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पश्चिम बंगाल: राष्ट्रपति शासन लगने पर BJP को फायदा होगा या नुकसान?

पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था को ध्वस्त बताते हुए बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग उठाने की बात कही है. अगर ममता बनर्जी सरकार बर्खास्त होती है तो बीजेपी को कितना फायदा और नुकसान होगा?

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aajtak.in
नवनीत मिश्रा नई दिल्ली, 10 June 2019
पश्चिम बंगाल: राष्ट्रपति शासन लगने पर BJP को फायदा होगा या नुकसान? पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह.

पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनाव के बाद भी हिंसा जारी है. अब तक कई पार्टी कार्यकर्ताओं की हत्याओं पर आग बबूला हुई केंद्र में सत्ताधारी बीजेपी ने राष्ट्रपति शासन लागू करने की चेतावनी दी है. पार्टी के महासचिव और पश्चिम बंगाल प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने सोमवार को बड़ा बयान दिया. उन्होंने दो टूक कहा है कि अगर बंगाल में ऐसे ही हालात रहे तो केंद्र को हस्तक्षेप करना पड़ सकता है, इसलिए हम धारा 356 की मांग करते हैं. कैलाश विजयवर्गीय का यह बयान, उत्तर 24 परगना जिले में कार्यकर्ताओं की हत्या के बाद पूरे बंगाल में आयोजित काला दिवस के दौरान आया है. इस बीच पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी के प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से मिलने के लिए दिल्ली पहुंचने के बाद से राज्य में राष्ट्रपति शासन की अटकलों का दौर तेज है.

राष्ट्रपति शासन लगने का आधार

संविधानविद डॉ. सुभाष कश्यप कहते हैं कि अगर किसी राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई हो. वहां के राज्यपाल इसकी पुष्टि करते हुए रिपोर्ट भेजें और राष्ट्रपति उस रिपोर्ट को स्वीकार करें तो फिर राष्ट्रपति शासन लग सकता है. चूंकि संविधान में कहा गया है कि राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह पर काम करता है. ऐसे में मंत्रिपरिषद की सिफारिश पर भी राष्ट्रपति धारा 356 के तहत अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर किसी राज्य की सरकार को बर्खास्त कर सकते हैं. ध्यान रहे कि किसी राज्य में जब पूरी तरह शासन व्यवस्था फेल होता दिखे, तब ही ऐसे कदम उठाए जाते हैं.

मोदी राज में दो बार हुआ धारा 356 का इस्तेमाल

पिछली मोदी सरकार ने दो बार धारा 356 का इस्तेमाल कर सरकारों को बर्खास्त किया था. मार्च 2016 में उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाकर कांग्रेस की हरीश रावत सरकार बर्खास्त कर दी गई थी. जिसे उत्तराखंड हाईकोर्ट ने इसे ग़लत ठहराया. मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो यहां भी सरकार की हार हुई.इसी तरह अरुणाचल प्रदेश में भी निर्वाचित सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगाने वाले फैसले को 13 जुलाई 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था. इस प्रकार देखें तो बीजेपी ने दो बार दो राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगाया, मगर दोनों बार कोर्ट ने खारिज कर दिया. जिसे बीजेपी के लिए झटका माना गया.

बीजेपी को क्या होगा फायदा?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि धारा 356 का इस्तेमाल दोधारी तलवार है. इसका बीजेपी को फायदा भी हो सकता है और नुकसान भी हो सकता है. अगर लाभ की बात करें तो इस वक्त पश्चिम बंगाल में बीजेपी का माहौल बना हुआ है. यहां 2014 में दो की तुलना में इस बार 18 सीटें मिलीं. वहीं बीजेपी सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के खेमे में लगातार सेंधमारी कर उसके नेताओं को तोड़ने में लगी है.

ऐसे में माना जा रहा है कि राष्ट्रपति शासन लागू करने के बाद जल्द चुनाव होने पर बीजेपी को फायदा मिल सकता है. नहीं तो 2021 तक विधानसभा चुनाव खिंचने पर बीजेपी को नुकसान भी उठाना पड़ सकता है. वजह कि इस दौरान ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल में डैमेज कंट्रोल कर सकतीं हैं. या फिर आने वाले समय में अगर अर्थव्यवस्था की हालत और खराब हुई तो इस पर व आगे किसी 'सेल्फ गोल' पर केंद्र सरकार घिर सकती है. जिससे बीजेपी के पक्ष में बना माहौल आगे खराब हो सकता है. जिससे बीजेपी समय पूर्व चुनाव कर बने-बनाए माहौल को भुनाने की कोशिश में है.

BJP को संभावित नुकसान

कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में धारा 356 के इस्तेमाल की बीजेपी को कीमत भी चुकानी पड़ सकती है. विपक्ष एक बार फिर लोकतंत्र पर चोट की बात कहते हुए मुद्दा बनाएगा, वहीं ममता बनर्जी  खुद को विक्टिम साबित कर जनता की सहानुभूति हासिल कर सकती हैं. उत्तराखंड या अरुणाचल प्रदेश की तरह अगर पश्चिम बंगाल के मामले में भी कोर्ट ने सरकार के फैसले को खारिज किया तो बीजेपी के लिए झटका होगा.

राजनीतिक विश्लेषक उर्मिलेश कहते हैं कि दलों के बीच आपसी मतभेद और तनाव के आधार पर ही राष्ट्रपति शासन के फैसले नहीं लिए जाने चाहिए. धारा 356 के इस्तेमाल से पहले विधिवत प्रशासनिक और संवैधानिक पड़ताल जरूरी है. देश में अब तक कई बार धारा 356 का सरकारों ने दुरुपयोग किया है. इससे राजनीतिक दलों का कितना हित हुआ, यह तो नहीं पता, मगर राज्यों का जरूर अहित हुआ है. उर्मिलेश इस बात से इत्तफाक जाहिर करते हैं कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी सरकार बर्खास्त होने पर विपक्ष को बीजेपी के खिलाफ एक मुद्दा मिलेगा.

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