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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा, क्यों ना पशु-पक्षियों पर अत्याचार के लिए और कड़े कानून बने?

एंजेल ट्रस्‍ट नाम की एक संस्‍था की ओर से याचिका दायर में कहा गया है कि मौजूदा समय में पशु क्रूरता अधिनियम-1960 के तहत सजा के प्रावधान बेहद हल्‍के हैं. पशुओं पर अत्‍याचार करने के मामलों में बेहद कम सजा और जुर्माने का प्रावधान है. जिससे पशुओं पर अत्‍याचार के मामलों में कमी आने की बजाए इजाफा हो रहा है.

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aajtak.in
अहमद अजीम / रोहित गुप्ता नई दिल्ली, 12 May 2016
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा, क्यों ना पशु-पक्षियों पर अत्याचार के लिए और कड़े कानून बने?

सुप्रीम कोर्ट ने पशु-पक्षियों पर होने वाले अत्‍याचार को रोकने संबंधी उपायों को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए गुरुवार को केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है. जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्‍यक्षता वाली बेंच ने केंद्र को चार सप्‍ताह के भीतर अपना जवाब दायर करने को कहा है.

एंजेल ट्रस्‍ट नाम की एक संस्‍था की ओर से याचिका दायर में कहा गया है कि मौजूदा समय में पशु क्रूरता अधिनियम-1960 के तहत सजा के प्रावधान बेहद हल्‍के हैं. पशुओं पर अत्‍याचार करने के मामलों में बेहद कम सजा और जुर्माने का प्रावधान है. जिससे पशुओं पर अत्‍याचार के मामलों में कमी आने की बजाए इजाफा हो रहा है. हल्‍की सजा से लोगों के मन में पशु अत्‍याचार के प्रति डर नहीं है. ऐसे में पशुओं पर अत्‍याचार के मामलों में कड़ी सजा दिए जाने के प्रावधान तय किए जाने चाहिए ताकि लोग पशुओं पर अत्‍याचार न करें. इसके लिए केंद्र सरकार को निर्देश जारी किए जाएं.

कुत्ते के बच्चे को मारने पर सिर्फ 50 रुपये जुर्माना
याचिका में उदाहरण दिया गया है की पशु क्रूरता अधिनियम-1960 के तहत कुत्ते के बच्चे को मारने के लिए महज 50 रुपये जुर्माने का प्रावधान है, जेल की सजा का कोई प्रावधान नहीं. एक स्टडी का हवाला देते हुए याचिका में कहा गया है कि‍ जो लोग पशुओं पर अत्याचार करते हैं वो अक्सर आगे चल कर महिलाओं और बच्चों पर भी अत्याचार करते हैं.

गर्म चाकू से काटी जाती है पक्ष‍ियों की चोंच
याचिका में पेट शॉप में पशु-पक्षियों पर होने वाले अमानवीय सुलूक का भी जिक्र किया गया है. पक्षियों की चोंच बिना उन्हें बेहोश किए गर्म चाकू से कतरी जाती है, परों को कतरा जाता है और बिना बेहोश किए पशुओं के नाखून निकाल दिए जाते हैं. याचिका में कहा गया है की इस तरह के अत्याचार को देखते हुए कड़े कानून बनाने की जरूरत है. चार हफ्ते बाद इस मामले पर अगली सुनवाई होगी.

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