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बाढ़ में जान बचाते हैं फौजी तो कश्मीर में तालियां भी बजती हैं: मोदी

बाढ़ में जान बचाते हैं फौजी तो कश्मीर में तालियां भी बजती हैं: मोदी
बालकृष्ण [edited by: मोहित ग्रोवर]नई दिल्ली, 21 April 2017

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बात पर गहरी चिंता जाहिर की है कि सरकार के कई विभाग आपस में ही एक दूसरे के खिलाफ मुकदमा करके लड़ते रहते हैं. उन्होंने कहा कि इस से कोर्ट का कीमती समय भी बर्बाद होता है और सरकार का कामकाज भी प्रभावित होता है. मोदी ने कहा कि वह आज तक इस बात को नहीं समझ पाए कि जब सरकार एक ही है तो उसके विभागों का आपस में कोर्ट में जाकर लड़ने का क्या मतलब है?

शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली के विज्ञान भवन में सिविल सर्विसेज डे पर देश भर से आए हुए करीब 600 अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे. अपनी पाठशाला में मोदी ने अफसरों को कई मूलमंत्र दिए और उनसे कहा कि देश को तरक्की के रास्ते पर ले जाने के लिए उनके पास अभी सबसे सुनहरा मौका है क्योंकि उनकी सरकार में आमूलचूल बदलाव के लिए जरूरी राजनीतिक इच्छाशक्ति है.

मोदी ने कहा कि सिविल सर्विसेज में वह लोग आते हैं जिनको देश में सबसे होनहार माना जाता है. इसके बावजूद इसकी क्या वजह है कि आम लोगों के मन में अफसरों के प्रति 'भाव' की जगह 'अभाव' है. इस पर आत्म चिंतन करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि अच्छे काम का असर हर जगह दिखता है. जैसे कश्मीर में बाढ़ में फंसे लोगों को बचाने के लिए जब फौज के लोग जाते हैं तो वह लोग भी उस वक्त ताली बजाते हैं. भले ही बाद में पत्थर फेंकते हों.

मोदी ने हल्के फुल्के अंदाज में कहा कि बहुत से लोग सिविल सर्विसेस में जाने के लिए कोचिंग करके यहां तक पहुंचे लेकिन अब उनके ऊपर बहुत बड़ी जिम्मेदारी है. करीब 45 मिनट के अपने भाषण में मोदी ने अफसरों को हंसाया भी और उन्हें गहरी नसीहत भी दी.

मोदी ने कहा कि सिस्टम को बदलने के लिए या उसमें सुधार करने के लिए सबसे बेहतर सलाह वही ऑफिसर दे सकते हैं जिन्होंने इस सिस्टम में लंबे समय तक काम किया है. लेकिन अनुभव भी कई बार बोझ भी बन जाता है. कई बार अनुभवी ऑफिसर यह सोचने लगते हैं कि किसी नए आदमी को ऐसा काम करने का मौका ना मिले जिससे उसकी वाहवाही हो. इस सोच को बदलने की जरूरत है क्योंकि देश तभी आगे बढ़ेगा जब एक आदमी के अच्छे काम को दूसरा आदमी और आगे ले जाएगा. उन्होंने कहा कि नए विचारों को बढ़ावा देने की जरूरत है क्योंकि नए लोगों में नई ऊर्जा और नई सोच होती है.

चुटीले अंदाज में मोदी ने कहा किस जिले में कई बार ऑफिसर आज कल दिनभर काफी व्यस्त रहते हैं. क्योंकि वह दिन भर फोन पर लगे रहते हैं. उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया की ताकत को वह समझते हैं लेकिन सोशल मीडिया का इस्तेमाल अफसरों को समाज के हित के काम के लिए करना चाहिए ना की समय काटने के लिए या फिर खुद को बढ़ावा देने के लिए. उदाहरण देते हुए उन्होंने समझाया कि अगर सोशल मीडिया पर इस बात का प्रचार किया जाए की इस दिन पूरे शहर में टीकाकरण होगा और सब लोग इस में भाग लेने आएं, तो यह सोशल मीडिया का सही इस्तेमाल हुआ.

लेकिन उसी सोशल मीडिया पर अगर ऑफिसर पोलियो की ड्राप पिलाते हुए बच्चे के साथ अपनी फोटो लगा कर खुश हों तो यह ठीक बात नहीं है. सिविल सर्विसेस डे के मौके पर मोदी ने देश वर्ष के चुने हुए अधिकारियों को पुरस्कार भी दिया जिनके कामों से समाज में बड़ा परिवर्तन हुआ है

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