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नवंबर की सैलरी जादुई है...मोबाइल पर तो दिखती है, हाथ नहीं आती

अभी तो महीने की शुरुआत भी कायदे से नहीं हुई है. कई कंपनियां अपने कर्मचारियों को सैलरी 7 से 10 तारीख तक भी देती हैं. अंदाजा लगाइए इन दस दिनों में बैंकों में क्या हालात होंगे.

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विवेक शुक्ला [Edited by: लव रघुवंशी]नई दिल्ली, 05 December 2016
नवंबर की सैलरी जादुई है...मोबाइल पर तो दिखती है, हाथ नहीं आती बैंक

नौकरी करने वाले पूरे महीने मेहनत करने के बाद महीने के आखिरी दिनों में सबसे ज्यादा किस चीज का इंतजार करते हैं. जाहिर है अपनी सैलरी का. लेकिन नोटबंदी और कैशक्रंच के मौजूदा दौर में हालात कुछ ऐसे बन गए हैं कि सैलरी मोबाइल पर तो नजर आएगी, लेकिन हाथ में नहीं. दिसंबर महीने की शुरूआत से ही बैंक सैलरी बांटने की तैयारी शुरू कर देते हैं. ऐसे में बैंकों की तैयारी का जायजा लेने हम नोएडा अट्टा मार्केट के एचडीएफसी बैंक पहुंचे. यहां हालात तमाम और बैंकों से कुछ अलग नहीं मिले. जिन बैंकों में कैश है वहां सर्वर डाउन का बोर्ड लगा है और जहां सर्वर दुरूस्त है वहां कैश नदारद.

दिसंबर में बैंकों के लिए सैलरी चैलेंज
बहरहाल, बैंक के बाहर ही हमें कैश का इंतजार करते शिवकुमार मिले. कुमार इंदिरापुरम में रहते हैं और बुधवार को जब उनकी सैलरी का मैसेज उनके मोबाइल पर फ्लैश हुआ तो पहले वो इंदिरापुरम में बैंकों में चक्कर काटने शुरू किए. तमाम बैंकों से ये जवाब मिलने के बाद कि अपने होम ब्रांच जाएं कुमार अट्टा मार्केट के एचडीएफसी बैंक में पहुंचे, जहां उनका सैलरी अकाउंट है. लेकिन यहां भी उन्हें अपने महीने भर की मेहनत की कमाई की पाई भी नसीब नहीं हुई. कुमार कहते हैं कि महीने की शुरूआत से ही घर से बाहर तक के खर्च के लिए पैसे की जरूरत होती है, लेकिन यहां बैंकों में या तो सर्वर ना चलने का बहाना होता है या कैश ही नहीं होता.

सैलरी अकाउंट में तो दिखती है, हाथ नहीं आ रही
नौकरीपेशा लोगों की जिंदगी महीने की पहली तारीख से शुरू होती है और महीने की आखिरी तारीख आते आते सांसे तोड़ने लगती हैं. आम लोगों की तनख्वाह की उम्र तो महीने के तीस दिन की भी नहीं होती. नोटबंदी के दौर में सख्ती का आलम ये है कि महीने भर मेहनत कर लोगों ने जिस सैलरी का इंतजार किया, वो उनके बैंक अकाउंट में तो है, लेकिन हाथों तक नहीं पहुंचती. हांलाकि नियमानुसार लोग अपने खाते से हर हफ्ते 24 हजार तक निकाल सकते हैं. लेकिन बैंक से जुड़े सूत्रों का कहना है कि शहरी इलाकों में भी ज्यादातर बैंक की शाखाओं में बीस लाख प्रतिदिन से ज्यादा नहीं पहुंच रहे. ऐसे में बैंक क्या तो जरूरतमंद लोगों को कैश बांटें और क्या नौकरीपेशा की सैलरी.

लाइन में खड़े रहिए
अभी तो महीने की शुरुआत भी कायदे से नहीं हुई है. कई कंपनियां अपने कर्मचारियों को सैलरी 7 से 10 तारीख तक भी देती हैं. अंदाजा लगाइए इन दस दिनों में बैंकों में क्या हालात होंगे. कुछ कंपनियां अपने कर्मचारियों को सैलरी का कुछ हिस्सा कैश देने की तैयारी भी कर रही थीं, लेकिन बाजार में कैश क्रंच इतना ज्यादा है कि कंपनियां हिम्मत करें तो भी कहां से.

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