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क्या वाकई मुस्लिम पर्सनल बोर्ड ने की बंटवारे की मांग? जानिए सच

तस्वीर में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के तीन सदस्यों के तौर पर मौलाना खलीलुर्रहमान सज्जाद नोमानी, मौलाना खालिद सैफुल्ला रहमानी और मौलाना उमरेन महफूज रहमानी की पहचान हुई.
क्या वाकई मुस्लिम पर्सनल बोर्ड ने की बंटवारे की मांग? जानिए सच सोशल मीडिया पर वायरल AIMPLB के सदस्य
निखिल डावर [Edited by: खुशदीप सहगल/सना जैदी]नई दिल्ली, 06 August 2018

एक दिन से कम समय में ही तीन मुस्लिम व्यक्तियों की एक तस्वीर को फेसबुक पोस्ट पर 7,000 से अधिक शेयर और करीब 800 कमेंट मिले. इस तस्वीर में एक शख्स को माइक्रोफोन पकड़े देखा जा सकता है. ये तस्वीर पर भड़काऊ शीर्षक लगाने की वजह से हुआ. इसमें लिखा था कि ‘हमें शरिया अदालत नहीं दिया जा सकता तो मुसलमानों के लिए अलग देश दिया जाए: मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड.’

तस्वीर में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के तीन सदस्यों के तौर पर मौलाना खलीलुर्रहमान सज्जाद नोमानी, मौलाना खालिद सैफुल्ला रहमानी और मौलाना उमरेन महफूज रहमानी की पहचान हुई.

इंडिया टुडे/आजतक की वायरल टेस्ट टीम ने जब फेसबुक पोस्ट की पड़ताल की तो सामने आया कि इस्लामी कानूनों की वकालत करने वाले AIMPLB  की ओर से ऐसी कोई सनसनीखेज मांग नहीं की गई है.   

वायरल टेस्ट से सामने आया कि दक्षिण-पंथी फेसबुक यूजर्स ने बोर्ड के तीन सद्स्यों की एक पुरानी तस्वीर को लेकर शरारतन भड़काऊ शीर्षक लगाया. ये ऐसे समय में किया गया जब AIMPLB ने शरिया अदालतों के देश में विस्तार के लिए अपनी योजना का ऐलान किया.

बता दें कि बोर्ड के सचिव जफरयाब जिलानी ने इंडिया टुडे को रविवार को बताया था कि देश में और दारुल कजा (शरीया अदालतों) बनाने के लिए बोर्ड 15 जुलाई को अहम बैठक करने जा रहा है.

जिलानी ने कहा, ‘1993 से देश में अनेक दारुल कजा मुस्लिमों के वैवाहिक और धार्मिक विवादों को सुलझाने का काम कर रहे हैं. इनकी अगुआई कोई काजी या इस्लामी निर्णायक करते हैं. अगर दारुल कजा की ओर से विवाद में सभी संबंधित पक्षों को स्वीकार्य समाधान नहीं निकलता तो वे चाहें तो इसे नियमित अदालतों में ले जा सकते हैं.’

इंडिया टुडे ने देश के विभाजन की मांग से जुड़ी फेसबुक पोस्टों को लेकर तथ्यों की पड़ताल के सिलसिले में दोबारा जिलानी से मुलाकात की. AIMPLB सचिव जिलानी ने सोशल मीडिया पर ऐसे सभी कंटेट को फेक न्यूज बता कर खारिज किया. जिलानी ने कहा, ‘भारतीय मुस्लिमों को बंटवारे (1947) की वजह से बहुत कुछ सहना पड़ा. हम भारत के अलावा और कहीं नहीं रहना चाहते. हम भारतीय संविधान को लेकर प्रतिबद्ध हैं.’  

जाहिर है कि AIMPLB ने मुस्लिमों के लिए अलग होमलैंड जैसी कोई मांग नहीं की है. दरअसल, एक और विभाजन की हैरान करने वाली मांग एक दिन पहले कश्मीर में एक मुफ्ती ने की थी. मुख्य धारा के किसी इस्लामी संगठन का इससे कोई लेना देना नहीं था.  

सोमवार को जम्मू और कश्मीर शरिया कोर्ट के उपाध्यक्ष और नायब मुफ्ती नसीर-उल-इस्लाम ने शरीया अदालतों के बहाने विभाजन का राग अलापा था. नसीर-उल-इस्लाम ने कहा था कि अगर बीजेपी को देश में शरिया अदालतों से समस्या है तो हमें (मुस्लिमों) अकेला छोड़ देना चाहिए.

वायरल टेस्ट में AIMPLB के सदस्यों की तस्वीर वाली फेसबुक पोस्ट की पड़ताल से साफ हुआ कि सीधे कट-पेस्ट के जरिए ये दुर्भावना फैलाने के मकसद से किया गया. दक्षिणपंथी प्रोपेगेंडा फैलाने वाले कुछ लोगों ने डिप्टी मुफ्ती नासिर-उल-इस्लाम के हैरान करने वाले बयान को सनसनी फैलाने के लिए AIMPLB से जोड़ दिया.  

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