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नेपाल सीमा विवाद को लेकर बॉर्डर पर रहने वाले बोले- जमीन हमारी है, हमारी ही रहेगी

सन 1816 में नेपाल और ब्रिटिश हुकूमत के बीच हुई सुगौली की संधि के तहत कालापानी से निकलकर बहने वाली काली नदी भारत और नेपाल का सीमांकन करती है. इस नदी के एक तरफ भारत है तो दूसरी तरफ नेपाल बसा हुआ है. लेकिन अचानक नेपाल सुगौली की संधि से मुकरकर कालापानी ही नहीं बल्कि लिपुलेख, लिम्पियाधुरा को भी अपना बताने लगा है.

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aajtak.in
दिलीप सिंह राठौड़ देहरादून, 26 May 2020
नेपाल सीमा विवाद को लेकर बॉर्डर पर रहने वाले बोले- जमीन हमारी है, हमारी ही रहेगी भारत अपनी सीमा में करवा रहा है सड़क निर्माण (फाइल फोटो)

  • बॉर्डर पर रहने वाले नेपाल के लोग भी भारत को करते हैं सपोर्ट
  • बॉर्डर पर रहने वाले भारतीय बोले- जमीन हमारी है, हमारी रहेगी

पड़ोसी देश नेपाल के साथ हाल ही में पनपे नए सीमा विवाद को लेकर उत्तराखंड में भारत-नेपाल सीमा से लगे गांव के लोगों का साफ-साफ कहना है, "जो जमीन हमारी है वो हमारी ही रहेगी". एक सड़क निर्माण के साथ भारत और नेपाल के बीच उपजा यह सीमा विवाद अब दिनों-दिन गहराता जा रहा है. नेपाल के द्वारा कालापानी और लिपुलेख क्षेत्र पर अपना दावा करने के बाद इस क्षेत्र में भारत और नेपाल के बीच तनातनी काफी बढ़ गयी है. हालांकि यहां के स्थानीय लोग नेपाल के इस रवैये को चीन की एक चाल भी बता रहे हैं.

कैलाश मानसरोवर यात्रा का पहला पड़ाव धारचूला है. धाराचूला पिथौरागढ़ से लगती भारत और नेपाल सीमा पर बसा पहला बड़ा कस्बा है. आज तक की टीम ने कालापानी और लिपुलेख तक जाने के लिए अपने सफर की शुरुआत पिथौरागढ़ के धारचूला से ही शुरू की थी. सबसे पहले आजतक ने धारचूला के और आसपास से लगे गांवों के लोगों से नेपाल की इस हरकत पर प्रतिकिया ली तो लोगों का साफ कहना था कि भले ही नेपाल से उनके काफी अच्छे रिश्ते हैं पर जहां तक जमीन की बात है वो एक भी इंच अपनी जमीन नहीं छोड़ेंगे.

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आपको बता दें कि सन 1816 में नेपाल और ब्रिटिश हुकूमत के बीच हुई सुगौली की संधि के तहत कालापानी से निकलकर बहने वाली काली नदी भारत और नेपाल का सीमांकन करती है. इस नदी के एक तरफ भारत है तो दूसरी तरफ नेपाल बसा हुआ है. लेकिन अचानक नेपाल सुगौली की संधि से मुकरकर कालापानी ही नहीं बल्कि लिपुलेख, लिम्पियाधुरा को भी अपना बताने लगा है. स्थानीय निवासी बताते हैं कि सदियों से वे लोग इन सीमाओं पर रह रहे हैं और ये जमीन हमेशा से भारत की ही रही है. लेकिन अचानक नेपाल के बदले रुख से वे भी हैरान हैं.

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भारत-नेपाल के इन इलाकों में रहने वाले लोगों के हमेशा से रोटी-बेटी के संबंध रहे हैं. यहां सीमा के दोनों तरफ बसे लोगों की जहां आपस में रिश्तेदारी है वहीं इनके बीच व्यापारिक रिश्ते भी काफी मजबूत रहे हैं. बॉर्डर पर बसे नेपाल के लोग भी नेपाल के अचानक बदले इस सुर से हैरान हैं. वे मानते हैं कि भारत हमेशा से नेपाल का हितैषी ही रहा है. इसी बात को लेकर वे लोग भी भारत को अपना पूरा समर्थन दे रहे हैं. हालांकि कालापानी और लिपुलेख विवाद से उपजी इस तनातनी से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दोनों देशों के रिश्ते में खटास जरूर दिखाई दे रही है.

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भले ही नेपाल लिपुलेख और कालापानी विवाद को उठाकर भारत को आंखें दिखा रहा हो लेकिन नेपाल ये अकड़ किसके इशारे पर दिखा रहा है ये भी पूरे देश को मालूम है. भारत-नेपाल सीमा पर रहने वाले लोग भी मानते हैं कि चीन के संरक्षण में ही नेपाल ये हरकत कर रहा है.

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