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नक्सलियों ने सरकारी कर्मचारियों से मांगा महीनेभर का वेतन, दी धमकी

नक्सलियों के इस फरमान के बाद अपनी जान की रक्षा के लिए सरकारी कर्मचारी ब्याज पर पैसे लेने के लिए भटक रहे हैं. कुछ कर्मचारियों ने तो नक्सलियों तक पैसा पहुंचा भी दिया है.

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IANS [Edited by: श्रीधर भारद्वाज]नई दिल्ली, 05 June 2017
नक्सलियों ने सरकारी कर्मचारियों से मांगा महीनेभर का वेतन, दी धमकी नक्सलियों का फरमान

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के बासागुड़ा इलाके में सरकारी कर्मचारियों के साथ बैठक कर के नक्सलियों ने एक फरमान जारी किया है. नक्सलियों ने कहा है कि इलाके में काम कर रहे सभी सरकारी विभाग के कर्मचारी अपने एक माह का वेतन नक्सलियों को दे दें. वेतन न देने की सूरत में नक्सलियों ने अंजाम भुगतने को तैयार रहने को कहा है.

नक्सलियों के इस फरमान के बाद अपनी जान की रक्षा के लिए सरकारी कर्मचारी ब्याज पर पैसे लेने के लिए भटक रहे हैं. कुछ कर्मचारियों ने तो नक्सलियों तक पैसा पहुंचा भी दिया है. इस फरमान के बाद से ही बासागुड़ा इलाके में काम कर रहें सभी सरकारी कर्मचारी दहशत में हैं.

बीजापुर के एसपी के.एल. ध्रुव ने कहा की 'इस मामले की जानकारी उन्हें मिल चुकी है, लेकिन अभी तक कोई भी लिखित शिकायत नहीं मिली है. अगर इस मामले में कोई आवेदन या लिखित शिकायत उन्हें मिलती है, तो उसके आधार पर नक्सलियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर के उचित कार्रवाई की जाएगी.'

नक्सलियों द्वारा बासागुड़ा इलाके में बैठक आयोजित कर फरमान जारी किया गया है. इस फरमान के बाद से सरकारी कर्मचारी बासागुड़ा इलाके में अपनी पोस्टिंग को कोस रहे हैं. साथ ही वे लोग दहशत के साए में दिन काटने को मजबूर हैं.

एक व्यक्ति ने बताया कि "हाल ही में बासागुड़ा इलाके के जंगल में नक्सलियों ने सरकारी कर्मचारियों, वाहन मालिकों और व्यापारियों की एक बैठक बुलाई थी. इस बैठक में व्यापारी और वाहन मालिकों से सालाना पैसों की मांग की गई थी. जबकि सरकारी कर्मचारियों को कहा गया कि उन्हें एक माह का वेतन नक्सलियों को देना होगा. अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहें."

कुछ कर्मचारियों ने नक्सलियों को धनराशि देने की भी बात सामने आ रही है. बता दें कि हाल ही में नक्सलियों का तेंदूपत्ता लेवी वसूली से मिली लाखों रुपये की धनराशि तेलंगाना में पकड़ी गई थी. जिसके बाद तेंदूपत्ता ठेकेदार भी सतर्क हो गए है और नक्सलियों तक पहुंचाने वाले कमीशन पर रोक लगा दी है. उसके कारण नक्सलियों की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई और अब नक्सली पैसों के लिए हाथ-पैर मारने लगे हैं.

एक खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, तेंदूपत्ता संग्रहण के समय में नक्सलियों का सालाना कारोबार 15 सौ करोड़ रुपए की थी. लेकिन इस साल इनके वसूली का ग्राफ गिरने की खबर है. इस नुकसान को पूरा करने के लिए नक्सलियों ने सरकारी कर्मचारियों से वसूली कर अपने सालाना लक्ष्य को पूरा करने की नई योजना बनाई है.

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