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'राइट टू रिजेक्ट' का मोदी ने किया तहे दिल से स्वागत

बीजेपी की तरफ से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुप्रीम कोर्ट के वोटिंग के दौरान 'राइट टू रिजेक्ट' के फैसले का स्वागत किया है. नरेंद्र मोदी ने अपने ब्लॉग पर लिखा, 'मैं तहे दिल से इस फैसले का स्वागत करता हूं.'

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aajtak.in
आज तक ब्यूरो [Edited By: नमिता शुक्ला]नई दिल्ली, 27 September 2013
'राइट टू रिजेक्ट' का मोदी ने किया तहे दिल से स्वागत नरेंद्र मोदी

बीजेपी की तरफ से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुप्रीम कोर्ट के वोटिंग के दौरान 'राइट टू रिजेक्ट' के फैसले का स्वागत किया है. नरेंद्र मोदी ने अपने ब्लॉग पर लिखा, 'मैं तहे दिल से इस फैसले का स्वागत करता हूं.'

मोदी ने लिखा, 'माननीय सुप्रीम कोर्ट ने सुबह चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि मतदान के दौरान वोटरों को उम्मीदवार रिजेक्ट करने का भी अधिकार दिया जाए.'

मोदी ने लिखा, 'मैं इस फैसले का तहे दिल से स्वागत करता हूं. मुझे उम्मीद है कि इस फैसले का बड़ा असर हमारे लोकतंत्र पर पड़ेगा. इस फैसले से हमारा लोकतंत्र पहले से ज्यादा सुदृढ़ और आकर्षक हो जाएगा.' मोदी ने कहा कि वो काफी समय से चुनावों में राइट टू रिजेक्ट की वकालत कर चुके हैं, इसके बिना सिस्टम में कुछ कमी थी.

मोदी के मुताबिक, 'अभी ऐसा है कि अगर एक सीट से 10 उम्मीदवार खड़े होते हैं, तो वोटर को उन्हीं 10 में से एक उम्मीदवार चुनने के लिए बाध्य हो जाते हैं. इस फैसले से वोटरों का सशक्तिकरण होगा और वो अपना गुस्सा जाहिर करके उम्मीदवार को रिजेक्ट कर पाएंगे.'

मोदी ने लिखा, 'इस अधिकार से वोटर ये संदेश दे पाएंगे कि हम उम्मीदवार, उम्मीदवार की पार्टी और पार्टी पॉलिसी को पसंद नहीं करते हैं. हम वोटिंग अनिवार्य करने का बिल लेकर आए थे, जिसमें राइट टू रिजेक्ट भी था, लेकिन कांग्रेस पार्टी ने घोर विरोध किया था. ये बिल 2 बार 2008 और 2009 में पास किया गया था, लेकिन माननीय गवर्नर ने इस पर रोक लगा दी थी.'

मोदी ने साथ ही लिखा, 'लेकिन दोस्तों राइट टू रिजेक्ट और अनिवार्य वोटिंग पर बहस का तब तक कोई अर्थ नहीं है जबतक आप रजिस्टर्ड वोटर नहीं हैं. मैंने सुना है कि 18 से 24 साल के कई युवा हैं जिन्होंने वोटर के तौर पर अभी तक रजिस्‍ट्रेशन नहीं कराया है. इससे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण कुछ नहीं हो सकता है.'

मोदी ने लिखा, 'लोकतंत्र को सिर्फ हमलोग मजबूत बना सकते हैं. एक वोटर के तौर पर हम अपने देश के 'भाग्य विधाता' हैं. सुप्रीम कोर्ट ने आज जो कहा वो शानदार है लेकिन अब हमारी बारी है एक साथ खड़े होने की और अपने लोकतंत्र को और मजबूत बनाने की. जिससे आने वाले समय में हमारा देश खूब तरक्की करे.'

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