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मक्का मस्जिद केस में फैसला सुनाने के बाद जज का इस्तीफा, क्या ये है असली वजह?

लेकिन इस मामले में फैसला सुनाने वाले जज के. रवींद्र रेड्डी ने कुछ ही देर बाद अपना इस्तीफा दे दिया. जिसने हर किसी को चौंका कर रख दिया.

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मीतू जैन [Edited By: मोहित ग्रोवर]नई दिल्ली, 17 April 2018
मक्का मस्जिद केस में फैसला सुनाने के बाद जज का इस्तीफा, क्या ये है असली वजह? मक्का मस्जिद ब्लास्ट केस में आया फैसला

2007 के हैदराबाद मक्का मस्जिद ब्लास्ट मामले में सोमवार को NIA की कोर्ट ने फैसला सुनाया. कोर्ट ने पर्याप्त सबूत ना होने पर असीमानंद समेत सभी पांच आरोपियों को बरी कर दिया. लेकिन इस मामले में फैसला सुनाने वाले जज के. रवींद्र रेड्डी ने कुछ ही देर बाद अपना इस्तीफा दे दिया. जिसने हर किसी को चौंका दिया.

लेकिन अब इस मामले में एक और चौंकाने वाला सच सामने आया है. बताया जा रहा है कि हैदराबाद बंजारा हिल्स के निवासी कृष्णा रेड्डी ने हैदराबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के सामने जज रवींद्र रेड्डी के खिलाफ एक शिकायत की थी. उन्होंने आरोप लगाया था कि जज रेड्डी ने जल्दबाजी में जमीन कब्जे के मामले में एक आरोपी को बेल दी थी. याचिकाकर्ता ने इस मामले में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे. 

इस मामले में याचिकाकर्ता टी. श्रीरंगा राव ने इंडिया टुडे को बताया कि ये शिकायत करीब 3 महीने पहले दायर की गई थी, जिसके बाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने जस्टिस रेड्डी के खिलाफ सतर्कता जांच के आदेश दिए थे. ये जांच अभी भी जारी है. उन्होंने बताया कि अगर जज के पास इस्तीफा देने के कोई कारण होते तो वह वॉलेंटियर रिटायरमेंट लेते और सभी सुविधाओं का लाभ ले सकते थे. लेकिन उन्होंने इस्तीफा दिया है तो उन्हें रिटायरमेंट के बाद की कोई सुविधा नहीं मिलेगी.

कृष्णा रेड्डी के अनुसार, एक व्यक्ति बंजारा हिल्स में प्रॉपर्टी के नाम पर उन्हें 150 करोड़ रुपए का चूना लगा रहा था. जिसके बाद उस व्यक्ति ने जज रवींद्र रेड्डी के सामने अग्रिम जमानत की अपील की थी. कृष्णा रेड्डी द्वारा दी गई शिकायत के अनुसार, उस दौरान जज रेड्डी कोर्ट नंबर 9 में दो दिनों 4 और 5 दिसंबर के दौरान इनचार्ज थे. शिकायत में उन्होंने बताया कि इस केस की सुनवाई 5 दिसंबर को की गई और उसी दिन बेल दे दी गई.

शिकायत में कहा गया है कि मेरे अनुसार मेट्रोपॉलिटियन सेशन जज सुनवाई के अगले दिन ही अपना फैसला सुना सकता है. लेकिन जज ने उसी दिन फैसला सुनाया. जिसके आधार पर मैंने कहा कि ये मामला काफी गंभीर है. उन्होंने शिकायत में कहा कि ऐसा लग रहा था कि वे बेल का फैसला देने में काफी जल्दबाजी में थे. इसी आधार पर उन्होंने शिकायत की थी, और जांच की मांग की थी.

आपको बता दें कि पिछले कुछ महीने में ही हैदराबाद में लोअर कोर्ट के तीन जजों को गिरफ्तार किया गया है. अभी ये जज भ्रष्टाचार के आरोप के बाद न्यायिक हिरासत में हैं. गौरतलब है कि इस फैसले के बाद जज ने जिस तरह इस्तीफा दिया उसके बाद लगातार राजनीतिक टिप्पणियां आ रही थीं.

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