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अर्द्धसैनिक बलों के जवानों को सेना जैसी सुविधाएं देने की संसदीय समिति ने की सिफारिश

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल और आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियों पर संसद में पेश गृह मंत्रालय की अनुमान समिति की रिपोर्ट में इस बात की सिफारिश की गई है. इस समिति के अध्यक्ष बीजेपी सांसद डॉ. मुरली मनोहर जोशी थे.

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दिनेश अग्रहरि/ मंजीत सिंह नेगी नई दिल्ली, 19 March 2018
अर्द्धसैनिक बलों के जवानों को सेना जैसी सुविधाएं देने की संसदीय समिति ने की सिफारिश अर्द्धसैनिक बलों के जवानों को होगा फायदा

सीमा पर तैनात पैरा मिलिट्री फोर्सेज यानी अर्द्धसैनिक बलों के कर्मियों को भी सैन्य कर्मियों जैसी सुविधाएं मिल सकती हैं. इससे करीब 10 लाख जवानों को फायदा हो सकता है.

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल और आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियों पर संसद में पेश गृह मंत्रालय की अनुमान समिति की रिपोर्ट में इस बात की सिफारिश की गई है. इस समिति के अध्यक्ष बीजेपी सांसद डॉ. मुरली मनोहर जोशी थे.

गौरतलब है कि पिछले साल बीएसएफ के जवान तेज बहादुर ने खराब खाने की पोल खोलने वाला एक वीडियो जारी किया था, जिसके बाद उसे तेज नौकरी से निकाल दिया गया था. समिति ने सुझाव दिया है कि सीमा पर तैनाती के समय अर्द्धसैनिक बलों के कर्मियों को भी उसी तरह के कपड़े, खाना और अन्य सुविधाएं दी जाएं, जैसे कि सैन्य कर्मियों को दी जाती हैं.

बीएसएफ मामले पर चिंता

समि‍ति ने इस बारे में चिंता जताई है कि हाल में सोशल मीडिया पर खासकर बीएसएफ में खाने की खराब क्वालिटी को लेकर कई तरह की विपरीत बातें प्रसारित हुई हैं. समिति ने जवानों को मिलने वाले खाने की गुणवत्ता को लेकर गृह मंत्रालय और अर्द्धसैनिक बलों के उच्चाधिकारियों से जानकारी भी मांगी, लेकिन उसे संतोषजनक जवाब नहीं मिला.

समिति ने यह तय राय रखी है कि अर्द्धसैनिक बलों के जवानों को अच्छी गुणवत्ता का खाना देना न केवल उनको स्वस्थ और फिट रखने के लिए जरूरी है, बल्कि इससे उनका मनोबल भी बढ़ता है. इसलिए समिति ने यह सुझाव दिया है कि ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिससे अर्द्धसैनिक बलों के जवानों को आपूर्ति होने वाले खाने-पीने के सामान का  स्रोत पर ही परीक्षण हो जाए और इनके न्यूट्रिशनल वैल्यू, हाइजीन, उपभोग के लिए कितना सही है आदि की लेबलिंग कर यह बताया जाए कि सामान टेस्टेड और सर्टिफाइड है.

समिति ने सुझाव दिया है कि अर्द्धसैनिक बल इसके लिए ऑर्डिनेंस कारखानों और डीआरडीओ की मदद ले सकते हैं. इसके अलावा पर्वतीय और दुर्गम इलाकों में पैक्ड फूड की आपूर्ति की जा सकती है.

भत्तों पर लगने वाले टैक्स पर उठाए सवाल

समिति ने इस बात पर भी गौर किया है कि अर्द्धसैनिक बलों के कर्मियों को राशनिंग अलाउंस जैसे जो तमाम भत्ते दिए जाते हैं, उन पर टैक्स लगाया जाता है. समिति ने इसके खिलाफ राय जाहिर की है. समिति का कहना है कि अर्द्धसैनिक बलों को अपनी कामकाजी जरूरत के लिए मिलने वाले भत्तों पर टैक्स नहीं लगाना चाहिए.

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