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सोशल मीडिया पर सबसे एक्टिव रहता है अपर क्लास, मुस्लिमों का नंबर दूसरा

सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि सोशल मीडिया पर कथित उच्च जातियों का कब्जा है. सर्वे में फेसबुक, व्हाट्सऐप, ट्विटर और इंस्टाग्राम यूजर्स को शामिल किया है. सर्वे में 5 साल के आंकड़ों को शामिल किया गया है.  

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ऐश्वर्या पालीवाल [Edited By: वरुण शैलेश]नई दिल्ली, 13 June 2019
सोशल मीडिया पर सबसे एक्टिव रहता है अपर क्लास, मुस्लिमों का नंबर दूसरा सोशल मीडिया पर सक्रिय जातियां (सांकेतिक तस्वीर)

लोकसभा चुनाव में इस बार राजनीतिक प्रतिद्वंदियों को मात देने के लिए एक लड़ाई सोशल मीडिया पर लड़ी गई. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी राफेल सौदे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'चौकीदार चोर है' से घेरने की कोशिश करते रहे. वहीं पीएम मोदी ने सोशल मीडिया के जरिये नैरेटिव को पलटकर रख दिया और अपने ट्विटर हैंडल में 'मैं भी चौकीदार' लिखा. इसके बाद सभी बीजेपी नेताओं और मंत्रियों ने अपने ट्विटर हैंडल में इसे जोड़ा, और यह जंग पूरे चुनाव तक बनी रही.

इस बीच Lokniti-CSDS का एक ताजा सर्वे समाने आया है. इसमें सोशल मीडिया को लेकर कई चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं. सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि सोशल मीडिया पर कथित उच्च जातियों का कब्जा है. सर्वे में फेसबुक, व्हाट्सऐप, ट्विटर और इंस्टाग्राम यूजर्स को शामिल किया है. सर्वे में 5 साल के आंकड़ों को शामिल किया गया है.   

सर्वे की मजेदार बात यह है कि भारत के कई स्थानों की तरह सोशल मीडिया पर भी उच्च जातियों का वर्चस्व बरकरार है. आंकड़ों के मुताबिक दलित और आदिवासियों के मुकाबले अपर कास्ट सोशल मीडिया पर दोगुना प्रभाव रखता है.

अपर क्लास के 15% लोग सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं, जबकि दलितों और आदिवासियों का ये आंकड़ा क्रमशः 8 और 7 फीसदी है. नौ फीसदी अन्य पिछड़ी वर्ग (OBC) के सदस्य सोशल मीडिया का प्रयोग करते हैं. इस हिसाब से सोशल मीडिया पर दलितों और आदिवासियों से OBC ज्यादा सक्रिय है, लेकिन वो अब भी अपर कास्ट से पीछे है.

दूसरी तरफ, जो लोग सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं करते हैं, समाज-दर-समाज इनमें बड़ी खाई देखने को मिली. जहां 75 फीसदी आदिवासी और 71 फीसदी दलित सोशल मीडिया का यूज नहीं करते हैं वहीं वर्चस्वशाली जातियां में इनकी संख्या 54 फीसदी है. 

सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर मुसलमान मुखर

मुसलमान, जिसका बड़ा तबका शैक्षिक और आर्थिक तौर पर दलित और आदिवासी समुदाय से पीछे बताया जाता है, वो सोशल मीडिया पर ज्यादा मुखर है. भारत में अपर कास्ट हिंदू के बाद अल्पसंख्य समुदाय के लोग ही सोशल मीडिया का सबसे ज्यादा जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं. सोशल मीडिया पर मुखर होने के मामले में अल्पसंख्य समुदाय के लोग हिंदू ओबीसी से भी आगे हैं.

अगर हम व्यक्तिगत तौर पर देखें तो अपर कास्ट के बाद मुस्लिमों के सक्रिय होने का यह पैटर्न सभी सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर एक समान कामय है. अपर कास्ट हिंदू के बाद मुस्लिम ही सबसे ज्यादा सभी सोशल मीडिया प्लेटफार्म का यूज करता है.  

आंकड़े बताते हैं कि अन्य समुदायों के मुकाबले उच्च जातियों के लोग फेसबुक, व्हाट्सऐप, यूट्यूब, ट्विटर और इस्टाग्राम पर सबसे ज्यादा एक्टिव हैं. यह पैटर्न पिछले पांच साल से लगातार चला आ रहा है. वहीं मुस्लिम दूसरे स्थान पर हैं जबकि इसके बाद दलित और आदिवासियों की बारी आती है.

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