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बीरभूम गैंगरेप मामले पर भी राजनीति शुरू

पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में एक आदिवासी लड़की के साथ गैंगरेप के मामले पर अब सियासत शुरू हो गई है. राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर चौतरफा हमला हो रहे हैं.

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aajtak.in
मनोग्या लोइवा [Edited By: पंकज विजय]कोलकाता, 25 January 2014
बीरभूम गैंगरेप मामले पर भी राजनीति शुरू बीरभूम गैंगरेप के आरोपी

पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में एक आदिवासी लड़की के साथ गैंगरेप के मामले पर अब सियासत शुरू हो गई है. राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर चौतरफा हमला हो रहे हैं.

गौरतलब है कि बीरभूम जिले में एक पंचायत (कंगारू कोर्ट) ने दूसरी जाति के लड़के से प्रेम करने की सजा के तौर पर लड़की के साथ गैंगरेप का आदेश दिया था. बुधवार को गैंगरेप की वारदात के बाद पीड़ित ने पुलिस को 13 आरोपियों के नाम बताए थे, जिन्हें पुलिस ने गिरफ्तार करके कोर्ट में पेश किया. मीडिया में खबर आने के बाद इस घटना पर बवाल खड़ा हो गया था और पीड़िता के इंसाफ के लिए हर तरफ से मांग होने लगी थी. कोर्ट ने सभी को 6 फरवरी तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में एक लड़की के साथ गैंगरेप के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने खुद संज्ञान लेते हुए जिला जज से रिपोर्ट मांगी है. सुप्रीम कोर्ट ने जिला जज से कहा है कि वह घटनास्थल पर जाकर इस मामले की जांच करे और एक हफ्ते के भीतर अपनी रिपोर्ट दे.

हालांकि ममता बनर्जी ने मामले में उपयुक्त कार्रवाई ना करने के कारण संबंधित थाने के एसपी का तबादला कर दिया है लेकिन उन पर तमाम विपक्षा दल जमकर निशाना साध रहे हैं. कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा, 'एसपी का तबादला सिर्फ ये दिखाने के लिए किया गया है कि ममता सरकार मामले में तेज से काम कर रही है. हम कहीं भी जाते थे तो खुद को बंगाली कहने में गर्वान्वित महसूस करते थे लेकिन अब ऐसा महसूस नहीं होता. हमारी संस्कृति की देश में बहुत प्रतिष्ठा थी लेकिन अब वह नहीं रही. सुरक्षा देने में असमर्थ इस राज्य सरकार के खिलाफ जनआंदोलन चलना चाहिए.

सीपीएम नेता रबिन देव ने कहा, 'ये बहुत शर्मनाक घटना है. राज्य सरकार महिलाओं को सुरक्षा नहीं दे पा रही है. असामाजिक तत्वों को टीएमसी समर्थन देती रही है. 6 नवंबर, 2011 को मुख्यमंत्री ने खुद भवानीपुर जाकर पुलिस स्टेशन से आपराधियों को हिरासत से मुक्त करवाया था.'

बीजेपी नेता वरुण गांधी ने कहा कि ये बहुद दुखद है कि मुख्यमंत्री खुद महिला हैं फिर भी वह इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रही हैं. उन्होंने पीड़िता को 1 लाख रुपये देने का ऐलान किया है. ये बहुत शर्मनाक है कि इस बर्बर अपराध के लिए कैसे इस तरह से मुआवजा देकर निपटा जा सकता है.

सीपीएम नेता वृंदा करात ने कहा है कि पश्चिम बंगाल में महिला को निशाना बनाया जा रहा है. ममता सरकार में अपराधियों को बचाया जा रहा है. वहां उनका इस्तेमाल आतंक फैलाने के लिए किया जा रहा है.

मशहूर पेंटर समीर आइच ने कहा, 'मुझे पता लगा है कि आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टीमें भेजी हैं. ये बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना है. ये साफ है कि आगामी लोकसभा चुनावों में कांग्रेस और टीएमसी में कोई गठबंधन नहीं होगा. पिछले दो सालों में पश्चिम बंगाल में बहुत से जघन्य अपराध हुए हैं. पुलिस भी इस आपराधिक मामलों में कार्रवाई करने के लिए अनिच्छुक नजर आती है. लगता है राज्य सरकार ने इन्हें कार्रवाई ना करने के लिए निर्देश दे रखे हैं. नहीं तो पुलिस की इतनी हिम्मत नहीं है कि वह इन संगीन मामलों में एक्शन ना लें. पुलिस जनता के लिए नहीं नेताओं के लिए हो गई है.

सामाजिक कार्यकर्ता निलंजना चक्रवर्ती ने कहा कि हम किस तरह के समाज में रह रहे हैं. अब वक्त आ गया है कि इस तरह के सिस्टम के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए और उसे खत्म किया जाना चाहिए. इन गांवों को शहरों के साथ जोड़ा जाना चाहिए ताकि वहां तक कानून की पहुंच बन सके. पुलिस बल की संख्या भी बढ़ाए जाने की जरूरत है.

 

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