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पति असमर्थ तो पत्नी को ससुराल से भी मिलेगा गुजारा-भत्ता!

कानून आयोग ने सरकार से मंगलवार को एक रिपोर्ट सौंपकर सिफारिश की है कि हिंदू कानून में संशोधन होना चाहिए, जिससे बहू का भी सास-ससुर की संपत्ति पर अधिकार बन पाए. अगर पति गुजारा-भत्ता दे पाने में असमर्थ है तो वह भत्ता ससुराल वाले महिला को दें.

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aajtak.in [Edited By: महुआ बोस]नई दिल्ली, 07 January 2015
पति असमर्थ तो पत्नी को ससुराल से भी मिलेगा गुजारा-भत्ता! Symbolic Image

कानून आयोग ने सरकार से मंगलवार को एक रिपोर्ट सौंपकर सिफारिश की है कि हिंदू कानून में संशोधन होना चाहिए, जिससे बहू का भी सास-ससुर की संपत्ति पर अधिकार बन पाए. अगर पति गुजारा-भत्ता दे पाने में असमर्थ है तो वह भत्ता ससुराल वाले महिला को दें.

मौजूदा प्रावधानों में एक महिला को उसके पति की शारीरिक या मानसिक अक्षमता, लापता होने, अलग होने या अन्य कारणों से भत्ता न दे पाने की स्थ‍िति में ससुराल वालों से गुजारा भत्ता दावा करने का अधिकार नहीं है.

कानून मंत्री सदानंद गौड़ा के सामने प्रस्तुत रिपोर्ट में आयोग ने कहा, 'जिस हिंदू महिला का पति गुजारा भत्ता देने में असमर्थ है, उसके अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए.' पैनल के मुताबिक धारा 18 के सेक्शन 4 के तहत, 'जहां पति शारीरिक, मानसिक, पत्नी को छोड़ने, लापता होने या किसी भी कारण से पत्नी को गुजारा भत्ता देने में असमर्थ है तो हिंदू पत्नी को संयुक्त हिंदू परिवार से भत्ता लेने का अधिकार मिलना चाहिए और वह भत्ता पति की संपत्त‍ि में हिस्से से अलग होगा.'

यह सिफारिश की गई कि अब हिंदू एडॉप्शन एंड मेंटेनेंस एक्ट 1956 में बदलाव किया जाए. अगर पति ने परिवार से संपत्त‍ि में पहले ही हिस्सा ले लिया है तो उस सूरत में पत्नी को सिर्फ गुजरा भत्ता मिलेगा न कि संपत्त‍ि में हिस्सा. पैनल ने कहा कि पहले पति की ओर से गुजारा भत्ता न दे पाने पर पत्नी के पास संपत्ति में हिस्सा पाने के लिए कोर्ट के अनगिनत चक्कर लगाने के अलावा कोई उपाय नहीं था, यह प्रक्रिया बहुत लंबी भी थी.

आपको बता दें कि यह मुद्दा पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के जरिए पिछले साल आयोग के पास आया था, जहां जहां एक मानसिक रूप से अक्षम पति के पिता से पत्नी ने संपत्त‍ि में हिस्सा मांगा था, जिससे वह अपना गुजारा चला सके, पति और बच्चे की देखरेख कर सके. एक समझौते के तहत उसे हिस्सा तो मिला, लेकिन सुसराल वालों ने बाद में उसे संपत्त‍ि से वंचित कर दिया. तब मामला उच्च न्यायालय तक पहुंचा था.

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