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SEZ संशोधन विधेयक 2019 से मिलेगी रोजगार और अर्थव्यवस्था को संजीवनी

विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) में खाली पड़ी जमीनों के इस्तेमाल के अलावा, बिजनेस ट्रस्ट, पोर्ट ट्रस्ट और दूसरे ऐसे ट्रस्ट जो व्यापक तौर पर आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय हैं, इस विधेयक के प्रमुख लाभार्थी होंगे.

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aajtak.in
प्रसन्ना मोहंती नई दिल्ली, 05 July 2019
SEZ संशोधन विधेयक 2019 से मिलेगी रोजगार और अर्थव्यवस्था को संजीवनी केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल (फाइल फोटो- IANS)

विशेष आर्थिक क्षेत्र (संशोधन) विधेयक 2019 पिछले हफ्ते संसद में पास हो गया. यह विधेयक इस बात की इजाजत देता है कि कोई 'ट्रस्ट या कोई संस्था' विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) में अपनी इकाई स्थापित कर सकती है. इसका मकसद निवेश बढ़ाना, व्यापक आर्थिक गतिविधियों के जरिए रोजगार बढ़ाना ओर बुनियादी ढांचा क्षेत्र में सुधार लाना है.

क्या कहता है संशोधन?

यह विधेयक मार्च, 2019 के उस अध्यादेश की जगह लाया गया है जिसके जरिए 2005 के SEZ एक्ट में संशोधन करके दो श्रेणियां जोड़ी गई थीं- ‘ट्रस्ट या कोई संस्था, अथवा केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित’. अब ये दो श्रेणियां भी उन संस्थाओं में शामिल हैं जो विशेष आर्थिक क्षेत्र में इकाई लगाने की योग्यता रखती हैं.

ऐसा मूल कानून में उल्लेखित उस व्याख्या में संशोधन करके किया गया जिसमें विशेष आर्थिक क्षेत्र में इकाई लगाने की अनुमति के लिए किसी 'व्यक्ति' की योग्यता निर्धारित की गई है.

इसके मुताबिक, कोई 'व्यक्ति' चाहे भारतीय हो या भारत से बाहर का हो, कोऑपरेटिव सो​साइटी, कंपनी जो कि चाहे भारतीय हो या भारत से बाहर की हो, फर्म, स्था​नीय निकाय या एजेंसी, निजी स्वामित्व वाले आफिस या ब्रांच, एसोसिएशन आदि इसके लिए योग्य हैं.

विधेयक कहता है कि ट्रस्ट SEZ में इकाई लगाने की योग्यता रखते हैं, इसके अलावा अगर जरूरत हो तो बिना कानून में संशोधन किए दूसरी इकाइयों को भी सरकारी अधिसूचना के जरिए जोड़ा जा सकता है.

निवेश और रोजगार को संजीवनी

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने विधेयक पर चर्चा के दौरान राज्यसभा में बताया कि सरकार को प्रतिष्ठित कंपनियों के आठ ट्रस्टों के आवेदन मिले हैं जिनका कुल निवेश 8000 करोड़ है. हालांकि, ये किस तरह के ​ट्रस्ट हैं, इनकी आर्थिक गतिविधियां क्या हैं, यह स्पष्ट नहीं है.

विपक्ष ने संशोधन को लेकर संदेह व्यक्त किया तो गोयल ने सदन को बताया कि मार्च, 2019 तक SEZ से 20 लाख नौकरियां उत्पन्न हुई हैं, 5 लाख करोड़ का निवेश आया है और सात लाख करोड़ का निर्यात हुआ है.

ट्रस्ट की बढ़ती संभावनाएं

ट्रस्ट मामलों के विशेषज्ञ और दिल्ली के चार्टर अकाउंटेंट जगदीप गौतम के मुताबिक, इस विधेयक ने सभी तरह के ट्रस्ट के लिए संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं ताकि उन्हें विशेष आर्थिक क्षेत्र से चलाया जा सके. ये ट्रस्ट ​स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल और जीविका संबंधी गतिविधियों से लेकर उत्पादन या फाइनेंस से संबंधित हो सकते हैं.

SEZ मामलों के जानकार और वकील विष्णु जैन उदाहरण देकर समझाते हैं कि कैसे यह संशोधन निर्यात को बढ़ाएगा. वे कहते हैं कि जैसे बाबा रामदेव का पतं​जलि योगपीठ एक ट्रस्ट है जो हरिद्वार से चलता है. अब यह विशाखापट्टनम SEZ से चलाया जा सकता है और आयुर्वेदिक दवाइयां, कॉस्मेटिक्स, फूड प्रोडक्ट्स आदि अपने उत्पादों को पोर्ट सुविधाओं की मदद से बाहर भेज सकता है.

'बिजनेस ट्रस्ट' को प्रोत्साहन

बिजनेस ट्रस्ट भारत में 2014 से वजूद में आए हैं. सक्षम लाभार्थी की दृष्टि से देखें तो बिजनेस ट्रस्ट काफी अहम हैं. बिजनेस ट्रस्ट को इनकम टैक्स एक्ट के तहत व्याख्यायित किया गया है. बिजनेस ट्रस्ट निम्नलिखित प्रकार के हो सकते हैं- इंफ्रास्ट्रक्चर इनवेस्टमेंट ट्रस्ट, रीयल एस्टेट इनवेस्टमेंट ट्रस्ट, ऐसी इकाइयां जिन्हें स्टॉक एक्सचेंज से मान्यता प्राप्त है और जिन्हें अधिसूचित किए जाने की जरूरत है अथवा जिन्हें सरकार ने अधिसूचित किया हो.

ये ऐसे ट्रस्ट हैं जो म्यूचुअल फंड की तरह रीयल एस्टेट और बुनियादी ढांचे से संबंधित परियोजनाओं से सीधे पैसा उठाते हैं. ये बुनियादी ढांचे के विकास के लिए प्राइवेट सेक्टर से वित्तीय संसाधन जुटाते हैं. हालांकि, भारत में फिलहाल यह अपने शुरुआती दौर में है.

गौतम कहते हैं कि सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड आफ इंडिया ने बिजनेस ट्रस्ट को SEZ से चलाने की अनुमति 2016 में दी थी. SEZ एक्ट 2005 में मौजूदा संशोधन से राह और आसान हो जाएगी.

वित्तीय क्षेत्र में ट्रस्ट कार्यकारी निकाय के रूप में बेहद आम हैं, इसलिए इस संशोधन से ट्रस्ट ही इसके सबसे बड़े लाभार्थी हो सकते हैं.

SEZ में खाली जमीन का इस्तेमाल

यह संशोधन SEZ में खाली जगहों के उपयोग को भी बढ़ावा देगा. वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अनुसार, 40 फीसदी अधिसूचित SEZ निष्क्रिय पड़े हैं और SEZ के लिए अधिसूचित जमीनों में 50 फीसदी से ज्यादा जमीनें खाली पड़ी हैं.

राज्यसभा में दिए अपने जवाब में मंत्री ने बताया कि अगस्त, 2018 तक अधिसूचित 373 SEZ में से 150 निष्क्रिय हैं और 45,711.64 हेक्टेयर (457 वर्ग किमी.) अधिसूचित इलाके में से 23,779.19 हेक्टेयर (237.8 वर्ग किमी.) जमीन खाली पड़ी है.

SEZ में ट्रस्ट को इकाइयां स्थापित करने अनुमति देने से खाली पड़ी जमीनों का रचनात्मक उपयोग किया जा सकेगा.

SEZ ने अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. जैसा कि विधेयक पेश करते हुए पीयूष गोयल ने राज्यसभा में बताया कि SEZ से देश में 20 लाख नौकरियां पैदा हुई हैं और 5 लाख करोड़ का निवेश आया है. अब इस विधेयक से इसका दायरा और व्यापक हो जाने के कारण निवेश और रोजगार दोनों को बढ़ावा मिलेगा.

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