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नक्सलियों के विस्फोटक लदे तीर ने बढ़ाई सुरक्षाबलों की चिंता

सुरक्षाबलों पर नक्सलियों के हालिया हमलों में विस्फोटकों से लदे तीर के इस्तेमाल की बात सामने आई है. बताया जाता है कि छत्तीसगढ़ में सुरक्षाबलों से मुठभेड़ में नक्सलियों ने इसी हथियार का इस्तेमाल कर जवानों को भारी नुकसान पहुंचाया.

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aajtak.in
धरमबीर सिन्हा रांची, 12 May 2017
नक्सलियों के विस्फोटक लदे तीर ने बढ़ाई सुरक्षाबलों की चिंता हालिया हमलों में विस्फोटकों से लदे तीर के इस्तेमाल की बात सामने आई है

सुरक्षाबलों पर नक्सलियों के हालिया हमलों में विस्फोटकों से लदे तीर के इस्तेमाल की बात सामने आई है. बताया जाता है कि छत्तीसगढ़ में सुरक्षाबलों से मुठभेड़ में नक्सलियों ने इसी हथियार का इस्तेमाल कर जवानों को भारी नुकसान पहुंचाया.

रैंबो फिल्म में दिखा था तीरों का यूं इस्तेमाल
करीब दो दशक पहले आई रैंबो सीरीज की एक फिल्म में अभिनेता सिल्वेस्टर स्टैलोन को तीर-धनुष का घातक इस्तेमाल करते दिखाया गया था. हालांकि वह फिल्म थी, लेकिन कहते हैं न कि फिल्में कभी-कभी ऐसी अविष्कारों की जनक बन जाती हैं, जिसे आमतौर पर लोग नजरअंदाज कर देते हैं.

लगभग इसी तर्ज पर नक्सलियों ने तीर-धनुष को मॉडिफाई कर एक ऐसे घातक अस्त्र में बदल दिया है, जिसकी वजह से सुरक्षाबलों को भारी क्षति हुई और अब इस वजह से सुरक्षाबल अपनी रणनीति पर दोबारा सोचने को मजबूर हो गए हैं.

जंगलों में आदिवासी करते हैं तीर-धनुष का इस्तेमाल
झारखंड के नक्सलग्रस्त जिले खूंटी के सुदूरवर्ती बोंदा गांव के आदिवासी आज भी जंगली जानवरों से रक्षा या फिर कभी-कभार उनके शिकार के लिए तीर-धनुष का इस्तेमाल करते हैं. अब नक्सलियों ने इन्हीं तीरों को मॉडिफाइड कर इसके अगले हिस्से पर IED फिट कर दिया. उनके लिए इन तीरों को बनाना और चलाना काफी आसान और सस्ता पड़ता है. इस वजह से ये IED लदे तीर नक्सलियों की पहली पसंद बन गए हैं.

सुरक्षाबलों की दबिश और नोटबंदी से बढ़ी नक्सलियों की परेशानी
हाल के दिनों में सुरक्षाबलों ने नक्सलियों को भारी नुकसान पहुंचाया है. उनके हथियारों की सप्लाई चेन भी धवस्त कर दी गई है. इसके साथ ही नोटबंदी ने भी नक्सलियों के आर्थिक तंत्र पर गहरी चोट पहुंचाई है. ऐसे में अब अपनी अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे नक्सलियों ने सुरक्षाबलों पर तीर बम का इस्तेमाल कर एक नई चुनौती पेश कर दी है.

लैंड माईन और बूबी ट्रैप से बचाव की तकनीक सीख कर नक्सलियों से लोहा लेने वाले जवानों को अब इस नई मुसीबत से बचाव के भी गुर बहुत जल्द सीखने होंगे. ऐसे में उन्हें अब जमीन पर नजर साधने के साथ-साथ पेड़ों पर भी ध्यान रखना होगा, क्योंकि विस्फोटक लदे तीर से हमले का जाल कहीं से भी बुना जा सकता है.

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