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पंजाब के पूर्व CM बेअंत सिंह के हत्यारे बलवंत सिंह राजोआना को मिल सकती है रिहाई

पंजाब के पूर्व CM बेअंत सिंह की हत्या के मामले में सजायाफ्ता बलवंत सिंह राजोआना गुरुनानक देवजी के 550वें प्रकाश पर्व के मौके पर जेल से रिहा हो सकता है. पंजाब सरकार ने राजोआना समेत 8 कैदियों को इंसानियत के आधार पर रिहा करने की मांग की थी.

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aajtak.in
सतेंदर चौहान नई दिल्ली, 12 November 2019
पंजाब के पूर्व CM बेअंत सिंह के हत्यारे बलवंत सिंह राजोआना को मिल सकती है रिहाई सफेद कुर्ते में बेअंत सिंह का हत्यारा बलवंत सिंह राजोआना. (फाइल फोटोः गेटी)

  • गुरुनानक देवजी के 550वें प्रकाश पर्व पर मौके पर
  • राजोआना समेत 8 अन्य कैदियों की होगी रिहाई!

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या मामले में सजायाफ्ता बलवंत सिंह राजोआना गुरुनानक देवजी के 550वें प्रकाश पर्व के मौके पर पटियाला जेल से रिहा हो सकता है. पंजाब सरकार ने राजोआना समेत 8 कैदियों को इंसानियत के आधार पर जेल से रिहा करने की मांग की थी. इस मांग को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मान लिया है. माना जा रहा है कि मंगलवार शाम यानी आज या बुधवार तक बलवंत सिंह राजोआना को पटियाला जेल से रिहा किया जा सकता है.

बलवंत सिंह राजोआना की रिहाई के लिए कई सिख संगठन, अकाली दल और सिख राजनेता पिछले कई सालों से लगातार मांग उठा रहे थे. इस मामले में बलवंत सिंह राजोआना को माफी देने के लिए एसजीपीसी की ओर से याचिका पंजाब और केंद्र सरकार को भेजी गई थी. पूर्व सीएम बेअंत सिंह को पंजाब से आतंकवाद को खत्म करने का श्रेय दिया जाता है. 31 अगस्त, 1995 को चंडीगढ़ में सिविल सचिवालय के बाहर एक विस्फोट में बेअंत सिंह की मौत हो गई थी. इस हमले में 16 अन्य लोगों की भी मौत हुई थी.

पंजाब पुलिस का कर्मचारी बना था मानव बम

बेअंत सिंह को मारने के लिए किए गए विस्फोट में पंजाब पुलिस का कर्मचारी दिलावर सिंह मानव बम बना था. जबकि, बलवंत सिंह राजोआना ने इस पूरी घटना की साजिश रची थी. राजोआना को इसका दोषी पाया गया था. राजोआना दिलावर के असफल होने पर बैकअप की भूमिका में था. राजोआना ने अपने बचाव में कोई वकील नहीं किया था. न ही उसने फांसी की सजा माफ करने की अपील की थी.

केंद्र सरकार ने राजोआना की फांसी पर लगा दी थी रोक

पंजाब में कई सिख संगठन, अकाली दल और सिख नेता पिछले कई सालों से राजोआना की रिहाई के लिए लगातार मांग उठा रहे थे. राजोआना की फांसी 31 मार्च, 2012 को तय की गई थी लेकिन बाद में केंद्र सरकार ने इस पर रोक लगा दी थी. वहीं, पिछले महीने केंद्रीय गृह मंत्रालय की उसकी फांसी को उम्रकैद में बदल दिया था.

पंजाब-हरियाणा की राजनीति पर पड़ सकता है असर

केंद्र सरकार का यह फैसला इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि भाजपा ने लोकसभा चुनाव के बाद पंजाब में सीटों के रूप में अपना हिस्सा बढ़ाने की मांग की थी. अभी इस पर फैसला बाकी है. हरियाणा में 10 फीसदी से ज्यादा सिखों की आबादी है. निश्चित रूप से एनडीए सरकार का यह फैसला सिख वोट बैंक पर प्रभाव डालेगा.

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