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गुलाम नबी आजाद बोले- तीन तलाक बिल के पीछे परिवार खत्म करने की धारणा

तीन तलाक के मुद्दे पर राज्यसभा में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा है कि हम तीन तलाक के खिलाफ हैं. लेकिन जो बिल है इसके पीछे वह धारणा नहीं है. इसके पीछे पूरे परिवार को खत्म करने की धारणा है.

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aajtak.in नई दिल्ली, 24 June 2019
गुलाम नबी आजाद बोले- तीन तलाक बिल के पीछे परिवार खत्म करने की धारणा कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद (फाइल फोटो)

तीन तलाक के मुद्दे पर राज्यसभा में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा है कि हम तीन तलाक के खिलाफ हैं. लेकिन जो बिल है इसके पीछे वह धारणा नहीं है. इसके पीछे पूरे परिवार को खत्म करने की धारणा है.

ट्रिपल तलाक बिल पर लगभग सभी विपक्षी पार्टियां केंद्र सरकार के रुख के खिलाफ हैं. कांग्रेस का कहना है कि यह बिल मुस्लिमों के व्यक्तिगत कानूनों में हस्तक्षेप की तरह है. कांग्रेस लंबे समय से इस ट्रिपल तलाक बिल का विरोध करती आई है. तीन तलाक पर बोलते हुए आजाद ने कहा कि तीन तलाक के हम भी खिलाफ हैं लेकिन इसके पीछ धारणा खानदान को खत्म करने की है.

आजाद ने कहा कि भगोड़े अपराधियों का कुछ पता नहीं है, बड़े-बड़े विदेश भाग गए हैं और छोटे-छोटे बीजेपी में शामिल हो रहे हैं, इससे बढ़िया आर्थिक भगोड़ा बिल कोई और हो ही नहीं सकता. आजाद ने कहा कि सरकार जम्मू कश्मीर में शांति की बात करती है, जबकि इतना खून-खराबा वहां कभी नहीं हुआ. सिविलियन से लेकर जवान लगातार वहां मर रहे हैं, जितने कभी नहीं मरे. आजाद ने कहा कि लोकसभा चुनाव और पंचायत चुनाव के शांतिपूर्ण होने का क्रेडिट ले रहे हैं तो 2 साल से विधानसभा चुनाव नहीं करा पाए उसका क्रेडिट कौन लेगा?

धर्म के हिसाब से तलाक की संख्या

समाजवादी पार्टी से रामगोपाल यादव ने कहा कि देश की सीमाएं सिकुड़ रही हैं. चीन रोज हमारी सीमा के अंदर घुसता आ रहा है. वोट के लिए सरकार पाकिस्तान को तो धमका देती है लेकिन चीन के सामने गिड़गिड़ाती है. प्रधानमंत्री चीन गए थे और फिर उनके राष्ट्रपति को साबरमती के किनारे झूला झुला रहे थे, उनसे आंख मिलाने की हिम्मत नहीं है जबकि सरकार में आने से पहले पीएम मोदी बड़ी-बड़ी बातें करते थे. जनधन खातों में 91 हजार करोड़ जमा हो गए लेकिन सरकार का एक पैसा उसमें जमा नहीं है. आयुष्मान भारत योजना अच्छी है लेकिन सरकार के पास डॉक्टर ही नहीं हैं. ऐसे में तीन तलाक पर आपका जोर है, एक बार धर्म के हिसाब से तलाकों की संख्या भी बता दीजिए, सब पता चल जाएगा.

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