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बर्बरता करने के लिए जानी जाती है पाकिस्तान की BAT

जम्मू के मेंढर सेक्टर में एलओसी पर पाकिस्तान ने फायरिंग की. इस हमले में दो भारतीय जवान शहीद हो गए. बताया गया कि ये हमला पाकिस्तान की बॉर्डर एक्शन टीम यानी 'बैट' ने किया. इस फायरिंग में पाकिस्तानी सेना ने बैट का साथ दिया.

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aajtak.in
जावेद अख़्तर नई दिल्ली, 02 May 2017
बर्बरता करने के लिए जानी जाती है पाकिस्तान की BAT BAT ने किया भारत पर हमला

जम्मू के मेंढर सेक्टर में एलओसी पर पाकिस्तान ने फायरिंग की. इस हमले में दो भारतीय जवान शहीद हो गए. बताया गया कि ये हमला पाकिस्तान की बॉर्डर एक्शन टीम यानी 'बैट' ने किया. इस फायरिंग में पाकिस्तानी सेना ने बैट का साथ दिया.

क्या है 'बैट'?
'बैट'(BAT) का पूरा नाम बॉर्डर एक्शन टीम है. इसके बारे में सबसे पहले पांच और छह अगस्त 2013 की दरमियानी रात को पता लगा था. तब इस टीम ने एलओसी पर पेट्रोलिंग कर रही भारतीय सेना की टुकड़ी को निशाना बनाया था.

दरअसल यह पाकिस्तान की स्पेशल फोर्स से लिए गए सैनिकों का एक ग्रुप है. हैरानी की बात ये है कि BAT में सैनिकों जैसी ट्रेनिंग पाए आतंकी भी हैं. ये एलओसी में 1 से 3 किलोमीटर तक अंदर घुसकर हमला करने के लिए तैयार किया गया है.

'बैट' को स्पेशल सर्विस ग्रुप यानी एसएसजी ने तैयार किया है. यह पूरी प्लानिंग के साथ अटैक करती है. ये टीम पहले खुफिया तौर पर ऑपरेशनों को अंजाम देती थी लेकिन बाद में मीडिया की वजह से खबरों में रहने लगी.

पहले भी हुई सैनिकों के शव के साथ बर्बरता
-22 नवंबर, 2016 को माछिल में लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) पर पाकिस्तान के संदिग्ध आतंकियों के हमले में आर्मी के तीन जवान शहीद हो गए थे. एक जवान का शव क्षत-विक्षत हालत में मिला था. माछिल में हमारे जवान फेंसिंग के आगे पेट्रोलिंग करते हैं.

-पिछले साल 28 अक्टूबर को भी एक जवान मनदीप सिंह के शव का पाकिस्तान की सेना ने अपमान किया था. पाकिस्तानी आर्मी के कवर फायर का फायदा उठाते हुए आतंकी LoC के रास्ते घुसे और एक जवान की जान ले ली. उसके बाद जवान के शव को क्षत-विक्षत कर दिया गया. ये घटना भी माछिल सेक्टर में ही हुई थी.

-जून 2008 में गोरखा राइफल्स के एक जवान को पाकिस्तानी बॉर्डर एक्शन टीम ने केल सेक्टर में पकड़ लिया था. कुछ दिन बाद उसका सिर कलम कर लाश फेंक दी थी.

-2013 में दो जवान लांसनायक हेमराज और सुधाकर सिंह के शवों को भी पाक सैनिकों ने क्षत-विक्षत कर दिया था.

1999 की करगिल जंग के दौरान कैप्टन सौरभ कालिया को पाकिस्तान की सेना ने प्रताड़ित किया था और बाद में उनके शव के साथ भी बर्बरता की गई.

-2016 में एलओसी के पास 228 और इंटरनेशनल बॉर्डर पर 221 सीजफायर वॉयलेशन हुए थे.

मई से जुलाई तक क्यों बढ़ जाती हैं सीमा पर ऐसी घटनाएं
एलओसी पर गर्मियों का वक्त बेहद संवेदनशील माना जाता है. दरअसल, इस दौरान पहाड़ों पर बर्फ पिघलती है. इसका फायदा उठाकर पाकिस्तान की तरफ आतंकी घुसपैठ की साजिश करते हैं.

एलओसी पर कुछ जगह ऐसी हैं, जहां फेंसिंग लगाना बेहद मुश्किल है. ये दलदल वाला इलाका है. पाकिस्तान इस इलाके के जानकारी आतंकियों को 'बैट' के साथ भेजता है.

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