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नोटबंदी में कतार में लगी थी मां, बैंक में जन्मे बच्चे ‘खजांची नाथ’ का आज क्या है हाल?

‘खजांची नाथ’ के जन्म की खबर सुर्खियों में आने के बाद यूपी के तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव ने इस परिवार को दो लाख रुपए की मदद की थी. ये मदद ना मिली होती तो इस परिवार की हालत आज और खराब होती. सर्वेशा देवी खुद विकलांग है और उनके पति का निधन ‘खजांची नाथ’ के जन्म से पांच महीने पहले ही हो चुका है.

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aajtak.in
कुमार अभिषेक / खुशदीप सहगल कानपुर देहात, 08 November 2017
नोटबंदी में कतार में लगी थी मां, बैंक में जन्मे बच्चे ‘खजांची नाथ’ का आज क्या है हाल? कानपुर देहात के PNB बैंक में जन्मा बच्चा

नोटबंदी के फैसले को बुधवार को एक साल पूरा हो गया. इसी दिन ‘खजांची नाथ’ भी 11 महीने और 6 दिन का हो गया. खजांची वो बच्चा है जिसका जन्म नोटों की बदली के दिनों में पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की एक ब्रांच में हुआ था. 2 दिसंबर, 2016 को खजांची के जन्म से पहले उसकी मां बैंक की कतार में पैसे लेने के लिए घंटों से खड़ी थी. 

पीएनबी की ये ब्रांच कानपुर देहात के झींझट कस्बे में हैं. बता दें कि इसी कस्बे में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का पैतृक आवास है. बच्चे को ‘खजांची नाथ’  नाम भी पीएनबी की ब्रांच के स्टाफ ने दिया था. नोटबंदी को एक साल पूरा होने पर खजांची और उसके परिवार का हाल जानने के लिए ‘आज तक’  उनके गांव पहुंचा.  

‘खजांची नाथ’ के जन्म की खबर सुर्खियों में आने के बाद यूपी के तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव ने इस परिवार को दो लाख रुपए की मदद की थी. ये मदद ना मिली होती तो इस परिवार की हालत आज और खराब होती. सर्वेशा देवी खुद विकलांग है और उनके पति का निधन ‘खजांची नाथ’ के जन्म से पांच महीने पहले ही हो चुका है. झंझीट कस्बे से करीब 40 किलोमीटर दूर सरदारपुर का रहने वाला ये यह परिवार गांव छोड़कर दूसरे गांव में चला गया है. सरदारपुर में इस परिवार का घर बंद है जो लोहिया आवास योजना के तहत पिछली सरकार के कार्यकाल में बना था. इसी योजना की सरकारी किस्त लेने के लिए सर्वेशा देवी बैंक की कतार में खड़ी थी. सर्वेशा के ससुराल वाले आरोप लगा रहे हैं कि 2 लाख रुपए मिलने के बाद वो अपने मायके चली गई और सरदारपुर वाले घर को छोड़ दिया. हालांकि ससुराल वाले खजांची को बहुत याद करते हैं.

सर्वेशा देवी कानपुर देहात के आनंदपुर गांव में अपने मायके में 5 बच्चों के साथ रहती है. जो दो लाख रुपए की रकम अखिलेश यादव से मिली थी उसमें से 75 हजार रुपए एक बेटे के टीबी के इलाज में खत्म हो गए. बाकी सवा लाख रुपये बैंक में जमा करा रखे हैं ताकि उससे परिवार का गुजर बसर चल सके. ‘खजांची नाथ’ का परिवार दो लाख की मदद मिलने के बाद भी बीमारी की वजह से तंगहाली में है.   

सर्वेशा देवी के भाई का कहना है कि नोटबंदी के बाद दो लाख रुपए तो मिले लेकिन उसके बाद किसी ने इस परिवार या खंचाजी की सुध नहीं ली.

झींझट की पीएनबी ब्रांच के मैनेजर और अन्य स्टाफ अब भी खजांची के जन्मदिन यानी 2 दिसंबर को शिद्दत के साथ याद करता है. ब्रांच मैनेजर के मुताबिक सर्वेशा देवी ने कतार में लगे रहने के बाद ब्रांच के एक कोने में ‘खजांची नाथ’ को जन्म दिया था, इसलिए वो प्रकरण मीडिया की सुर्खियों में आया और इस परिवार को दो लाख रुपए की मदद मिल गई. मैनेजर ने कहा कि वो चाहेंगे कि ‘खजांची नाथ’  बड़ा होने पर पढ़ लिखकर बैंक में अफसर बने. 

नोटबंदी को लेकर ‘खजांची नाथ’ के गांव के लोगों की राय जानने की कोशिश की गई तो अधिकतर पीएम मोदी के फैसले को एक साल पूरा होने के बाद भी सही ठहराते दिखे.

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