एडवांस्ड सर्च

अगर बंगाल में लोकसभा जैसी वोटिंग हुई तो विधानसभा चुनाव में कौन मारेगा बाजी?

पश्चिम बंगाल की 42 में से बीजेपी ने 18 लोकसभा सीटों पर कब्जा कर लिया, 2014 में उनके पास सिर्फ 2 सीटें थीं. ममता के हिस्से में 34 से घटकर अब सिर्फ 22 सीटें बचीं हैं.

Advertisement
निखिल रामपाल [Edited by: समीर चटर्जी/देवांग दुबे]नई दिल्ली, 08 July 2019
अगर बंगाल में लोकसभा जैसी वोटिंग हुई तो विधानसभा चुनाव में कौन मारेगा बाजी? विधानसभा चुनाव में कौन मारेगा बाजी?

पूर्वी भारत में बीजेपी की मेहनत ने कई लोगों की आंखें खोल दी हैं. बीजेपी का कल तक बंगाल की राजनीति में नामोनिशान नहीं था वो सिर्फ पांच साल में राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी बन गई है. चुपचाप कमल छाप का नारा देकर बीजेपी ने चुपके से ममता के किले में सेंध लगा दी है.

पश्चिम बंगाल की 42 में से बीजेपी ने 18 लोकसभा सीटों पर कब्जा कर लिया, 2014 में उनके पास सिर्फ 2 सीटें थीं. ममता के हिस्से में 34 से घटकर अब सिर्फ 22 सीटें बचीं हैं.

लगातार दल बदल और जबरदस्त ध्रुवीकरण के चलते ये साफ कहा जा सकता है कि 2021 में होने वाले विधानसभा चुनाव तृणमूल के लिए आसान नहीं होने जा रहे हैं.

इंडिया टुडे डाटा इंटेलिजेंस यूनिट (DiU) के विधानसभा वार नतीजों के विश्लेषण ने पता चलता है कि अगर लोकसभा की तरह वोट पड़े तो ममता फिर से मुख्यमंत्री तो बन जाएंगी लेकिन बीजेपी भी पीछे नहीं रहेगी.

आंकड़ों का खेल

बंगाल में 42 लोकसभा सीटें हैं और सभी में 7 विधानसभा क्षेत्र, इस तरह राज्य में कुल 294 विधानसभा सीटें हैं. आंकड़े बताते हैं कि वोटिंग पैटर्न लोकसभा जैसे रहे तो तृणमूल कांग्रेस को 164 सीटें मिलेंगी. बहुमत 148 का है और ये उससे 16 सीटें ज्यादा हैं. वहीं बीजेपी को 121 सीटें मिल सकती हैं.

कांग्रेस और लेफ्ट का बहुत बुरा हाल हैं, कांग्रेस को 9 सीटें मिल सकती हैं और लेफ्ट तो शायद इस गिनती को भी न छू पाए. आंकड़ों के मुताबिक बीजेपी राज्य के उत्तर और पश्चिम की सीटें जीत रही हैं वहीं तृणमूल दक्षिण में मजबूत दिखती है.

graph_060619120350.png

कांटे की सीटें

बीजेपी ने जो 18 सीटें जीतीं हैं वहां तृणमूल दूसरे नंबर पर रही है. इनमें 7 सीटें ऐसी हैं जहां दोनों के बीच वोटों का अंतर सिर्फ 5 फीसदी या उससे कम है.

इन सात सीटों में 49 विधानसभा सीटें हैं. लोकसभा के नतीजों के आधार पर DiU ने पाया कि 20 ऐसी सीटें हैं जहां तृणमूल को बीजेपी से ज्यादा वोट मिले हैं.

वहीं तृणमूल की 22 सीटों में से 21 सीटों पर बीजेपी दूसरे नंबर पर है जबकि सिर्फ 1 मुर्शिदाबाद सीट पर कांग्रेस दूसरे पर रही. इनमें से 3 सीटें ऐसी हैं जहां तृणमूल और बीजेपी के बीच सिर्फ 5 फीसदी या उससे कम है. इनमें तीन सीटों मे 21 विधानसभा क्षेत्र हैं जिसमें 6 सीटों पर बीजेपी आगे रही.

पक्की बढ़त

14 ऐसी लोकसभा सीटें हैं जहां सभी विधानसभा क्षेत्रों में एक ही पार्टी को बढ़त मिली. इनमें 4 सीटें आसनसोल, बांकुड़ा, दार्जिलिंग और अलीपुरद्वार हैं जहां बीजेपी को सभी 28 सीटों पर बढ़त मिली.

वहीं तृणमूल 10 लोकसभा की 70 सीटों पर तृणमूल आगे रही, वो सीटें हैं जंगीपुर, रानाघाट, बशीरहाट, जयनगर, मथुरापुर, डायमंड हार्बर, जाधवपुर, उलबेरिया, तुमलुक और कांथी.

विद्यासागर कांड का असर

बंगाल में आखिर दौर में नौ सीटों पर वोट पड़े. सभी दक्षिण बंगाल की सीटें थीं और तृणमूल ने जीतीं. इत्तेफाक से विद्यासागर मूर्तिकांड इसी दौर से पहली ही घटी थी. इन 9 लोकसभा की 63 सीटों में से बीजेपी सिर्फ 5 सीट पर आगे थी जबकि तृणमूल ने 58 सीटों पर कब्जा जमाया.

जानकारों की राय

सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च के सीनियर फेलो और अशोका यूनिवर्सिटी के एसिसटेंट प्रोफेसर नीलांजन रॉय मानते हैं कि ये वोटिंग पैटर्न बदलने वाला नहीं है और शायद यही रहे.

 “ बीजेपी ने ज्यादातर ऐसी सीटें जीती हैं जहां अनुसूचित जाति और जनजाति की जनसंख्या अधिक है. ये लोग बीजेपी को अपने करीब पाते हैं.इस करीबी को तोड़ना आसान नहीं है और ये समुदाय विधानसभा चुनावों में भी बीजेपी को वोट दे सकते हैं.

वहीं दूसरी तरह राष्ट्रीय नेता और राज्य के नेतृत्व को लेकर वोटर दो राय भी रख सकते हैं. उड़ीसा इसका सीधा उदाहरण हैं लोगों ने राज्य के लिए नवीन पटनायक और केंद्र के लिए नरेंद्र मोदी को चुना. लोग काम का सम्मान करते हैं और बंगाल की जनता ममता के काम को याद करती है और अगर वो ज्यादा काम करती हैं तो इसका फायदा होगा. संभव है कि ममता फिर से सीएम चुन ली जाएं. ”

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay