्रीमिया की संसद ने रूसी संघ का औपचारिक रूप से हिस्सा बनने के पक्ष में मतदान किया है. इस फैसले पर जनादेश हासिल करने के लिए जनमत संग्रह कराए जाने के आसार हैं.

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aajtak.in
आईएएनएस [Edited By: पीयूष शर्मा]क्रीमिया/ब्रसेल्स/मास्को, 06 March 2014
क्रीमिया की संसद का रूस में शामिल होने का फैसला

यूक्रेन के स्वायत्तशासी क्षेत्र क्रीमिया की संसद ने रूसी संघ का औपचारिक रूप से हिस्सा बनने के पक्ष में मतदान किया है. इस फैसले पर जनादेश हासिल करने के लिए जनमत संग्रह कराए जाने के आसार हैं.

क्षेत्रीय संसद के हवाले से बीबीसी में आई खबरों के मुताबिक स्वायत्तशासी क्षेत्र की संसद ने कहा है कि इस बात का फैसला क्रीमिया की जनता पर छोड़ा जा रहा है जो 16 मार्च को होने वाले जनमत संग्रह में अपनी राय जाहिर करेंगे. इधर भारत ने भी यूक्रेन संकट के शीघ्र समाधान की उम्मीद जताई है.

यह घोषणा क्रीमिया की संसद की ओर से की गई है क्योंकि यूरोपी संघ के नेता यूक्रेन में रूसी सेना की तैनाती का जवाब देने की रणनीति तय करने के लिए ब्रसेल्स में बैठक कर रहे हैं. कीव में एक मंत्री ने हालांकि कहा कि उनका मानना है कि क्रीमिया का रूस में शामिल होना असंवैधानिक होगा.

क्रीमिया में नस्ली रूप से अधिकांशत: रूसी लोग हैं और यूक्रेन में मास्को समर्थक राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच के पतन के बाद तनाव के केंद्र में आ गया. रूस समर्थक और रूसी सेना पिछले कुछ दिनों से प्रायद्वीप पर प्रच्छन्न रूप से नियंत्रण बनाए हुए हैं. इस इलाके को पहले से ही कीव से स्वायत्तता हासिल है.

क्रीमिया की संसद ने रूसी संघ में जाने का यह फैसला रूसी संघ के अधिकार के तहत लिया है. यूक्रेन के काला सागर तट पर स्थित प्रायद्वीप क्रीमिया की आबादी 23 लाख है जिनमें से अधिकांश खुद को रूसी मानते हैं और रूसी भाषा बोलते हैं.

करीब 200 वर्षों तक क्रीमिया में रूस का दबदबा रहा है. रूस ने 1783 में इस क्षेत्र पर कब्जा जमाया था. सोवियत संघ का हिस्सा रहे इस क्षेत्र को रूस ने 1954 में यूक्रेन को हस्तांतरित कर दिया. कई रूसी आज भी उस फैसले को ऐतिहासिक रूप से गलत फैसला मानते हैं.

वर्ष 2010 में क्रीमिया क्षेत्र में राष्ट्रपति चुनाव के दौरान यानुकोविच के पक्ष में भारी मतदान हुआ था. कई लोगों का मानना है कि यानुकोविच क्रीमिया की संसद के पृथकतावादियों के विद्रोह के शिकार हुए हैं. इस बीच यूक्रेन के नए प्रधानमंत्री अर्सेनिय यात्सेनयुक ने गुरुवार को रूस से अपनी सेना वापस बुलाने और यूक्रेन की बिगड़ती राजनीतिक हालत को दुरुस्त करने का आह्वान किया.

समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक यात्सेनयुक ने यूरोपीय यूनियन की शिखर वार्ता शुरू होने से पहले आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में गुरुवार को कहा कि रूसी पक्ष भी टकराव और तनाव को भड़का रहा है. यूरोपीय संघ की शिखर वार्ता में यूक्रेन संकट के समाधान के उपायों पर चर्चा की जानी है.

रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लैवरोव ने हालांकि रूस का पक्ष साफ करते हुए बुधवार को कहा था कि यूरोपीय यूनियन ने 21 फरवरी को हुए समझौते को तोड़ दिया है. उस समझौते के मुताबिक संवैधानिक सुधार और यूक्रेन के सभी क्षेत्रों को भरोसे में लिए जाने की बात कही गई थी. उसी समझौते को स्थिति के समाधान का आधार बनाया जाना चाहिए.

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