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ओबामा की भारत यात्राः पड़ोस के सुर बदले, नीयत नहीं

अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा की भारत यात्रा पर पूरी दुनिया की निगाहें लगी थी. भारत में ओबामा की मेहमान नवाज़ी को लेकर जितनी गर्मजोशी थी, उतना ही उत्साह अमेरिका में भी था. सियासी तौर पर ओबामा का ये भारत दौरा कामयाबी की नई इबारत लिख गया. लेकिन इस दौरे ने भारत के दो पड़ोसियों को परेशान कर दिया. दोनों पड़ोसी मुल्क भले ही दिखाने के लिए कुछ भी कहें मगर उनकी नीयत में खोट साफ दिखाई पड़ती है.

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परवेज़ सागरनई दिल्ली, 27 January 2015
ओबामा की भारत यात्राः पड़ोस के सुर बदले, नीयत नहीं

अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा की भारत यात्रा पर पूरी दुनिया की निगाहें लगी थी. भारत में ओबामा की मेहमान नवाज़ी को लेकर जितनी गर्मजोशी थी, उतना ही उत्साह अमेरिका में भी था. सियासी तौर पर ओबामा का ये भारत दौरा कामयाबी की नई इबारत लिख गया. लेकिन इस दौरे ने भारत के दो पड़ोसियों को परेशान कर दिया. दोनों पड़ोसी मुल्क भले ही दिखाने के लिए कुछ भी कहें मगर उनकी नीयत में खोट साफ दिखाई पड़ती है.

बेचैन चीन
जब भारत में ओबामा का भव्य स्वागत किया जा रहा था, तब चीन तिलमिला रहा था. ओबामा भारत और मोदी की तारीफ कर रहे थे तो हमारे पड़ोसी देश चीन की सरकार बेचैन हो रही थी. चीन के तेवर इतने तल्ख हो गए कि उसने भारत को अमेरिका से दूर रहने की हिदायत तक दे डाली. आए दिन भारतीय सीमा में घुसपैठ करने वाले ये कैसे बर्दाश्त कर सकते हैं कि दुनिया का सबसे ताकतवर आदमी भारत में तीन दिन रहे और भारत के साथ अपने रिश्तों को और मजबूत करने की दिशा में काम करे.

फौरन चीन ने पाकिस्तान के साथ अपनी दोस्ती का बखान किया. एक बयान जारी कर पाक को अपना सदाबहार दोस्त बता दिया. यही नहीं पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल राहील शरीफ चीन के दौरे पर चले गए. वहां दोनों देश एक दूसरे की तारीफ के कसीदे पढ़ रहे थे. मतलब साफ है कि हमारे दोनों पड़ौसी अपनी जलन को शब्दों की माला में पिरो रहे थे. चीन कह रहा है कि भारत, चीन की बढ़ती ताकत को रोकने के लिए अमेरिका के साथ अपने रिश्तों को मजबूत करने की कोशिश में जुटा है. क्योंकि वो खुद एशिया में बड़ी शक्ति बनने का सपना देख रहा है. हालांकि चीन ने इशारों में ये भी कहा कि भारत और चीन को एक दूसरे से मजबूत संबधों के बारे में सोचना चाहिए. ये सारी बातें चीन की तिलमिलाहट और बेचैनी को जाहिर करने के लिए काफी हैं.

परेशान पाकिस्तान
ओबामा के भारत दौरे से अगर चीन बेचैन है तो पाकिस्तान भी कम परेशान नहीं. वहां की नवाज़ शरीफ सरकार ने गणतंत्र दिवस की मिठाई कबूल की, दोस्ती को मजबूत करने वाला बयान भी दिया. लेकिन वहां की मीडिया ने सब सच जाहिर कर दिया. उनका गुस्सा भी न छिप सका और परेशानी भी नहीं. ओबामा की भारत यात्रा के पहले दिन ही पाक की नापाक नीयत सामने आ गई. सीमा पर गोलीबारी की गई.

दूसरे दिन वहां के एक न्यूज़ चैनल ने सभ्यता को ताक पर रखकर पीएम मोदी को 'गुजरात का कसाई' और 'गधा' बता दिया. पाक सरकार की इस जलन और परेशानी का एक सबब और भी है कि पाकिस्तान ने भारत दौरे पर आने से पहले ओबामा को अपने यहां आने की दावत दी थी लेकिन ओबामा ने पाक के दावतनामें को ठुकरा दिया था. ऐसे में पाकिस्तान ने चीन के साथ अपने रिश्तों को जाहिर करने की कवायद शुरु कर दी.

भारत की कामयाबी
दुनिया के सबसे ताकतवर नेता ओबामा ने भारत को अपना ठोस साझेदार बनाए जाने पर जोर दिया. हैदराबाद हाउस में ओबामा-मोदी के बीच कई साझेदारियों पर हस्ताक्षर हुए. सबसे अहम है अमेरिका से परमाणु करार, जिसकी अडचनों को ओबामा ने दूर कर दिया. इसके अलावा आतंकवाद के खि‍लाफ एक व्यापक रणनीति, सुरक्षा परिषद में भारत की स्थाई सदस्यता, जलवायु परिवर्तन को देखते हुए नए स्मार्ट शहरों का विकास, डिजिटल और व्यापार क्षेत्र, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के बीच ‘हॉटलाइन’ स्थापना, एयरक्राफ्ट तकनीक साझा करना, विदेशी निवेश के तहत रक्षा और बीमा क्षेत्रों में एफडीआई नियमों को उदार करना, अमेरिका की मदद से भारत के विशाखापत्तनम, इलाहाबाद और अजमेर को स्मार्ट सिटीज बनाने जैसे बड़े करार किए गए हैं जिनका फायदा भारत को मिलेगा.

ओबामा की भारत यात्रा पीएम मोदी के लिए एक बड़ी सियासी कामयाबी है. अमेरिका का भारत के प्रति दोस्ताना और सकारात्मक रुख ही पाकिस्तान और चीन को बेचैनी और परेशानी का सबब बना है. बहरहाल, उम्मीद की जा रही है कि ओबामा के भारत दौरे के बाद दुनियाभर में भारत की इस खास मेहमान नवाज़ी के चर्चे कई दिनों तक होते रहेंगे.

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