एडवांस्ड सर्च

2013 में जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों पर भारी पड़े आतंकी

जम्मू-कश्मीर में 2013 में आतंकवादी घटनाओं में काफी कमी आयी, लेकिन आतंकवादी सुरक्षा बलों पर काफी भारी पड़े और उन्होंने पिछले दो सालों की कुल घटनाओं के मुकाबले सुरक्षा बलों को ज्‍यादा अपना निशाना बनाया.

Advertisement
भाषा[Edited By: दिगपाल सिंह]श्रीनगर, 29 December 2013
2013 में जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों पर भारी पड़े आतंकी आतंकवादी हमले के दौरान सुरक्षाकर्मी

जम्मू-कश्मीर में 2013 में आतंकवादी घटनाओं में काफी कमी आयी, लेकिन आतंकवादी सुरक्षा बलों पर काफी भारी पड़े और उन्होंने पिछले दो सालों की कुल घटनाओं के मुकाबले सुरक्षा बलों को ज्‍यादा अपना निशाना बनाया.

इस साल आतंकवादियों के हमले में 61 सुरक्षाकर्मी मारे गए, जो वर्ष 2012 की घटनाओं के मुकाबले सौ फीसदी ज्‍यादा है. 2012 और 2011 में कुल मिलाकर आतंकवादी घटनाओं में 47 सैन्यकर्मी शहीद हुए थे. पिछले साल सुरक्षा बलों ने 119 आतंकवादियों को मार गिराया था, लेकिन इस साल यह संख्या कम होकर 97 ही रही. 2011 में 84 आतंकवादी मारे गए थे.

हालांकि पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां लगातार कहती रही कि साल के दौरान प्रदेश में आतंकवादी घटनाओं में करीब 30 फीसदी की कमी आयी है, लेकिन इसके बावजूद आतंकवाद सुरक्षा बलों के लिए एक गंभीर चुनौती बना रहा. सुरक्षा एजेंसियों का यह भी कहना था कि नियंत्रण रेखा के उस पार से कश्मीर में आतंकवादियों की घुसपैठ में भी कमी देखी गयी. हालांकि इसके लिए प्रयास तो काफी हुए.

अक्‍टूबर में, राज्य के पुलिस प्रमुख अशोक प्रसाद ने कहा कि पिछले 23 सालों में राज्य में आतंकवादी हिंसा सबसे कम रही. उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से हिंसा में 30 फीसदी की कमी आयी है और उन्होंने इसका श्रेय सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय को दिया.

सुरक्षा बलों ने सुरक्षा बलों के अधिक संख्या में हताहत होने के लिए उग्रवादियों की रणनीति को जिम्मेदार ठहराया, जिसमें आम जनता पर न्यूनतम और सुरक्षा मोर्चे पर अधिकतम प्रभाव पड़ा. आतंकवादियों द्वारा किए गए एक आत्मघाती हमले से आतंकवादियों की रणनीति में बदलाव दिखा. पिछले तीन सालों में ऐसा पहली बार था कि दो आतंकवादियों ने 13 मार्च को शहर के बेमिना इलाके में सीआरपीएफ कर्मियों को निशाना बनाया और पांच सुरक्षाकर्मियों को मार डाला तथा सात को घायल कर दिया.

एक अन्य प्रमुख हमले में आतंकवादियों ने 26 अप्रैल को उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले के सोपोर इलाके में पुलिस के एक वाहन पर घात लगाकर हमला किया और चार सुरक्षाकर्मियों को मार गिराया. हालांकि सबसे घातक हमला जम्मू में सांबा, कठुआ में और श्रीनगर के हैदरपुरा में किया गया. आतंकवादियों ने हैदरपुरा में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की यात्रा से पहले आठ जवानों को मार दिया और 19 अन्य को घायल कर दिया.

26 सितंबर को हीरानगर और सांबा में सेना के शिविर तथा एक पुलिस थाने पर किए गए दो आतंकवादी हमलों में आठ सुरक्षाकर्मी और दो नागरिक मारे गए. नियंत्रण रेखा पर आतंकवादियों की घुसपैठों के प्रयासों ने भी सुरक्षाकर्मियों की नींद हराम किए रखी. हालांकि सेना ने कहा कि विभिन्न स्थानों से घाटी में आतंकवादियों की घुसपैठ कराने की पाकिस्तान में बैठे आतंकवादियों के आकाओं की बदली नीति के कारण इस प्रकार के प्रयासों में वृद्धि हुई है.

सेना ने कश्मीर के केरन सेक्टर में शलालाबट्टी में घुसपैठ के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान चलाया. ऐसी रिपोर्टे थीं कि पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों ने पड़ोसी देश की नियमित सेना के सैनिकों की मदद से कुछ भारतीय गांवों पर कब्जा जमा लिया है. इसके बाद यह अभियान चलाया गया.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
  • Aajtak Android App
  • Aajtak Android IOS
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay