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तीन तलाक पर संसद में आज पेश हो सकता है बिल, BJP सांसदों को व्हिप जारी

बुधवार को संसद में सरकार ने की ओर से कहा गया कि तीन तलाक के खिलाफ विधेयक तैयार करने में मुस्लिम संगठनों से कोई विचार-विमर्श नहीं किया गया और यह मुद्दा लैंगिक न्याय, लैंगिक समानता और महिलाओं की गरिमा की मानवीय अवधारणा से जुड़ा हुआ है जिसमें आस्था और धर्म का कोई संबंध नहीं है.

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aajtak.in
राम कृष्ण नई दिल्ली, 21 December 2017
तीन तलाक पर संसद में आज पेश हो सकता है बिल, BJP सांसदों को व्हिप जारी बीजेपी सांसदों को व्हिप जारी (फोटो फाइल)

तीन तलाक रोकने के लिए आज लोकसभा में मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक पेश हो सकता है. पिछले हफ्ते कैबिनेट ने इसे मंजूरी दी थी. सरकार ने इस बिल को पास कराने के लिए पूरी तैयारी कर ली है. बीजेपी की ओर से पार्टी के सभी सांसदों को व्हिप जारी कर इस मौके पर संसद में मौजूद रहने का आदेश दिया गया है.

इससे पहले बुधवार को संसद में सरकार की ओर से कहा गया कि तीन तलाक के खिलाफ विधेयक तैयार करने में मुस्लिम संगठनों से कोई विचार-विमर्श नहीं किया गया और यह मुद्दा लैंगिक न्याय, लैंगिक समानता और महिलाओं की गरिमा की मानवीय अवधारणा से जुड़ा हुआ है, जिसमें आस्था और धर्म का कोई संबंध नहीं है.

दरअसल, सरकार से प्रश्न पूछा गया था कि क्या उसने विधेयक का मसौदा तैयार करने में मुस्लिम संगठनों के साथ विचार-विमर्श किया है, जिसका कानून राज्य मंत्री पीपी चौधरी ने ‘ना’ में जवाब दिया.

एक अन्य प्रश्न के लिखित उत्तर में कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा, 'सरकार का मानना है कि यह मुद्दा लैंगिक न्याय, लैंगिक समानता और महिलाओं की गरिमा की मानवीय अवधारणा से जुड़ा हुआ है और इसका आस्था और धर्म से कोई संबंध नहीं है.' उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने एक बार में तीन तलाक को अवैध करार दिया, लेकिन इसके बाद भी ऐसे 66 मामले सामने आए हैं.

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बीते 15 दिसंबर को ‘मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक’ को मंजूरी दी थी. इस विधेयक में तलाक देने वाले पति के लिए तीन साल की जेल और जुर्माने का प्रावधान किया गया है.

वहीं केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने पिछले दिनों कहा था कि सरकार तीन तलाक को लेकर कानून बनाने जा रही है. हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि यह कानून किसी को परेशान करने के लिए नहीं होगा. हम मुस्लिम महिलाओं को संवैधानिक अधिकार दिलाना चाहते हैं. तीन तलाक धार्मिक मामला नहीं है, बल्कि यह एक कुरीति है.

इसके अलावा राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष सैयद गयूरुल हसन रिजवी ने कहा, 'देश की सरकार ने अल्पसंख्यकों के विकास के लिए कई कदम उठाए हैं और जमीनी स्तर पर इसका असर दिख रहा है. अल्पसंख्यकों का तुष्टीकरण नहीं होना चाहिए, बल्कि उनका सशक्तीकरण जरूरी है.

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