एडवांस्ड सर्च

Opinion: जनता से सीधे संवाद ने मोदी को यहां तक पहुंचाया

मणिनगर से रायसीना हिल्स की दूरी लगभग 1,000 किलोमीटर है लेकिन यहां तक पहुंचने में नरेन्द्र मोदी को आठ महीने, 430 रैलियों और तीन लाख किलोमीटर का थका देने वाला सफर तय करना पड़ा. देश का कोई कोना ऐसा नहीं बचा जहां नरेन्द्र मोदी की आवाज़ न गूंजी हो.

Advertisement
मधुरेन्द्र सिन्हानई दिल्ली, 21 May 2014
Opinion: जनता से सीधे संवाद ने मोदी को यहां तक पहुंचाया नरेंद्र मोदी की फाइल फोटो

मणिनगर से रायसीना हिल्स की दूरी लगभग 1,000 किलोमीटर है लेकिन यहां तक पहुंचने में नरेन्द्र मोदी को आठ महीने, 430 रैलियों और तीन लाख किलोमीटर का थका देने वाला सफर तय करना पड़ा.

देश का कोई कोना ऐसा नहीं बचा जहां नरेन्द्र मोदी की आवाज़ न गूंजी हो. जिस प्रतिबद्धता और निष्ठा से उन्होंने देश की जनता से अपने को जोड़ा और उन्हें अपना बनाया वह आजाद भारत के इतिहास में विरले ही देखने को मिलता है. यह संवाद सभी स्वरूपों में था, वह बड़े-बड़े मंचों से हो रहा था, टीवी चैनलों से हो रहा था और सोशल मीडिया के जरिये हो रहा था.

यह तो हैरान कर देने वाली बात है कि एक चाय बेचने वाला लड़का सोशल मीडिया का इतना बड़ा खिलाड़ी बन जाए कि सभी को पीछे छोड़ दे. ट्वीटर जैसे संवाद के माध्यम तो कुछ समय पहले तक इलीट क्लास तक ही सीमित थे. लेकिन नरेन्द्र मोदी ने पहले से ही भांप लिया था कि सोशल मीडिया का यह फॉर्म उन्हें नौजवानों के करीब ले जाएगा, उन नौजवानों के करीब जिनकी आंखों में भविष्य के सुनहरे सपने हैं और जो नई दुनिया का हिस्सा बनना चाहते हैं.

नरेन्द्र मोदी उन करोड़ों नौजवानों के करीब पहुंचे और उनसे संवाद स्थापित करने में सफल हुए. यहां पर यह जानना दिलचस्पी का विषय हो सकता है कि विदेशों में रहे और पढ़े राहुल गांधी सोशल मीडिया के असरदार अस्त्र को कैसे भूल गए. सोशल मीडिया ने लोगों को जोड़ने का जो विशाल मंच दिया है उसका इतना बढ़िया इस्तेमाल आज तक नहीं हुआ था. नरेन्द्र मोदी की यह यात्रा वर्षों तक करोड़ों भारतीय को कुछ बड़ा करने को प्रेरित करेगी क्योंकि यह अजनबियों से संवाद स्थापित करके उन्हें अपना बनाने का अभूतपूर्व प्रयास था. सोशल मीडिया का सटीक इस्तेमाल, हर किसी तक अपनी बातें पहुंचाना और इन सबसे बढ़कर हर बार एक नई बात कहना, इन सभी ने उन्हें बुलंदियों पर पहुंचा दिया जाए.

दिल्ली आते ही उन्होंने अपने संवाद के तरीके को बदल दिया है और अब यह बहुत ही सारगर्भित हो गया है. वह बोलने की बजाय अपनी भाव-भंगिमाओं से ही संवाद स्थापित कर रहे हैं जो प्रधानमंत्री जैसे बड़े पद पर बैठने वाले को शोभा देती है. उनकी बातचीत में पहले से ज्यादा नम्रता आ गई है और वे आक्रामकता से दूर हो गए हैं. चुप रहना एक कला है जिसमें नरसिंह राव को महारत हासिल थी लेकिन मनमोहन सिंह तो इतने चुप रहे कि उसने देश में संवादहीनता की स्थिति पैदा कर दी. अब नरेन्द्र मोदी से हम उम्मीद कर सकते हैं कि उन्होंने संवाद का जो सिलसिला बनाया है, वह आगे भी बना रहेगा.

पाएं आजतक की ताज़ा खबरें! news लिखकर 52424 पर SMS करें. एयरटेल, वोडाफ़ोन और आइडिया यूज़र्स. शर्तें लागू
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay