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फोन या सोशल मीडिया पर मिले रेप की धमकी, तो ऐसे सिखाएं सबक

अगर किसी महिला या लड़की को कोई शख्स फोन करके या मैसेज करके या फिर सोशल मीडिया के जरिए रेप करने की धमकी देता है, तो यह अपराध है. आईपीसी और आईटी एक्ट का सहारा लेकर ऐसे अपराधी को सबक सिखाया जा सकता है. अगर किसी को ऐसी धमकी मिल रही है, तो वो क्या कानूनी कदम उठाए....जानने के लिए पढ़िए पूरी खबर.

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aajtak.in
राम कृष्ण नई दिल्ली, 11 July 2019
फोन या सोशल मीडिया पर मिले रेप की धमकी, तो ऐसे सिखाएं सबक सांकेतिक तस्वीर

कई बार महिलाओं और लड़कियों को सोशल मीडिया या फोन पर रेप करने या यौन हिंसा की धमकी दी जाती है. हालांकि कानून की जानकारी के अभाव में पीड़िता इसको बर्दाश्त करती रहती है और अपराधी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर पाती हैं.

ताजा मामला राजस्थान यूनिवर्सिटी का है, जहां पर करीब 150 महिला प्रोफेसरों को गुमनाम नंबर से फोन करके रेप की धमकी दी गई. हालांकि इस पर पुलिस ने केस दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है. फिलहाल इस मामले में किसी की गिरफ्तारी की सूचना नहीं है.

अगर कोई महिला या लड़की ऐसी किसी तरह की समस्या का सामना कर रही है, तो कानून का सहारा लेकर अपराधियों को सबक सिखा सकती है. इसके लिए क्या कानूनी कार्रवाई की जाए और क्या प्रावधान है.....आइए हम आपको विस्तार से बताते हैं.......

आईपीसी के तहत दर्ज कराएं शिकायत

सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट आदित्य सिंह के मुताबिक अगर कोई फोन करके या मैसेज करके या फिर सोशल मीडिया पर किसी महिला या लड़की को रेप या यौन हिंसा की धमकी देता है, तो यह अपराध है. इसके लिए भारतीय दंड सहिंता यानी आईपीसी की धारा 354A, 506 और 509 के तहत पुलिस में शिकायत की जा सकती है. इसके साथ ही इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट यानी आईटी एक्ट 2000 की धारा 67 के तहत भी मामला दर्ज कराया जाता है.

अगर पीड़ित महिला अपराधी को जानती है, तो उसके नाम यह केस दर्ज किया जाएगा. यदि अपराधी की पहचान नहीं हो पाई है, तो अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा. इसके बाद पुलिस मामले की जांच करेगी और आरोपी को गिरफ्तार करके जेल भेजेगी.

क्या है सजा का प्रावधान

सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट आदित्य सिंह का कहना है कि ऐसे अपराधी को आईपीसी की धारा 354A के तहत 3 वर्ष के कठोर कारावास की सजा और जुर्माना हो सकती है. इसके साथ ही आईपीसी की धारा 506 के तहत 2 वर्ष की सजा और 509 के तहत 3 वर्ष की सजा व जुर्माना दोनों का प्रावधान है.

एडवोकेट आदित्य सिंह ने बताया कि ऐसे मामलों में आईटी एक्ट 2000 की धारा 67 के तहत भी अपराधी को सजा मिलती है. इस धारा के तहत पहली बार ऐसा अपराध करने पर 3 साल की सजा और पांच लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है, जबकि दोबारा ऐसा अपराध करने पर 5 साल की जेल और 10 लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान है.

महिला आयोग में भी करें शिकायत

महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ होने वाले वाले अपराधों की शिकायत महिला आयोग में भी की जा सकती है. इसके बाद महिला आयोग पीड़िता की सहायता के लिए सामने आता है और अपराधी को सजा दिलाने की कोशिश करता है.

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