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पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र है या लहूतंत्र, कब बदलेंगे हालात?

पश्चिम बंगाल कितना बदल गया है. कभी आजादी के दीवानों की धमक से दमकता था, आज सत्ता की प्रायोजित हिंसा से लाल हुए जा रहा है. कभी टीएमसी के किसी कार्यकर्ता की हत्या तो कभी बीजेपी के किसी कार्यकर्ता के घर मौत का मातम.

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aajtak.in
aajtak.in कोलकाता/नई दिल्ली, 11 June 2019
पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र है या लहूतंत्र, कब बदलेंगे हालात? ममता बनर्जी के खिलाफ प्रदर्शन करते बीजेपी कार्यकर्ता (IANS)

पश्चिम बंगाल की आग कहीं दूर तक दिल्ली में धधक रही है. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और तृणमूल कांग्रेस(TMC) के कार्यकर्ताओं के बीच खूनी लड़ाई ने बंगाल को लहूलुहान कर दिया है. बीजेपी राज्य में राष्ट्रपति शासन की मांग कर रही है और इसको बल तब मिला जब राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की. इन सब घटनाक्रमों के बीच, एक अनकहा सवाल गूंज रहा है कि पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र है या लहूतंत्र.

पश्चिम बंगाल कितना बदल गया है. कभी आजादी के दीवानों की धमक से दमकता था, आज सत्ता की प्रायोजित हिंसा से लाल हुए जा रहा है. कभी टीएमसी के किसी कार्यकर्ता की हत्या तो कभी बीजेपी के किसी कार्यकर्ता के घर मौत का मातम. कभी मुर्शिदाबाद, कभी बांकुरा, कभी बीरभूम, कभी मालदा, कभी नाडिया कभी 24 परगना. अब कितने जिलों का नाम गिनाएं. पश्चिम बंगाल बेगुनाहों की मौत और गुनहगारों के उत्पात का घात अपने सीने पर लिए सिसक रहा है.

बंगाल की धधकी आग की आंच दिल्ली तक पहुंच गई है. राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी के दिल्ली आगमन ने सियासी हलकों की सरगर्मी बढ़ा दी. ऐसी खबरें आ रही हैं कि पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा और उससे बिगड़े हालात पर उन्होंने केंद्र सरकार को रिपोर्ट सौंपी है. वो सबसे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिले. फिर सीधे गृह मंत्री अमित शाह से मिलने पहुंचे और वहां से निकले तो ये बयान दिया. अमित शाह से मिलने के बाद बोला है कि बंगाल पर बात हुई. राष्ट्रपति शासन लगाने पर कोई बात नहीं हुई.

राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी ने राष्ट्रपति शासन की बात को भले ही सिरे से खारिज कर दिया हो. लेकिन बीजेपी किसी भी तरह से हालात को लेकर बैकफुट पर जाने के मूड में नहीं है. तभी तो बंगाल के बीजेपी के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने एक बड़ा बयान देकर सियासी खलबली मचा दी. उन्होंने कह दिया कि हिंसा का दौर जारी रहा तो धारा 356 लगाने के लिए सरकार से गुहार करनी पड़ेगी.

गौरतलब है कि 23 मई को लोकसभा चुनाव के नतीजे आए तो पश्चिम बंगाल में अचानक तृणमूल कांग्रेस के पैरों तले से एक बड़ी जमीन खिसक गई. बीजेपी का बंगाल में 18 सीटें जीतना ममता के लिए किसी सदमे से कम नहीं हुआ और बीजेपी के लिए बाली का बल लाने जैसा कि अगली विधानसभा चुनाव में तो बंगाल उसके कदमों में होगा. इसीलिए सड़क और गलियों पर पसरी हिंसा नेताओं की जुबान पर भी मर्यादा का मानमर्दन करने लगीं हैं.

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