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उद्धव ठाकरे का 'सामना' में संघ प्रमुख भागवत से सवाल- 'हिन्दू आक्रामक हों, मतलब क्या करें?'

शिवसेना के मुखपत्र सामना के जरिए उद्धव ठाकरे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान की आलोचना की है जिसमें उन्होंने कहा था कि हिन्दुओं में आक्रामकता की कमी है.

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मयूरेश गणपतये [Edited by: खुशदीप सहगल/सुरेंद्र कुमार वर्मा]मुंबई, 11 September 2018
उद्धव ठाकरे का 'सामना' में संघ प्रमुख भागवत से सवाल- 'हिन्दू आक्रामक हों, मतलब क्या करें?' उद्धव ठाकरे (फाइल)

शिवसेना ने शिकागो में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के हिन्दुओं को लेकर दिए बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. शिवसेना के मुखपत्र सामना में पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने संघ प्रमुख के इस बयान पर सवाल उठाया है कि हिन्दुओं में वर्चस्व बनाने की कोई महत्वाकांक्षा नहीं है, आक्रामकता नहीं है.

भागवत ने शिकागो में कहा था कि एक समाज के रूप में हिन्दुओं को एकत्र होकर मानव जाति के कल्याण के लिए कोशिश करनी चाहिए.   

हिन्दुओं पर आरोप

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने 'सामना' के संपादकीय में भागवत के बयान पर लिखा- 'ये हिन्दुओं पर लगाया गया आरोप है. हिन्दू आक्रामक हों, मतलब क्या करें? और आक्रामक हुए हिन्दुओं को उनके ही राज में कानूनी टैंक तले कुचला जा रहा होगा तो उसके लिए संघ की झोली में कौन-सा चूरन है? हिन्दुओं की वर्चस्व बनाने की महत्वाकांक्षा थी इसलिए छत्रपति शिवाजी महाराज ने हिंदवी स्वराज्य की स्थापना की.'

'बाजीराव पेशवा ने हिंदुत्व का पताका अफगानिस्तान, पाकिस्तान से भी आगे लहराया था. तात्या टोपे और मंगल पांडे से लेकर वीर सावरकर तक कई लोगों ने हिंदू वर्चस्व के लिए ही ब्रिटिशों से संघर्ष किया. हिन्दू आक्रामक नहीं होता तो अयोध्या का बाबरी का कलंक पोंछा नहीं गया होता और ये सब-कुछ करने के पीछे शिवसेना का आक्रामक हिंदुत्व ही था.'

'1992-93 के मुंबई दंगे के समय शिवसेना का आक्रामक हिंदुत्व नहीं होता तो वैसी भयंकर स्थिति यहां के समस्त हिन्दुओं की हो गई होती? उस समय ये सब वैश्विक हिंदू कांग्रेस वाले कहां छिपे थे?'

सत्ता में आए हिन्दुओं ने क्या किया

संपादकीय मे उद्धव ठाकरे ने बीजेपी के हिन्दुत्व के एजेंडे पर भी टिप्पणी की. साथ ही बीजेपी के शिवसेना को लेकर रवैये पर भी नाराजगी दिखाई. संपादकीय में लिखा गया है- 'शिवसेना प्रमुख के मुंबई में 'दहाड़ते' ही वैष्णो देवी और अमरनाथ यात्रा निर्विघ्न संपन्न हुई और आतंकियों की हरी लुंगियां पीली हो गर्इं, लेकिन हिन्दू के रूप में जो सत्ता में आए, उन्होंने क्या किया?'

'हिंदू आक्रामक और एकजुट था इसीलिए मोदी प्रधानमंत्री बने. उस एकजुटता और आक्रामकता का क्या फल मिला? शिवसेना से जुड़ाव तोड़कर हिन्दुत्व की पीठ में खंजर भोंककर देखा और जो-जो आक्रामक हिन्दुत्व की, राष्ट्रहित की हुंकार भर रहे थे, उन्हें बीजेपी दुश्मन ठहराने लगी.'

'हिंदुत्व की सीढ़ी के सहारे सत्ता में आना और काम होते ही सीढ़ी फेंक देना, ऐसा हिन्दुत्व इन दिनों जारी है. अब सत्ता में बैठे दिखावटी हिन्दुत्ववादियों की महत्वाकांक्षा हिंदुत्व की आक्रामकता की आवाज को बंद करना है, हिन्दुओं को उनके ही हिन्दुस्थान में आतंकवादी ठहराकर खत्म करने की है. शिकागो में हिंदू कांग्रेस में भागवत ने इन विषयों पर कुछ कहा होता तो और अच्छा होता.'

हिन्दुओं का इस्तेमाल कर रही बीजेपी

उद्धव ठाकरे ने सवाल किया कि शिकागो में हुए वैश्विक हिन्दू सम्मेलन में शिवसेना या हिन्दुत्व का झंडा लेकर आगे जाने किसी और भी दल को न्योता क्यों नहीं दिया गया.

संपादकीय में लिखा गया है कि कांग्रेस ने जिस तरह मुसलमानों का इस्तेमाल किया, उसी तरह बीजेपी हिन्दुओं का इस्तेमाल कर रही है. ऐसी भावना बढ़ने लगी है और ऐसा उद्धव ठाकरे को लगता है.

संपादकीय के आखिर में उद्धव लिखते हैं- 'मौजूदा 'हिन्दुत्ववादी' शासन में हिन्दुओं की खुशामद तो छोड़िए उन्हें 'सेक्युलर' बनाया जा रहा है. कांग्रेस से कांग्रेस की ओर, देश की ऐसी यात्रा शुरू हो चुकी है.'

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