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SC/ST एक्ट में बदलाव पर SC का नोटिस, केंद्र से 6 हफ्ते में जवाब तलब

सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी कानून में खामियों की ओर सरकार का ध्यान दिलाया था लेकिन वोट बैंक की राजनीति में केंद्र ने कानून में संशोधन कर सवर्णों और ओबीसी वर्ग को नाराज कर दिया. अब सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका डाल कर संशोधित कानून पर गौर करने की गुहार लगाई गई है.

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संजय शर्मा [Edited by: रविकांत सिंह ]नई दिल्ली, 07 September 2018
SC/ST एक्ट में बदलाव पर SC का नोटिस, केंद्र से 6 हफ्ते में जवाब तलब सुप्रीम कोर्ट की फाइल तस्वीर

एससी/एसटी कानून का मामला फिर सुप्रीम कोर्ट के पाले पहुंच गया है. इस बार मामला पिछले से कुछ अलग है. कानून में संशोधन वाला जो विधेयक केंद्र सरकार ने पारित किया है, उस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की मोदी सरकार को नोटिस जारी करते हुए 6 हफ्ते में जवाब-तलब किया है.

सुप्रीम कोर्ट अब एससी/एक्ट एक्ट में केंद्र की ओर से किए गए संशोधन पर गौर करेगा और उसके निहितार्थ समझेगा. इस मामले में वकील पृथ्वी राज चौहान और प्रिया शर्मा ने याचिका दाखिल की है जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से 6 हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है.

ये है संशोधित कानून

एससी/एसटी संशोधन में नए प्रावधान 18ए के लागू होने से दलितों को सताने के मामले में तत्काल गिरफ्तारी होगी और अग्रिम जमानत भी नहीं मिल पाएगी. याचिका में इसी प्रावधान पर एतराज जताया गया है. साथ ही, संशोधित कानून को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है. एससी/एसटी संशोधन कानून 2018 को लोकसभा और राज्यसभा ने पास कर दिया था और इसे अब अधिसूचित भी कर दिया गया है.

संशोधित कानून के तहत मामला दर्ज होते ही गिरफ्तारी होगी और आरोपी को अग्रिम जमानत नहीं मिल सकेगी. आरोपी अगर हाईकोर्ट में गुहार लगाए तभी उसे नियमित जमानत मिलने का प्रावधान है. मामले की छानबीन इंस्पेक्टर रैंक के पुलिस अधिकारी ही कर सकेंगे. अगर किसी ने दलितों के खिलाफ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया, तो फौरन मामला दर्ज होगा. ऐसे मामले की सुनवाई सिर्फ विशेष अदालत में होगी.

सरकार की उलटबांसी!

दूसरी ओर, एससी/एसटी एक्ट के खिलाफ गुरुवार को हुए प्रदर्शन पर केंद्र सरकार ने कहा कि वह इस कानून का दुरुपयोग नहीं होने देगी. केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री रामदास अठावले ने शुक्रवार को कहा कि सरकार किसी दबाव में एससी/एसटी एक्ट में बदलाव नहीं करेगी लेकिन हम यह वादा करते हैं कि इसका कोई बेजा इस्तेमाल नहीं होने देंगे. उन्होंने यह भी कहा कि इस एक्ट में बदलाव की मांग करने की बजाय सवर्णों को खुद को बदलना चाहिए.

रामदास अठावले ने कहा, 'यह कानून दलितों पर होने वाले हमलों को रोकने के लिए है. अगर दलितों पर हमले होंगे तो उससे बचाव के लिए कोई कानून होना ही चाहिए. ऐसे लोग जो इस कानून का विरोध कर रहे हैं हम उनके साथ बैठकर बातचीत करना चाहते हैं. हम समझाने की कोशिश करेंगे.'

उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम में बदलाव की मांग करने वालों को दलितों को लेकर अपने व्यवहार में बदलाव लाना चाहिए और उनसे अच्छे से पेश आना चाहिए. मंत्री ने कहा कि दलितों को और सवर्णों को मिलकर रहना होगा. खेत-खलिहान मजदूरों के साथ चलना होगा. अगर दलितों पर हमले नहीं होंगे तो यह कानून सवर्णों पर नहीं लगेगा. एससी/एसटी एक्ट के दुरुपयोग के मामले अभी तक बहुत ही कम सामने आए हैं.

क्या था सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने मौजूदा दलित कानून में बदलाव करते हुए कहा था कि किसी की फौरन गिरफ्तारी नहीं की जाएगी. साथ ही, शिकायत मिलने पर तुरंत केस भी दर्ज नहीं होगा. शीर्ष अदालत ने कहा था कि शिकायत मिलने के बाद डीएसपी स्तर के पुलिस अधिकारी ही शुरुआती जांच करेंगे और यह जांच सात दिन से ज्यादा समय तक नहीं चलनी चाहिए. डीएसपी स्तर के अधिकारी तय करेंगे कि मामला आगे चलाने लायक है या नहीं. सुप्रीम कोर्ट ने गलत और फर्जी मुकदमों की ओर सरकार का ध्यान खींचा था.

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