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भूकंप की तीव्रता नापने के लिए इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम बनाने की योजना नहीं: हर्षवर्धन

विज्ञान एवं प्रौद्यौगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने लोकसभा में एक सवाल के जवाब में बताया कि फिलहाल भूकंप मापने के लिए इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम स्थापित करने की कोई योजना नहीं है.

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aajtak.in
नवनीत मिश्रा नई दिल्ली, 24 June 2019
भूकंप की तीव्रता नापने के लिए इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम बनाने की योजना नहीं: हर्षवर्धन सांकेतिक तस्वीर.

संसद में नरेंद्र मोदी सरकार ने बताया है कि देश में भूकंप की तीव्रता मापने के लिए इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली स्थापित करने की कोई योजना नहीं बनी है. लोकसभा में हुए एक सवाल के जवाब में विज्ञान एवं प्रौद्यौगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने यह जानकारी दी. दरअसल, सांसद अशोक महादेव राव नेते ने लोकसभा में भूकंप से जुड़े कुछ सवाल पूछे थे. मसलन, क्या सरकार ने अक्टूबर 2005 में आए तीव्र भूकंप के बाद इसकी तीव्रता के सटीक मापन के लिए इलेक्ट्रानिक प्रणाली स्थापित करने की कोई योजना बनाई है? यदि हां तो इसका ब्यौरा क्या है और इस प्रणाली को कब तक स्थापित किया जाना है.

इस सवाल का जवाब देते हुए डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि भूकंप की तीव्रता मापने के लिए इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियां स्थापित करने की कोई योजना तैयार नहीं है. हालांकि उन्होंने यह जरूर बताया कि राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने हाल ही में देश में और इसके आसपास भूकंप की गतिविधि की निगरानी के लिए अत्याधुनिक प्रणालियों के साथ भूकंप विज्ञान संबंधी नेटवर्क स्थापित किया है. मौजूदा समय में इस नेटवर्क में देश में फैली हुई 115 वेधशालाएं हैं. ये सभी वेधशालाएं भूकंप के कारण होने वाले भूमि कंपन और संवेग को रिकॉर्ड करने वाले एक्सेरोरोमीटर तता ब्रॉडबैंड सिस्मोमीटर सेंसर्स से सुसज्जित हैं. जिसका उपयोग बाद में रिकॉर्डिंग स्थल पर संबंधित भूकंप की तीव्रता की गणना के लिए किया जा सकता है.

विदेशों में क्या है व्यवस्था

अमेरिका सहित दुनिया के कई देशों में भूकंप की त्वरित और सटीक वॉर्निंग के लिए अर्थक्वेक अर्ली वार्निंग सिस्टम लागू है. विज्ञान और तकनीक के इस्तेमाल से तैयार अलर्ट डिवाइसेस के जरिए अमेरिका में मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित है. जिससे भूकंप के झटके लगने के कुछ ही सेकंड में सार्वजनिक स्थलों पर अलर्ट जारी हो जाता है. ताकि लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचकर खुद को सेफ कर सकें. अमेरिका में 2006 से यह सुविधा लागू है.

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